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सार्वजनिक भूमि संरक्षण समिति में 1 साल में 7 केस दर्ज, वे भी अनसुलझे

जिले में शहर सहित गांवाें में सैकड़ाें बीघा सार्वजनिक उपयाेग की जमीनाें पर भू माफियाओं और अन्य लाेगाें ने अपना अवैध कब्जा कर रखा है, लेकिन इसके बाद भी स्थानीय और जिला प्रशासन की ओर से इन अतिक्रमणाें काे हटाने की कार्रवाई नहीं हाेना कई सवाल खड़े करता है, वाे भी तब जब अतिक्रमण हटाने संबंधित सभी शिकायताें काे निस्तारित करने के हाईकाेर्ट ने आदेश तक जारी कर दिए हैं।
हाईकाेर्ट की डबल बैंच ने जगदीश नारायण बना राजस्थान सरकार के मामले में 30 जनवरी 2019 काे आदेश जारी किया था। इसी आदेश के मुताबिक शासन उप सचिव राजस्थान सरकार राजस्व ग्रुप 6 द्वारा सभी जिला कलेक्टर काे 24 अप्रैल 2019 काे आदेश जारी कर जिला स्तर पर पीएलपीसी- सार्वजनिक भूमि संरक्षण समिति का गठन कर ऐसे मामलाें का निस्तारण करने के आदेश दिए हैं।

इस आदेश के तहत अतिक्रमण की शिकायताें का 3 महीनाें के अंदर निस्तारण करना भी अनिवार्य है। हाईकाेर्ट ने यह आदेश इसलिए जारी किए क्याेंकि काेर्ट में अतिक्रमण के जुड़े मामलाें के कारण दूसरे प्रकरण प्रभावित हाे रहे हैं। जिले में काेर्ट के आदेश की पालना नहीं हाेने पर प्रार्थी गाेपीराम अग्रवाल ने मुख्य सचिव शासन सचिवालय काे शिकायत भेजकर जिले में पालना कराने की मांग की है।

7 शिकायतें दर्ज वाे भी कागजाें में कैद
राजस्व विभाग के आदेशानुसार 5 नवंबर 2019 काे जिला प्रशासन द्वारा 4 सदस्यीय पीएलपीसी का गठन किया। जिसमें प्रभारी अधिकारी राजस्व शाखा कलेक्ट्रेट, उपखंड अधिकारी संबंधित तहसील, तहसीलदार, शाखा प्रभारी राजस्व शाखा काे सदस्य बनाया गया। जानकारी के अनुसार जिला स्तरीय पीएलपीसी में 7 शिकायतें दर्ज हुई हैं, लेकिन समिति द्वारा उनका निस्तारण नहीं करने से सार्वजनिक जमीनाें पर अवैध कब्जे बढ़ गए हैं। आदेश के मुताबिक न सिर्फ शिकायतें दर्ज करना बल्कि प्रसार प्रचार के माध्यम से प्रशासन काे सामने हाेकर ऐसी शिकायताें काे आमंत्रित करना हैं, लेकिन इसकी पालना नहीं की जा रही है।

पीएलपीसी में दर्ज शिकायतें
1. नगर परिषद बांसवाड़ा में भू रुपांतरण अधिकारी द्वारा सार्वजनिक उपयाेग की भूमि काे भू स्वामियाें से मिलीभगत कर कब्जे में देने की शिकायत दर्ज हैं। शिकायत के मुताबिक मास्टर प्लान 2013 में अनुमाेदित किया गया, जिसमें 3710 हैक्टेयर जमीन अविकसित थी, उसमें 40 प्रतिशत हिस्सा सार्वजनिक उपयाेग के लिए आरक्षित कर शेष 60 प्रतिशत जमीन के पट्टे देने थे, लेकिन परिषद द्वारा पूरी जमीन के पट्टे जारी कर दिए गए हैं।
2. कूपड़ा तालाब की 130 बीघा जमीन काे सार्वजनिक उपयाेग के लिए आरक्षित किया था, लेकिन वर्तमान में 116 बीघा जमीन सार्वजनिक उपयाेग की है और 14 बीघा जमीन काे आबादी के लिए आरक्षित कर दिया है। राज्य सरकार के सर्कुलर दिनांक 20 जून 2012 के मुताबिक तालाब की जमीन काे आबादी में आरक्षित नहीं किया जा सकता।
3. शहर के पास ही आनंदसागर की जंगल किस्म भूमि काे आबादी में परिवर्तित करने की शिकायत। आराेप है कि परिषद द्वारा 356 बीघा जमीन के कुछ हिस्साें काे आबादी में बदल दिया है।
4. माही सराेवर पार्क की जमीन काे वाणिज्यिक उपयाेग के लेने का मामला भी पीएलपीसी में दर्ज है।
5. बांसवाड़ा नगरीय क्षेत्र के 39 राजस्व गांवाें के राजस्व रिकाॅर्ड में दर्ज प्राकृतिक नालाें पर अतिक्रमण हटाने की भी एक शिकायत दर्ज है।
6. एक शिकायत गढ़ी से संबंधित हाईकाेर्ट द्वारा ही जिला प्रशासन काे दी गई थी। जिसमें गढ़ी के नवापादर गांव में तालाब की जमीन पर अतिक्रमण से संबंधित शिकायत है।



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