पूजन का शुभ मुहूर्त दोपहर 3 से शाम 7:20 बजे तक और रात में 10:20 से 12:20 तक
काल भैरव जयंती आज सोमवार को मनाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार भगवान काल भैरव का जन्म मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर हुआ था। इसलिए हर साल मार्गशीर्ष माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि सोमवार शाम 6:48 से शुरू होगी और अष्टमी तिथि की समाप्ति मंगलवार शाम 5.18 बजे पर होगी।
काल भैरव जयंती के दिन भगवान काल भैरव जी की विधि विधान के साथ पूजा की जाती है। इस दिन उनकी कृपा पाने के लिए विशेष विशेष उपाय करने चाहिए। आपराधिक प्रवृत्तियों पर नियंत्रण करने वाले प्रचण्ड दंडनायक श्रीकालभैरव को शिव का पंचम रुद्रावतार कहा गया है। भैरव जयंती पर शहर के प्रमुख मंदिरों थेगड़ा, गोदावरी धाम, गजना धाम कुन्हाड़ी में भैरव जी की विशेष पूजा-अर्चना होगी। बटुक भैरव को श्रीकालभैरव का ही सात्विक रूप माना जाता है ये अपने भक्तों को तत्काल कष्टों से मुक्ति देते हैं।
ज्योतिषाचार्य अमित जैन का कहना है कि भैरव जी पूजा आराधना से घर में नकारत्मक ऊर्जा, जादू-टोने तथा भूत-प्रेत, मारण, मोहन, विद्वेषण उच्चाटन आदि से किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता पूजन का शुभ महुर्त दोपहर 3 से शाम 7:20 बजे तक और रात्रि 10:20 से 12:20 तक रहेगा।
ऐसे करें पूजन: जिस आसन पर बैठकर पूजा करें उस पर काला कपड़ा बिछाएं
स्नानादि से निवृत्त हो भगवान काल भैरव की पूजा करें, काले कपड़े धारण करने चाहिए। जिस आसन पर बैठकर पूजा की जाती है उस पर भी काला कपड़ा बिछाएं। पूजा में अक्षत, चंदन, काले तिल, काली उड़द, काले कपड़े, धतूरे के फूल का इस्तेमाल अवश्य करें।
काल भैरव भगवान को नीले फूल अर्पित करना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन काल भैरव को इस दिन शराब का भोग लगाया जाता है। इससे भगवान प्रसन्न हो जाते हैं। इस दिन जो व्यक्ति काल भैरव का व्रत करता है वो काले कुत्ते को भोजन कराए तो भगवान प्रसन्न हो जाते हैं ओर भक्तों के सारे कष्ट दूर होते है। पूजा करते समय काल भैरव का मंत्र की एक माला करे, भैरव नामावली, चालीसा का पाठ करें।
भैरूजी के वाहन श्वान को खिलाएं पापड़, पूड़ी पुए और पकौड़े
काल भैरव की कृपा के लिए ये उपाय करें : काल भैरव को प्रसन्न करने के लिए काल भैरव अष्टमी के दिन पापड़, पूड़ी पुए और पकौड़े भगवान को भोग लगाएं। इसके बाद अगले दिन इन्हें गरीब और जरूरतमंद लोगों में बांट दें। ऐसा करने से आपके ऊपर भगवान काल भेरव की विशेष कृपा बनी रहेगी।
भैरव नाथ को जलेबी का भोग लगाएं। इसके बाद बची हुई जलेबी किसी काले कुत्ते को खिला दें। कुत्ता भैरव जी की सवारी माना जाता है। भैरव को कुत्ता अतिप्रिय होता है। भैरव को जलेबी खिलाने से उनकी विशेष कृपा आती है। कचोरी, नमकीन इमरती का भोग लगाने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है भगवान काल भैरव के मंदिर में पीले रंग की पताका अर्पित करें। रोग पीड़ा के निवारण के लिए 5 नींबू अर्पित करें।
काेराेना गाइडलाइन के साथ आज मनाई जाएगी भैरव अष्टमी
काल भैरव विकास समिति की ओर से केशवपुरा मुक्तिधाम स्थित काल भैरव मंदिर में 8 दिसंबर को काल भैरव अष्टमी काे मनाई जाएगी। मुख्य पुजारी प्रेम नारायण ने बताया कि 8 दिसंबर को भैरव अष्टमी के दिन सुबह स्वर्ण शृंगार किया जाएगा।
रात में पुष्पों से काल भैरव का शृंगार किया जाएगा। दोपहर में 5 भजन गायकों द्वारा भैरवजी के गीत गाए जाएंगे। 9 को सुबह 5 लोगों की मौजूदगी में हवन किया जाएगा। प्रतिदिन की भांति मंदिर परिसर में सोशल डिस्टेंसिंग की पालना के अनुसार प्रसाद वितरण होगा।
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