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3 प्रदेशों की फर्म पर 1 ही व्यक्ति के हस्ताक्षर फिर भी अफसरों ने 55 लाख का दे दिया काम

सकालो स्थित कुक्कुट पालन प्रक्षेत्र में 3 साल पहले केंद्रीय मद से आए 55 लाख रुपयों को अधिकारियों ने ठिकाने लगा दिया। यह रुपए सूअर और मुर्गी फाॅर्म के लिए सामान खरीदने को मिले थे। मामले का खुलासा होने के बाद जांच टीम ने टेंडर प्रक्रिया में शामिल 4 अफसरों को दोषी पाते हुए कार्रवाई की अनुशंसा की थी, लेकिन शासन से यह रिपोर्ट भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
2016-17 में केंद्रीय मद से शहर के सकालो स्थित मुर्गी फाॅर्म और सूअर फाॅर्म के लिए सामान खरीदने 55 लाख मिले थे। इसके लिए पशु चिकित्सा विभाग के अफसरों ने सांठगांठ से इन रुपयों को ठिकाने लगा दिया और घटिया सामान की खरीदी कर खानापूर्ति की। मामले की शिकायत होने पर संचालनालय पशु चिकित्सा सेवाएं की ओर से इसकी जांच के लिए क्लास वन रैंक के 3 अफसरों की जांच कमेटी बनाई गई।

इसमें जांजगीर चांपा के तत्कालीन उप संचालक पशु चिकित्सा विभाग डॉ. नरेंद्र सिंह को अध्यक्ष व कोरबा के उप संचालक डॉ. एनपी सिंह व बिलासपुर के डॉ. वीरेंद्र पिल्ले को सदस्य बनाया। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में इन रुपयों को खर्च करने में अधिकारियों को दोषी पाया है और कार्रवाई की अनुशंसा की है।

2016-17 में केंद्रीय मद से मिले थे रुपए, 8 सितंबर 2017 को पूरी हुई थी जांच

1 अफसर ने ही तीनों फर्म का किया सत्यापन

जांच टीम ने पाया कि सामान की खरीदी के लिए जिन तीन फर्मों को टेंडर दिया गया, उसके कागजों को एक ही अधिकारी ने प्रमाणित किया है। सीईओ की जांच रिपोर्ट में बताया कि सभी कागजात को बतौली के तत्कालीन खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. गणेश बेक ने प्रमाणित किया है।

दायित्वों का निर्वहन नहीं, सामग्री की गुणवत्ता भी नहीं परखी

इन अफसरों पर लापरवाही का आरोप
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि टेंडर प्रक्रिया में बहु-सदस्यीय समिति ने निर्णय लिया है। इसमें तत्कालीन प्रबंधक सूकर पालन प्रक्षेत्र डॉ. अजय अग्रवाल ने समिति से अलग रखने का अनुरोध किया था।

वहीं तत्कालीन उपसंचालक डॉ. तनवीर अहमद तकनीकी जांच में शामिल नहीं हुए थे। इस कारण टेंडर की निविदा कागजातों की जांच के लिए तत्कालीन प्रबंधक कुक्कुट पालन प्रक्षेत्र डॉ. सीके मिश्रा, डॉ. अरुण कुमार सिंह, डॉ. एएस सिंह और डॉ. टोप्पो शामिल थे। वहीं घटिया सामग्री खरीदने के संबंध में समिति ने पाया कि डॉ. सीके मिश्रा ने अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया और सामग्री की गुणवत्ता नहीं देखी।

3 प्रदेशों की फर्म और 1 के हस्ताक्षर

समिति की जांच रिपोर्ट में बताया कि सामग्री खरीदी के लिए जिन फर्म को अधिकृत किया गया। वह तीनों फर्म अलग-अलग प्रदेश की थीं और सभी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता एक ही व्यक्ति था, जिससे यह पूरी प्रक्रिया ही संदिग्ध है।

रिपोर्ट के अनुसार हैदराबाद की मेसर्स एपी पोल्ट्री इक्युपमेंट ने पीयूष ट्रेडिंग ब्रह्म रोड अंबिकापुर को अपना अधिकृत फर्म प्रमाण-पत्र जारी किया। इसी तरह महाराष्ट्र की यूनिक डोजिंग सिस्टम ने एपी पोल्ट्री इक्युपमेंट को और नई दिल्ली की हाईटेक इनवायरो इंजीनियरिंग एंड कंसलटेंट ने साइंस एंड सर्जिकल हाउस अंबाला को अधिकृत फर्म का प्रमाण-पत्र जारी किया है। इन तीनों ही फर्म के कागजों में एक ही व्यक्ति ने हस्ताक्षर किए हैं।

इससे पहले भी कटघरे में रहा है विभाग
जांच समिति ने पाया कि अप्रैल 2016 में एक निजी फर्म से बिना टेंडर व कुटेशन के 4 लाख का आहार खरीदा गया। इसमें उप संचालक डॉ. तनवीर अहमद ने नियमों का पालन नहीं किया। इस खरीदी से संबंधित कागजात भी उपलब्ध नहीं कराए। साथ ही डॉ. सीके मिश्रा पर पहले भी आरोप लग चुके हैं और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अगस्त 2017 में तत्कालीन जिपं सीईओ ने अपनी जांच में इस टेंडर प्रक्रिया को गलत बताते हुए सरकारी धन का दुरुपयोग बताया था।

दोषियों पर नियमानुसार होगी कार्रवाई: माथेश्वरन
इस संबंध में पशु चिकित्सा सेवाएं संचालक माथेश्वरन ने बताया कि 3 साल से मामले में कार्रवाई नहीं हुई। इसके बारे में पता करते हैं। फाइल को देखकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच रिपोर्ट में कोई दोषी पाया गया है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



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सकालो के मुर्गी पालन केंद्र


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