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ये हैं ऐसे लोग जो त्योहार पर नहीं जाएंगे घर, कहा- फर्ज निभाना जरूरी

कोरोनाकाल की विपरीत परिस्थिति में हम सुरक्षित रहें, इसके लिए बहुत से लोग अपनी जान-जोखिम में डालकर कोरोना से हमारी रक्षा कर रहे हैं। सैकड़ों डॉक्टर, नर्स, लैब टेक्निशियन, स्वच्छता व क्वारेंटाइन सेंटर्स की जिम्मेदारी संभाल रहे स्टाफ, पुलिसकर्मी हफ्तों घर नहीं जा पा रहे। बच्चों, परिवार से दूर हैं। भास्कर ऐसे कोरोना वॉरियर्स के त्याग का सम्मान करता है। इसी सोच के तहत रक्षाबंधन पर ‘सलामती की डोर’ अभियान हमारी एक छोटी-सी कोशिश है कि हर कोरोना वॉरियर तक राखी के रूप में हम अपनेपन का स्नेह पहुंचा सकें। इस अभियान के तहत भास्कर की टीम अस्पताल, नगर के विभिन्न वॉर्ड, क्वारेंटाइन सेंटर्स समेत विभिन्न जगहों पर तैनात कोरोना वॉरियर्स तक राखी पहुंचाएगी। यह रेशम की डोर सिर्फ उनके त्याग का सम्मान नहीं बल्कि लोगों की ओर से उनकी सलामती की कामना का प्रतीक भी होगी। इस नेक काम में भास्कर के साथ महिला समूह, सामाजिक संगठन भी हमराही बने हैं।

कोरोना के दौर में हमारी जवाबदारी ज्यादा, नहीं जा पाऊंगी राखी बांधने
जिला अस्पताल में पदस्थ स्टाफ नर्स बबीता बघेल ने कहा कि वह चार सालों से यहां पदस्थ है। हर साल राखी पर अपने भाई राहुल, योगेंद्र को राखी बांधने जगदलपुर जाती थी। हमारे प्रोफेशन में कोरोना का खतरा ज्यादा रहता है। यही कारण है इस बार अपने दोनों भाइयों को राखी बांधने नहीं जा पा रही हूं। दोनों भाइयो को पोस्ट से राखी भेजी है। राखी के दिन दोनों भाइयों से वीडियो काल पर बात करूंगी। इस बार की राखी बहुत मिस करूंगी लेकिन पूरा देश ही नहीं विश्व कोरोना से जूझ रहा है एेसे में हमारी जवाबदारी बढ़ जाती है।

राखी पर भाई को बहुत मिस करूंगी: यामिनी
जिला अस्पताल की ही स्टाफ नर्स यामिनी नाग ने कहा कि हर साल राखी पर अपने भाइयों को राखी बांधने फरसगांव जाती थी। वहां सबसे मिलती थी अच्छा लगता था लेकिन इस साल राखी पर भाई डोमेंद्र को राखी बांधने नहीं जा पाऊंगी। राखी पर भाई को बहुत मिस करूंगी।

कोरोना के कारण इस बार नहीं आ पा रही है बहनें : जागेंद्र
कांकेर थाना में पदस्थ आरक्षक जागेंद्र गोटी ने कहा कि हर साल रक्षाबंधन पर राखी बांधने जगदलपुर, रायपुर, धमतरी से बहनें आती थीं। इस बार तीनों जगह से बहनों ने राखी पोस्ट से भेज दी है। इस वर्ष भी बहनों की बहुत इच्छा है कि वे राखी बांधने आएं लेकिन कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते मैंने ही मना कर दिया है। इस बार बहनों द्वारा पोस्ट से भेजी राखी बांधकर काम चलाना पड़ेगा।

राखी पर इस बार नहीं होगी रौनक: ढाल सिंह
कांकेर थाना में पदस्थ आरक्षक ढाल सिंह गंगासागर ने कहा कि प्रतिवर्ष रायपुर, कुरूद, राजिम से बहनें राखी बांधने पहुंचती थी। राखी के दिन बहनों के आने से घर पर बहुत रौनक रहती थी। इस बार कोरोना संक्रमण के खतरे के चलते बहनें नहीं पहुंच पा रही है। राखी पर बहनों की बहुत याद आएगी।

इतने वॉरियर्स काम कर रहे

  • स्वास्थ्य विभाग - 125
  • पुलिसकर्मी - 100
  • शिक्षा विभाग - 90
  • सफाईकर्मी - 25


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