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139 दिन में से 79 दिन आधी-अधूरी दुकानें ही खुलीं दावा- इससे 20 हजार करोड़ का बिजनेस प्रभावित

राजधानी में लॉकडाउन देश से 5 दिन पहले 19 मार्च से शुरू हुआ और अप्रैल तक बाजार पूरी तरह बंद रहे। केवल अतिआवश्यक चीजों की ही दुकानें खुली। मई में अनलॉक की शुरुआत हुई, लेकिन बाजार पूरी तरह से नहीं खुले। पहले लेफ्ट-राइट, फिर हफ्ते में दो दिन और आखिर में शाम 5, 7 और 9 बजे तक ही दुकानें खुलवाई गईं। इस तरह, 19 मार्च से 6 अगस्त तक पूर्ण-आंशिक लॉकडाउन के 139 दिनों में दुकानें केवल 79 दिन ही खुलीं।

इसमें भी दो माह तक केवल किराना, राशन, दूध, ब्रेड, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसियां, दवा, मछली, मटन, अंडा की ही बिक्री हुई। लॉकडाउन के इन 5 महीनों में सबसे ज्यादा नुकसान सराफा, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, जूता-चप्पल, श्रृंगार, होटल, रेस्तरां, शॉपिंग मॉल पर पड़ा है। व्यापारिक संगठन कैट ने व्यापार विशेषज्ञों की ओर से विस्तृत रिपोर्ट तैयार करवाई है, जिसमें कहा गया है कि बंद से प्रदेश में रोजाना लगभग 800 करोड़ और राजधानी में 300 करोड़ से ज्यादा का व्यापार प्रभावित हुआ है। इस तरह, लॉकडाउन के दौरान रायपुर में ही 20 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के कारोबार पर असर हुआ है।

बिजनेस पर बुरे असर की सबसे बड़ी वजह यह रही कि लाॅकडाउन के इन पांच महीनों में ही कारोबारियों के कई सीजन निकल गए। नवरात्रि, शादी सीजन, रामनवमी, गुड़ फ्राइडे, ईद-बकरीद, राखी और सावन सोमवार जैसे त्योहारों पर दुकानदार एक सामान नहीं बेच पाए, जबकि कारोबारियों का दावा है कि इन्हीं दिवसों में सालभर का 25-30 फीसदी कारोबार हो जाता रहा है। यही नहीं, केंद्र सरकार की अनलॉक गाइडलाइन के अनुसार अभी भी स्कूल-कॉलेज नहीं खुलेंगे। इनसे कई तरह का कारोबार जुड़ा है। इसी तरह, ऑडिटोरियम, स्वीमिंग पूल, मल्टीप्लेक्स, टॉकीज और इवेंट का कारोबार भी नहीं चलेगा। राजनैतिक, धार्मिक और बड़े समारोहों के आयोजन पर पाबंदी जारी है। इनसे भी कई तरह के कारोबार पर असर आएगा। शादियां अब भी सीमित हैं, इसलिए भी कुछ बिजनेस पर लाॅकडाउन का असर जारी रहनेवाला है।

अब तक के लाॅकडाउन का पूरा हिसाब

  • 9 मार्च से रायपुर में लॉकडाउन शुरू। 30 अप्रैल तक जारी रहा। केवल अतिआवश्यक चीजों की दुकानें खुली।
  • मई में दुकानों को खोलने की छूट दी गई, लेकिन लेफ्ट-राइट और हफ्ते में दो दिन ही खोलने की अनुमति दी गई।
  • जून में सभी दुकानें खोलने की परमिशन दी, लेकिन शाम 5 बजे तक। फिर 7 और उसके बाद रात 9 तक खुली।
  • 22 जुलाई से फिर एक हफ्ते और बाद में 6 अगस्त तक का लॉकडाउन, इस दौरान किराना दुकानें नहीं खुली।

बिल्डर-उद्योगपतियों की राय, हल्की राहत है पर लाभ नहीं
राज्य सरकार की ओर से फैक्ट्री, रियल एस्टेट और ऐसे निर्माण काम जिसमें मजदूरों की जरूरत है उस पर पूरी तरह से बैन नहीं लगाया गया है। यानी कोरोना नियमों के तहत फैक्ट्रियों का संचालन किया जा सकता है। इसके लिए संचालकों को ई-पास भी जारी किए गए हैं। रियल एस्टेट का कारोबार भी अभी चल रहा है। साइट पर निर्माण काम जारी है और जमीन-मकानों की रजिस्ट्रियों के लिए रजिस्ट्री दफ्तर भी खुले हैं। हर दिन एक करोड़ से ज्यादा की रजिस्ट्री भी हो रही है। हालांकि उद्योगपतियों और बिल्डरों का कहना है कि इस तरह की हल्की राहत से बड़ा फायदा नहीं हो रहा है।

पिछड़ गए व्यापारी : चैंबर
लॉकडाउन के दौरान लगातार एक दर्जन से ज्यादा त्योहारों में बाजार बंद रहे। शादियों का सीजन हो या कोई बड़ा त्योहार बाजार बंद ही रहे। सभी कारोबारी आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। बार-बार लॉकडाउन से कारोबार कई बरस पीछे हो रहा है। रमेश गांधी, चेयरमैन छत्तीसगढ़ चैंबर



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फाइल फोटो।


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