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हर बच्चा मोबाइल नहीं चलाता इसलिए अब स्कूल के बजाय मोहल्ले में लग रही क्लास

जिला मुख्यालय बालोद के नयापारा में कला मंच और घर के सामने द्वार में बच्चों की पाठशाला लग रही है। शुक्रवार सुबह 10.20 बजे यहां बच्चे मास्क लगाए यूनिफार्म पहनकर बैठे पढ़ाई करते दिखे। ऐसा ये रोजाना कर रहे हैं। कोरोना काल में नवाचार करने पढ़ई तुंहर दुआर (मोहल्ला) के तहत शासन, प्रशासन की ओर से ऐसी व्यवस्था बनाई है कि स्कूल के बजाय मोहल्ला में कहीं भी क्लास लग रही है।

शिक्षा विभाग के अफसरों का कहना है कि कई शिक्षक इसका विरोध कर रहे है लेकिन स्कूल बंद रहेगा, यह शासन स्तर का निर्णय है। बच्चों की पढ़ाई होती रहे, इसके लिए नई व्यवस्था बनाई गई है। सभी बच्चे के पास एंड्राइड मोबाइल नहीं है और न ही सभी को चलाना आता है इसलिए ऑनलाइन के बजाय मोहल्ले में पढ़ाई करा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि गलियों में जब लाउडस्पीकर के साथ पढ़ाएंगे तो कहां से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होगा। बच्चे ठीक से पढ़ रहे है इसकी मॉनिटरिंग भी ठीक से नहीं हो पाएगी। कम बच्चों के साथ बारी-बारी से स्कूल खोला जाए।

इधर शिक्षकों का तर्क- सही मायने में पढ़ाई करानी है तो गली, मोहल्ले के बजाय स्कूल में क्लास लगाई जाए
सहायक शिक्षक फेडरेशन के जिला अध्यक्ष देवेन्द्र हरमुख ने कहा कि अगर सही मायने में पढ़ाई करानी है तो गली, मोहल्ले की बजाय स्कूल में क्लास लगाई जाए। शासन और प्रशासन को अब इस ओर ध्यान देना चाहिए। शिक्षकों और बच्चों को प्रयोग शाला न बनाए। गांव में जब इतनी भीड़ करनी है तो क्यों न स्कूलों को खोल दिया जाए। प्रतिदिन केवल एक कक्षा लगे। एक कक्षा में 20 से 25 बच्चे ही हो सकते हैं या ज्यादा भी हुआ तो शिक्षक अपने हिसाब से बच्चों को अलग-अलग कक्षा में बैठा कर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मास्क और सैनिटाइजर का प्रयोग करते हुए पढ़ाएं। एक कक्षा में मुश्किल से 7 या 8 बच्चों को ही बिठाए, 3 शिक्षक है तो भी 20 से 25 बच्चे प्रतिदिन स्कूल में नियमों का पालन करते हुए अच्छे से पढ़ सकते हैं। गलियों में पढ़ाना कहां तक सही है।

कहीं मोहल्ले में क्लास लगाकर शिक्षक पढ़ाई करा रहे हैं तो कहीं लाउडस्पीकर के माध्यम से पढ़ाई हो रही
जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग की ओर से सभी ब्लॉक से 100 से ज्यादा स्कूलों के बच्चों का चयन नवाचार से पढ़ाई करने के लिए किया गया है। कहीं मोहल्ले में क्लास लगाकर शिक्षक पढ़ाई करा रहे है तो कहीं लाउडस्पीकर, मोबाइल पोर्टल के माध्यम से पढ़ाई हो रही है। बालोद बीईओ बसंत बाघ, डौंडी बीईओ आरआर ठाकुर ने बताया कि बच्चे पढ़ाई करते रहे। इसलिए नई व्यवस्था के तहत यह सब हो रहा है। शैक्षणिक सत्र की शुरुआत 15 जून से होने के बाद स्कूल खुलना था लेकिन कोरोना के चलते ऐसा नहीं हो पाया। नए सत्र की पढ़ाई के लिए शिक्षकों ने घर-घर जाकर किताबें बांटी हैं। कई बच्चों के पास मोबाइल नहीं है। प्राइमरी स्कूल के अधिकांश बच्चों को मोबाइल चलाने नहीं आता। इसलिए दूसरे कई विकल्प के तहत पढ़ाई करवाने का निर्णय लिया गया है।



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Not every child runs a mobile, so now class is taking place in the locality instead of school


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