हजारों लोगों को नहीं मिला वन अधिकार का पट्टा इसलिए चला रहे जोतो जीतो अभियान
वन अधिकार अधिनियम के तहत वन भूमि पर काबिज हजारों लोगों ने पट्टे के लिए सरकार के समक्ष दावा किया था, जिस पर लोगों को पट्टे मिले भी, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के आवेदन निरस्त कर दिए गए। कई लोगों को काबिज जमीन से काफी कम का पट्टा दिया गया।
इसके विरोध में जन संगठन एकता परिषद जोतो-जीतो अभियान चला रहा है। ग्रामीणों से काबिज पूरी वनभूमि पर खेती कराई जा रही है, साथ ही जमीन का पट्टा देने की मांग की जा रही है। संगठन द्वारा इसके अलावा श्रम दान से जल श्रोत तैयार कर ग्रामीणों को खेती-बाड़ी के लिए जागरूक किया जा रहा है। लोगों की शिकायत है कि उनके दावे के बावजूद काबिज पूरी जमीन का पट्टा नहीं दिया गया, जबकि एक परिवार को अधिकतम 10 एकड़ जमीन का पट्टा दिया जाना है। लोगों को पात्र होने के बावजूद काबिज जमीन का पट्टा ही नहीं दिया गया। ऐसे लोगों की मदद एकता परिषद की सहयोगी संस्था प्रयोग द्वारा की जा रही है। इनका जोतो-जीतो अभियान रंग ला रहा है। मैनपाट विकासखंड के ग्राम पंचायत कोठ के आश्रित ग्राम बगढोढा में विशेष जनजाति के पहाड़ी कोरवा परिवारों को काबिज वनभूमि का पट्टा तो दिया गया, लेकिन वे जितनी जमीन पर काबिज हैं, उतने का पट्टा नहीं दिया गया। इसकी शिकायत की गई लेकिन इस बीच वनपाल ने बाकी बची भूमि पर पाैधाराेपणा कराने की बात कही, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया और गांव में एक बैठक बुलाई।
प्रयोग संस्था की इकाई के प्रमुख हरि यादव के नेतृत्व में सभी ग्रामीणों ने तय किया कि वे जोतो-जीतो अभियान चलाएंगे और कोरवाओं को उनके हक की जमीन और कब्जा दिलाएंगे। इसी के तहत सभी ग्रामीण संबंधित भू-भाग पर पहुंचे और उन 9 कोरवा आदिवासियों द्वारा काबिज पूरी जमीन पर हल चलाया, जिसमें उनका कब्जा था। मौके पर ही पूरी जमीन पर रामतिल के बीज बोए गए।
ग्रामीणों को जेल की हवा खिलाने की धमकी
ग्रामीणों के जोतो-जीतो अभियान के दौरान वहां वनपाल भी मौजूद था, जो जाते-जाते धमकी देता गया कि कल तुम सब लोग जेल की सलाखों के पीछे होंगे। ग्रामीण इसके लिए भी तैयार थे, लेकिन बाद में न तो वनपाल आया और न ही कोई बड़ा अधिकारी। हरि यादव ने बताया कि अगस्त में ग्राम सभा होनी थी, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते सभा नहीं हुई। उनकी योजना ग्रामसभा में कोरवाओं की बाकी बची जमीन का भी पट्टा दिलाने का प्रस्ताव पारित करने की थी। अब सभी ग्रामीण ज्ञापन तैयार कर जिला प्रशासन और वन मंडलाधिकारी को सौंपेंगे और कोरवा आदिवासियों को उनकी बाकी भूमि का भी पट्टा देने की मांग करेंगे। कई गांवों में जोतो-जीतो अभियान चलाया जा रहा है।
खेतों को नहर से नाले तक जोड़ा
सरगुजा के ग्राम पंचायत कोठ में ही ग्रामीणों ने श्रमदान से छोटी नहर तैयार की है। इस नहर से यहां के बारहमासी नाले को जोड़ दिया गया है। इसका लाभ पंचायत के आश्रित मोहल्ले भाठाकोना, सरना टिकरा, आरासरी और कापापारा के लगभग 500 किसान उठा रहे हैं और 200 हेक्टयर भूमि पर खेती-बाड़ी कर रहे हैं। प्रयोग सामाजिक संस्था द्वारा यह अभियान यूरोपियन यूनियन और वेल्ट हंगर हिल्फे, नई दिल्ली के सहयोग से चलाया गया।
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