दिव्यांग स्कूल में शिक्षकों की नियुक्ति हो
संभाग मुख्यालय के आड़ावाल में स्थित दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय केवल अनाथालय बनकर रह गया है। यहां सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है और न ही शिक्षकों की भर्ती हो रही है। यह बातें बस्तर संभागीय दिव्यांग विकास संघ के सदस्यों ने नयापारा पत्रकार भवन में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान कही। संघ के सदस्यों ने बताया कि लंबे समय से दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय में एक ही शिक्षक के भरोसे दसवीं तक की पढ़ाई हो रही है।
संघ के सचिव जुगधर राम कश्यप ने बताया कि संभागीय दिव्यांग विकास संघ द्वारा मुख्यमंत्री को कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन भेजा गया है, जिसमें कई मांगे रखी गई हैं। मांगों में दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय में अतिथि शिक्षकों की भर्ती, निर्माण हो चुके नेत्रहीन कन्या छात्रावास को चालू करने, दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय को 50 सीट से बढ़ाकर 100 सीट करने, विद्यालय को शिक्षा विभाग में संविलियन किए जाने की मांग रखी गई है।
दिव्यांग पेंशन योजना की राशि बढ़ाई जाए
उन्होंने बताया कि यहां के शिक्षकों का स्थानांतरण रायपुर कर दिया जाता है। बेरोजगार दिव्यांगों के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाने की आवश्यकता है। दिव्यांग पेंशन योजना के तहत दी जाने वाली राशि को बढ़ाकर 1500 सौ रुपए करने की जरूरत है। संघ के सदस्यों ने बताया कि बस्तर संभाग में कई दिव्यांग युवक बेरोजगार हैं, जिन्हें शासन की ओर से किसी प्रकार का लाभ नहीं मिल रहा है इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार से उन्होंने अनुरोध किया कि दिव्यांगों को नौकरी दी जाए, ताकि वह अपने परिजनों का भविष्य सुधार सकें। प्रेसवार्ता में दिव्यांग संघ के मीडिया प्रभारी मुन्नालाल कश्यप, प्रवक्ता श्रींकांत पांडे और कोषाध्यक्ष प्रेमराम बघेल मौजूद थे।
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