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छटियार गांव में जंगलों के बीच श्रमदान से बना है छत्तीसगढ़ का एक मात्र ऐसा मंदिर जहां सफेद वस्त्र धारण कर ही करते हैं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पूजा

छत्तीसगढ़ के गंगरेल डैम के डुबान क्षेत्र में बसा है ग्राम छनियारा (कोड़ेगांव)। इस गांव की विशेषता यह है, कि इस गांव में प्रदेश का एक मात्र ऐसा मंदिर है जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पूजा होती है। यहां उनकी मूर्ति भी स्थापित है, इस गांव तिरंगा लहरा कर राष्ट्रगान भी गाया जाता है। यहां धरती माता की आराधना भी की जाती है। देश भक्ति से ओतप्रोत एक आश्रम भी है। जहां धमतरी, कांकेर व बालोद जिले के सैकड़ों अनुयायी मन की शांति के लिए यहां आते हैं। इस मंदिर से जुड़े अनुयायियों को सादगी का जीवन अपनाना होता है, वे शराब, मांस भक्षण का सेवन नहीं कर सकते। मंदिर के सदस्य गांधी जी के जैसे ही बुनकर के द्वारा तैयार किए गए कपड़ों को ही पहनते हैं। मंदिर के सदस्य शिवराम साहू बताते हैं कि यह मंदिर कांकेर और धमतरी जिले के बॉर्डर में महानदी के तट पर जंगलों के बीच स्थित है। जहां तक जाने सदस्यों ने श्रमदान से रास्ता तैयार किया है। यहां चारामा, नगरी, बेल्हर, धमतरी, गुरुर, बालोद व कई गांव से गांधी जी के जन्मदिवस, 15 अगस्त और 26 जनवरी को लोग पूजा करने पहुंचते हैं।

किसान ने आजादी के पूर्व गांधी जी को मंच से सुना और उनके मुरीद हो गए
साहू समाज के अध्यक्ष अर्जुन हिरवानी बताते हैं कि वे इस मंदिर से पिछले 40 वर्षों से जुड़े हुए हैं। 1920 में जब महात्मा गांधी जी कंडेल आए थे उस समय छटियारा के एक किसान दुखुराम ठाकुर उनके भाषण से प्रभावित होकर वे गांधी जी के अनुयायी बन गए। एक छोटी सी कुटिया में गांधी जी की एक फोटो रखा उसकी पूजा करने लगे और लोगों में आजादी की अलख जगाते थे। उनके निधन के बाद इस कार्य को धन्नू बाबा ने आगे बढ़ाया। लोग यहां श्रद्धा से आते हैं।

यहां पर धरती माता की होती है आरती तिरंगा फहरा कर लोग गाते हैं राष्ट्रगान
मंदिर समिति के वरिष्ठ सदस्य सालिकराम शर्मा बताते हैं कि मैं यहां पिछले 30 वर्षों से अधिक समय से जुड़ा हुआ हूं। लेकिन मंदिर बहुत पुराना है। जब देश आजाद नहीं हुआ था। तब दुखुराम बाबा जी 30 किमी पैदल चलकर धमतरी आते थे। यहां रात भर रूककर जब सुबह अखबार आता था। तब उसे लेकर वह गांव-गांव गांधी जी की बातों को सुना कर लोगों को जागरूक करते थे। यहां पर धरती माता की आरती होती है और तिरंगा फहराकर राष्ट्रगान गाते हैं।



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Chhatiyar village is made of shramdaan among the forests, the only temple in Chhattisgarh where it is worshiped by Mahatma Gandhi, wearing white clothes.


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