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जिले में धान की खरीदी के लिए 59 लाख बारदाने की जरूरत, अब तक सिर्फ चार लाख का ही स्टाॅक

कोरोना की वजह से जूट मिलों से बारदाना नहीं आ रहा है। ऑर्डर के बाद भी बारदाने की सप्लाई नहीं है। धान खरीदी के लिए इस बार मार्कफेड को 59 लाख बारदाने की जरूरत है लेकिन जूट मिलों से केवल 4 लाख 32 हजार बारदाने की भेजी गई है। इस तरह इस बार 54 लाख 76 हजार बारदाने का शार्टेज हो गया है। हर साल अक्टूबर महीने में बारदाने की सप्लाई होती रही है लेकिन इस बारदाने की सप्लाई ही अटक गई है।

दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिले की धान खरीदी करने के लिए मार्कफेड द्वारा नए बारदाने का इंतजाम किए जाते हैं। इस बार भी तीनों जिलों की डिमांड के हिसाब से बारदाने मंगवाई है लेकिन जूट मिलों से ही सप्लाई नहीं हो पा रही है। बता दें कि कुछ दिनों बाद धान खरीदी केंद्रों में धान बेचने के लिए किसान पहुंच जाएंगे।

सुझाव : जिस बारदाने में किसान धान भरकर लाते हैं उसी में खरीदी की जाए

इस साल कितनी बारदाने की जरूरत

इस साल 58 लाख 8 हजार बारदाने की जरूरत है। मार्कफेड ने पिछले साल वर्ष 2019 में 59 लाख 4 हजार बारदाने मंगवाई गई थी। इस तरह पिछले साल की अपेक्षा इस बार मार्कफेड ने 6 हजार कम बारदाने का डिमांड भेजा है। खरीदी के आखिरी वक्त में बारदाने की शार्टेज हो गई थी और बाद में उसे समितियों ने स्थानीय स्तर पर खरीदा था। इसलिए ये बारदाने समितियों में डंप है।

एक दिसंबर से होगी धान खरीदी : प्रदेश सरकार ने एक दिसंबर से धान खरीदी करने की घोषणा की है। धान खरीदी 15 नवंबर से करने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ किसान संगठनों ने मोर्चा खोल रखा है। वहीं पिछले साल धान खरीदी देरी से शुरू करने का नतीजा यह सामने आया कि संग्रहण केंद्रों में अब तक करीब 3 हजार क्विंटल धान डंप पड़ा है।

12 हजार हेक्टेयर ज्यादा रकबा में धान की पैदावारी : दुर्ग जिले में इस साल 1 लाख 31 हजार 290 हेक्टेयर में धान की फसल ली गई है। पिछले साल से 12 हजार हेक्टेयर में धान की फसल ज्यादा है। इस बार मानसून मेहरबान रही है। खरीफ सीजन की शुरूआत अच्छी हुई है। किसानों को धान की पैदावारी भी पिछले साल से बेहतर होने की उम्मीद है।

बारदाने के शार्टेज से धान खरीदी हो सकती है प्रभावित

बारदाने जरूरत के हिसाब से नहीं मिले तो धान खरीदी प्रभावित होगी। प्रशासन ने पीडीएस के बारदाने का स्टॉक रखकर वैकल्पिक इंतजाम की तैयारी की है लेकिन यह नाकाफी होगा। इसलिए कि पीडीएस के बारदाने इस्तेमाल होने के बाद धान खरीदी के लिए उपयुक्त नहीं होते।

बारदाना संकट को इस तरह से भी दूर किया जा सकता है

धान खरीदी के लिए बारदाने का संकट इस तरह से भी दूर किया जा सकता है। किसानों के सुझाव हैं कि जिस बारदाने में किसान खरीदी केंद्रों में धान भरकर लाते हैं उसी में खरीदी की जाए। किसानों का नए बारदाने और पुराने बारदाने का एक रेट तय कर दें और इसके हिसाब से भुगतान कर सकते हैं।

दुर्ग जिले में इस साल 28 नए खरीदी केंद्र बनाए गए

दुर्ग जिले में इस साल धान खरीदी केंद्र बढ़ेंगे। 28 नए खरीदी केंद्र बनाए गए हैं। दुर्ग जिला केंद्रीय सहकारी बैंक द्वारा पिछले साल तक 80 खरीदी केंद्रों में धान खरीदी की गई थी। नए केंद्र बनने से अब इस जिले में कुल 108 केंद्रों में धान खरीदी होगी। इस हिसाब से किसानों को कम दूरी पर ही खरीदी केंद्र की बड़ी सुविधा मिलने जा रही है। इससे किसानों का परिवहन खर्च भी घटेगा और टोकन के लिए भीड़-भाड़ नहीं होगी। लिमिट से ज्यादा धान का स्टॉक समितियों में डंप रहने की समस्या भी हल होगी।

कोरोना की वजह से बारदाने की सप्लाई नहीं हो पा रही

बारदाने की सप्लाई कोरोना की वजह से जूट मिलों ने रोक रखा है। इस साल के लिए केवल 4 लाख 32 हजार बारदाने आई है। हमने राज्य को पत्र लिखकर डिमांड पूरा करने के लिए कहा है।

भौमिक बघेल, डीएमओ मार्कफेड



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केंद्रों में इस साल डिमांड के अनुसार नहीं पहुंच सका बारदाना।


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