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पहले विधायकों की अफसर नहीं सुनते थे, अब मंत्री सामने बैठकर पूछ रहे- बताओ क्या काम करना है... ट्रांसफर-सड़क का काम तुरंत

राज्य सरकार सियासी संकट में फंसी हुई है, लेकिन विधायकों को कुछ राहत है। विधायकों को पहले अपने क्षेत्र की समस्या और लोगों की दिक्कत बताने के लिए अफसरों के दफ्तरों में चक्कर लगाने पड़ते थे। मंत्री नहीं सुनते थे तो मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था। अब बाड़ाबंदी में सरकार के मंत्री खुद सामने बैठकर विधायकों को उनके डिजायर पूछ कर हाथों-हाथ समाधान करवा रहे हैं। चाहे इलाके में नया एसडीएम या तहसीलदार लगवाना हो या जलदाय विभाग-ऊर्जा विभाग के इंजीनियर, डॉक्टराें का तबादला करवाना हो।

सरकार ने सत्तापक्ष के विधायकों की मांग पर रोड बनवाने व ट्यूबवेल खोदने का काम भी तुरंत करने के आदेश दे रखे हैं। वहीं सरकार के अधिकारियों को सख्त निर्देश है कि विधायकों की सिफारिश वाले काम तुरंत किए जाएं। विधायक के काम पेंडिंग नहीं रहने चाहिए। काम की स्पीड दो गुना से भी ज्यादा हो गई है।

बिजली विभाग में डिजायर पर अब तक 200 से ज्यादा तबादलें, जलदाय में बड़ी लिस्ट तैयार
तबादलों में पाबंदी के बावजूद प्रदेश की बिजली कंपनियों में विधायकों की डिजायर पर अब तक 200 से ज्यादा तबादले हो चुके हैं। बिजली कंपनियों में विधायकों की सुविधा के अनुसार 2-4 इंजीनियरों व टेक्निकल हेल्पर सहित अन्य पदों पर तबादले हो रहे हैं। वहीं एक बड़ी सूची तैयार की जा रही है। बताया जा रहा है कि जलदाय विभाग में भी 150 से ज्यादा इंजीनियरों के तबादलों की लिस्ट तैयार हो रही है। इसमें ज्यादातर विधायकों की डिजायर है। कई विधायकों ने अपने इलाके के इंजीनियरों को यथावत रखने की सिफारिश की है। इसलिए उन्हें नहीं हटाया जा रहा है।

विधायकों की सड़क और ट्यूबवेल की मांगों को प्राथमिकता

सड़क बनाने वाले पीडब्ल्यूडी की कमान खुद मुख्यमंत्री ने संभाली है। कई विधानसभा क्षेत्रों में सड़क नहीं होने से विधायकों को जनता की नाराजगी झेलनी पड़ रही थी। लेकिन अब इन सड़कों को प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति मिल रही है। वहीं विधायकों की सिफारिश वाले 350 से ज्यादा थ्री फेज व सिंगल फेज ट्यूबवेल तुरंत करने के लिए एडिशनल चीफ इंजीनियरों व अधीक्षण अभियंताओं की सूची दी गई है ताकि जनता की पेयजल समस्या दूर हो सके।

एसडीएम व तहसीलदार भी बदले
पहले ब्यूरोक्रेसी के हावी होने के कारण एसडीएम व तहसीलदार अपने विधायक की नहीं सुन रहे थे। विधायकों ने उन्हें बदलने के लिए भी अधिकारियों पर दबाव लगाया, लेकिन कोई बदलाव नहीं हुआ। अब सियासी संकट के बाद में कुछ विधायकों की मर्जी वाले एसडीएम व तहसीलदार लगाए हैं। कार्मिक विभाग की ओर से कई लिस्ट विधायकों की सिफारिश के अनुसार निकाली जा चुकी हैं।



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प्रतीकात्मक फोटो।


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