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बाहर नौकरी करने वालों को वहीं रोका, दशकर्म में भीड़ नहीं होने देते, इसलिए गांव में कोरोना की एंट्री नहीं

शहर से 30 किलोमीटर दूर पुसौर का गांव ओडेकेरा के आसपास कोरोना फैला हुआ है लेकिन यहां कोरोना की एंट्री अभी तक नहीं हो पाई है। वजह लोगों की सजगता है, यहां लोग सावधानी नहीं भूले हैं। गांव के बीच बस्ती में मंदिर चौराहे पर दोपहर में भी पहले लोगों का जमावड़ा लगा होता था, वहां अब कोई भी नजर नहीं आता। कोरोना को दूर रखने के लिए गांव के लोग कैसे उपाय कर रहे हैं...यह देखने भास्कर की टीम गांव पहुंची। गांव में लोग सिर्फ जरूरी काम हो तो बाहर निकलते हैं। खेती किसानी के काम के लिए गांव के सीमित मजदूरों की मदद ली जा रही है। पड़ोसी गांव के लोगों को गांव में काम के लिए नहीं बुलाया जाता है।

ग्राम पंचायत में कुल 18 वार्ड हैं, सभी वार्ड पंचों को बाहर से आने जाने वालों पर निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। पिछले पांच महीने में गांव में 10 से ज्यादा लोगों का निधन हुआ है। अंतिम संस्कार से लेकर दशकर्म के दिन तक कार्यक्रम भी परिजन ने सीमित लोगों की उपस्थिति में पूरे किए। उप सरपंच राजेंद्र नंदे बताते हैं, पहले गांव में इस तरह के कार्यक्रमों में चार पहिया वाहनों की कतारें लग जाती थी, लेकिन कोरोना के चलते गांव में किसी भी चार पहिया वाहनों को प्रवेश नहीं दिया गया। इससे लोग नाराज हैं लेकिन कोरोना से बचाव ज्यादा जरूरी है।

तबीयत ज्यादा खराब तो ही देते हैं अस्पताल जाने की छूट

गांव के लोग अपने नाते रिश्तेदारों से मिलने अस्पताल जाने पर भी मनाही है। थोड़े बहुत स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए डॉक्टरों से फोन पर सलाह ली जाती है। परामर्श पर ग्रामीण दवा खरीद लेते हैं। खानपान भी डॉक्टरों के सलाह अनुरूप रखा जा रहा है। यदि किसी ग्रामीण की स्थिति बहुत ज्यादा नाजुक हो तो ही अस्पताल जाने की छूट दी जाती है।

ओडिशा को जोड़ने वाला रास्ता ब्लॉक

गांव से महज 20 किमी की दूरी पर ओडिशा बार्डर है। ग्रामीणों के अधिकांश नाते-रिश्तेदार भी ओडिशा में हैं, इसलिए आए दिन ओडिशा के लोगों का आना जाना गांव मं लगा रहता था। इन पर लगाम लगाने के लिए सरंपच से ओडिशा की तरफ से सीधे गांव तक पहुंचने वाली सड़क को ब्लॉक कर दिया। बहुत ज्यादा जरूरी हो या किसी के घर में गमी हो तो सिर्फ एक ही सदस्य को आने दिया जाता है।

घर वालों ने नौकरी पर जाने ही नहीं दिया

गांव में मिले ओम प्रकाश साव ने बताया कि वह झारसुगुड़ा में वेदांता के फायर स्टेशन में पदस्थ है, होली के बाद से वह घर आया था, थोड़े समय परिवार के साथ कोरबा में रहा। उसके बाद अपने गांव ओडेकेरा लौट आया। यहां मई के बार से कंपनी वालों का लगातार कॉल आ रहा है, लेकिन परिजन उन्हें जाने नहीं दे रहे हैं, गांव में दूसरे कामकाजी युवक भी परिजन के साथ रह रहे हैं।

हर संभव उपाय और एहतियात बरतते हैं

गांव में लोगों ने शुरुआत में सख्ती का विरोध किया लेकिन जब कोरोना के केस बढ़ने लगे तो उन्होंने अपने आप नियमों का पालन शुरू कर दिया। गांव में नौकरी पेशा लोग 10 फीसदी ही हैं, जो बाहर उन्हें आने नहीं दिया और जो आ गए हैं, उन्हें अब जाने नहीं दे रहे हैं। सभी कोशिश करते हैं ताकि गांव को कोरोना से मुक्त रख सकें।''
हरि साहू, सरपंच ओडेकेरा ग्राम पंचायत



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जरूरी हो तो ही निकलते हैं घर से बाहर इसलिए ऐसा सन्नाटा।


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