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आवारा कुत्तों को पकड़ने निगम की कोई योजना नहीं

शहर में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनसे रैबिज फैलने का खतरा बढ़ गया है। दरअसल कुत्तों के काटने से रैबिज बीमारी होती है। यही कारण है कि कुत्तों के काटने से इसका एंटीडोज दिया जाता है। बस्तर में एंटीरैबिज इंजेक्शन खुले बाजार में उपलब्ध तो है, लेकिन इसके लिए लोगों को मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है। वहीं सरकारी अस्पतालों में कई बार इसकी उपलब्धता नहीं हो पाती है।
इन दिनों कोरोना महामारी के चलते अस्पतालों में हालात ये हैं कि एंटीरैबिज सहित दूसरी जरूरी दवाओं पर ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है। इधर शहर में आवारा कुत्तों की लगातार बढ़ रही संख्या को पकड़ने के लिए नगर निगम भी कोई पहल नहीं कर रही है। शहर में संजय बाजार के साथ ही धरमपुरा का इलाका, फ्रेजरपुर,बोधघाट सहित अन्यइलाकों में आवारा कुत्तों का झुंड लगा रहता है।
जानिए, क्या है रैबिज और ये कैसे फैलता है: पशु चिकित्सक डॉ. अरूण देवांगन बताते हैं कि संक्रमित जानवरों की लार में रैबिज नाम का वायरस पाया जाता है, जो काटने के दौरान लार से फैलता है। जानवर द्वारा काटे जाने पर लार में मौजूद वायरस जख्म के जरिए शरीर में दाखिल होकर सीधे नर्वस सिस्टम पर हमला करते हैं। एक बार किसी व्यक्ति में रैबिज के लक्षण दिखना शुरू हो जाते हैं तो ये बीमारी ज्यादातर मौत का कारण बनती है। आमतौर पर रैबिज से संक्रमित कुत्ते को लोग पागल कुत्ता कहते हैं। ऐसा इसलिए होता है कि वायरस उसके नर्वस सिस्टम तक पहुंच चुका होता है।

ये हैं रैबिज के लक्षण
रैबिज बीमारी का पहला संकेत है कि इसमें बुखार आता है और व्यक्ति कमजोरी महसूस करता है। वहीं कुत्ते के काटे हुए घाव में दर्द, झुनझुनी या जलन महसूस होती है। गंभीर लक्षणों में घबराहट, पानी निगलने में परेशानी, गफलत होना, उल्टी होना, सिरदर्द, जी मिचलाना, नींद न आना, ज्यादा लार आना, पानी के पास जाने से भय जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।

टेंडर जारी लेकिन अब तक कोई संस्था नहीं आई सामने
नगर निगम के स्वच्छता विभाग के अजय ने बताया कि आवारा कुत्तों के खिलाफ अभियान चलाने डॉग कैचर गाड़ी और ड्राइवर तैयार है। टेंडर भी जारी किया गया है, लेकिन अब तक किसी ने भी टेंडर नहीं लिया है। जैसे ही कोई समिति या संस्था टेंडर लेती है, तत्काल काम शुरू कर दिया जाएगा।



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No plans of corporation to catch stray dogs


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