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रोज सिर्फ 10 किसानों का कट रहा टोकन, खरीदी में तेजी लाने की मांग

भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष विक्रमदेव उसेंडी सोमवार को क्षेत्र के कई धान खरीदी केंद्रों का जायजा लिया। उन्होंने खरीदी के दौरान किसानों को हो रही परेशानी की भी जानकारी ली। उसेंडी ने प्रशासन द्वारा किसानों के मेड़ का रकबा काटे जाने पर नाराजगी जताई। वहीं धीमी गति से खरीदी होने पर आक्रोश जताते तेजी लाने की मांग की।
सबसे ज्यादा आक्रोश संगम धान खरीदी केंद्र में किसानों ने दिखाया। यहां सैकड़ों की संख्या में किसानों का रकबा काट दिया गया है, जिसके चलते किसान अपनी धान ही नहीं बेच पा रहे हैं। उसेंडी ने इस संबंध में प्रशासन के अधिकारियों से बात करने का आश्वासन दिया। उसेंडी ने एसेबेड़ा, संगम तथा धान खरीदी केंद्र पीवी 15 का जायजा लिया। सभी धान खरीदी केंद्रों में किसानों ने धीमी से हो रही खरीदी की शिकायत की। धान खरीदी केंद्र एसेबेड़ा में 565 किसानों में से केवल 153 किसानों की ही धान खरीदी हो सकी है। रोजाना आठ से दस किसानों का ही टोकन काटा जा रहा है, ऐसे में किसानों को 31 जनवरी तक धान खरीदी न हो पाने का डर सता रहा है। किसानों ने बताया 31 जनवरी को धान खरीदी बंद हो जाएगी। इसमें भी छुट्‌टी काटने पर सिर्फ 25 दिन ही खरीदी होगी। इस रफ्तार में सभी किसानों का धान खरीद पाना मुश्किल है। संगम केंद्र में भी किसानों ने खरीदी की धीमी रफ्तार को लेकर आक्रोश जताया। किसानों ने कहा शासन के गिरदावरी के चलते उनका रकबा काफी कम कर दिया गया है। इसके चलते धान बिक्री में परेशानी हो रही है।
किसानों ने बताया की संगम पटवारी विकटराज गंगवार संगम मुख्यालय में नहीं रहते। पखांजूर में कहां रहते हैं इसकी भी जानकारी नहीं देते। इससे किसान पटवारी से काफी परेशान हैं। गिरदावरी के समय भी पटवारी ने घर बैठकर मर्जी के हिसाब से रकबा भर दिया। इसी का खमियाजा किसान भुगत रहे हैं।
उसेंडी ने कहा विगत वर्ष भी प्रदेशभर में लाखों किसान धान खरीदी से छूट गए थे और इस बार भी प्रदेश की धान खरीदी इसी दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने किसानों की मेड़ काटे जाने को भी गलत बताते हुए कहा बिना मेड़ के खेत की कल्पना नहीं की जा सकती। धान के उत्पादन में इन मेड़ों का भी उतना ही योगदान है। अगर सही में प्रदेश के मुख्यमंत्री किसान पुत्र होते तो ऐसा आदेश कभी नहीं देते। प्रदेश में किसानों ने ही कांग्रेस की सरकार बनाई है, लेकिन आज प्रदेश भर के किसान इस सरकार से दुखी है। उनके साथ प्रीतपाल सिंह, नारायण साहा, चंद्रवीर मरई, तपन कर्मकार, शंकर नाग सहित भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे।

4 एकड़ में धान लगाया पर 15 क्विंटल का टोकन मिला
किसान निर्मल राय ने बताया उन्होंने 1.50 एकड़ में धान लगाया है, लेकिन उन्हें 72 किलो धान बेचने का टोकन मिला है। निखिल किर्तनिया ने बताया उसने 1 एकड़ में धान लगाया है, लेकिन रकबा शून्य कर दिया गया है। हृदय मंडल ने चार एकड़ में धान लगाया है, लेकिन उसे 15 क्विंटल धान का टोकन मिला है। इसी प्रकार संजू मजुमदार, राजेश आंचला, सुशांत राय, गीलाराम पददा, प्रकाश विश्वास, पांडू कोरचा, अविनाश बढ़ाई आदि की भी यही समस्या है। सभी ने जल्द से जल्द रकबा सुधारने की मांग की।



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Only 10 farmers cut tokens every day, demand to accelerate purchases


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