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सोलह कलाओं से पूर्ण शरद का चंद्रमा कल बरसाएगा अमृत, मठ-मंदिरों में पूजा के बाद बांटी जाएगी खीर

शरद पूर्णिमा शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होकर अमृत की वर्षा करता है। इस मौके पर मठ-मंदिरों में विशेष पूजन-अनुष्ठान की तैयारी है। वहीं रात को खुले आसमान के नीचे खीर भी रखी जाएगी, ताकि आसमान से बरसने वाला ओस रूपी अमृत इसमें इकट्ठा हो जाए। अगले दिन इसे भक्तों को प्रसाद के रूप में बांटा जाएगा।
दरअसल, शरद पूर्णिमा की रात आसमान से अमृत बरसने की मान्यता है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन चांद 16 कलाओं से पूर्ण होता है। इस अमृत को ग्रहण करने के लिए मठ-मंदिरों के अलावा घरों में भी खीर बनाई जाती है। फिर इसे रातभर के लिए छत पर रख दिया जाता है। पूरी रात इस पर ओस रूपी अमृत बरसता है जिसे अगले दिन प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। शहर के कई मंदिरों में हर साल इसका वितरण होता है। वहीं समता कॉलोनी स्थित गायत्री शक्तिपीठ में इस दिन औषधि युक्त खीर बांटी जाती है। इसके सेवन से बीमारी ठीक होने का दावा भी किया जाता है। यही वजह है कि प्रसाद ग्रहण करने बड़ी संख्या में लोग सुबह से मंदिरों में पहुंचते हैं। हालांकि, कोरोना संक्रमण के चलते इस बार ज्यादातर जगहों पर खीर वितरण नहीं करने का फैसला लिया गया है।

मान्यता - इस दिन व्रत रखने से योग्य वर-वधु और पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है
ज्योतिषियों के मुताबिक इस दिन लक्ष्मी पृथ्वी भ्रमण करने आती हैं। इस दिन पूजा करने से योग्य वर-वधु के अलावा पुत्र रत्न की कामना भी पूरी होती है। इस दिन का महत्व से जुड़ी एक कथा है जिसके मुताबिक एक साहूकार के दो पुत्री थीं। बड़ी खुश थी, लेकिन छोटी परेशान। हर बार उसकी संतान पैदा होते वक्त मर जाती। विद्वानों ने पूछने पर बताया कि दोनों बचपन से पूर्णिमा का व्रत रख रहीं हैं। बड़ी पुत्री तो व्रत पूरा करती, लेकिन छोटी अधूरा छोड़ देती। इसी वजह से उसे परेशानी हो रही है। पंडितों की सलाह पर उसने पूर्णिमा पूरा व्रत किया और उसकी समस्या का समाधान हो गया।

तिथि मतभेद - कल ही मान्य रहेगी पूर्णिमा, परसों प्रतिपदा
जन्माष्टमी, नवमी, विजयादशमी के बाद अब शरद पूर्णिमा की तिथि पर भी मतभेद की स्थित दिख रही है। कुछ लोगों का कहना है कि अमावस्या 1 नवंबर को होगी लिहाजा पूर्णिमा 31 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस पर ज्योतिषाचार्य डॉ. दत्तात्रेय होस्केरे कहते हैं कि शुक्रवार की शाम 5.45 बजे तक चतुर्दशी तिथि। फिर पूर्णिमा लग जाएगी। 31 अक्टूबर को प्रतिपदा माना जाएगा। 30 तारीख को श्री वत्स और सर्वार्थ सिद्धि योग के संयोग में ही शरण पूर्णिमा मनाना श्रेष्ठ होगा।

अभी साफ-सफाई और दूरी ही अमृत: डॉ. दिनेश मिश्र
डॉ. दिनेश मिश्र का कहना है कि अभी पूरा विश्व कोरोना वायरस की चपेट में है। शरद पूर्णिमा पर अमृत बरसने की मान्यता है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में साफ-सफाई और सोशल-फिजिकल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखना ही अमृत पीने के बराबर है। लोगों को चाहिए कि वे अभी सामूहिक आयोजन में शामिल होने से बचें। प्रसाद के लिए कहीं भीड़ लगाने से बचना चाहिए। इसके अलावा शहर की हवा में बहुत ज्यादा प्रदूषण है। लोग खुद भी इस बात को मानते हैं कि लगातार साफ-सफाई के बावजूद उनकी छतों पर कार्बन जम रहा है। इस लिहाज से भी खुले आसमान के नीचे खाद्य पदार्थ रखने से परहेज करना चाहिए।



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