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87 साल पहले चंदैया ने 200 मवेशी बेच की थी मदद, उन्हीं के नाम पर चर्च

मेथोडिस्ट समुदाय से जुड़े मसीही समाज के लोगों के लिए शहर का लाल चर्च बीते साढ़े 8 दशकों से भी ज्यादा समय से आस्था का केंद्र बना हुआ है। अंग्रेजों के जमाने में बने इस चर्च में तत्कालीन समय में ब्रिटिश सरकार के मुलाजिम भी प्रार्थना और आराधना करने आते थे। तब से लेकर आज 87 साल बाद भी मसीही समुदाय के लोगों के लिए हर तरह के कार्यक्रम और त्योहारों में ये लाल चर्च साक्षी रहा है। चाहे कार्यक्रम शादी-विवाह का हो या फिर बप्तिस्मा का, इसके अलावा और भी कई ऐसे मौके होते हैं, जिसमें समाज के लोग यहां पहुंचते हैं। समाज के रत्नेश बेंजामिन ने बताया सन 1933 में स्थापित ये चर्च तत्कालीन समय में करीब 11 हजार रुपए की लागत से बनाया गया था। आज भी लाल चर्च अपने मूल स्वरूप में खड़ा हुआ है, जिसमें कोई भी बदलाव नहीं किया गया है।
87 साल पहले सन 1933 में स्थापित किए गए इस लाल चर्च को चंदैया मेमोरियल मेथोडिस्ट एपिस्कोपल चर्च के नाम से जाना जाता है। दरअसल चंदैया बीजापुर जिले के गोंगला के रहने वाले थे, जिन्होंने मसीही धर्म को स्वीकार कर लिया था। चंदैया ने लाल चर्च बनाने के लिए तत्कालीन समय में अपने करीब 200 मवेशियों को बेच दिया था। यही कारण है कि चर्च बनने के बाद इसे उनकी स्मृति में स्थापित कर दिया गया। लाल चर्च से पहले हैराल्ड चैपल मैदान में बने प्रार्थनागार में समाज के लोग इकट्‌ठा होकर प्रार्थना करते थे। बाद में लाल चर्च स्थापित होने के बाद यहीं वे अपने प्रभु का स्मरण करते हैं।

सीमेंट नहीं, चूना-बेल के गूदे का किया उपयोग
चंदैया मेमोरियल मेथोडिस्ट एपिस्कोपल चर्च के पास्टर डाॅ. एस. सूना ने बताया लाल चर्च का निर्माण करने में सीमेंट का नहीं बल्कि ईंटों को आपस में जोड़ने के लिए चूना और बेल के गूदे को मिलाकर इसे गारे की तरह उपयोग में लाया गया। यही कारण है कि आज भी मजबूती से चर्च खड़ा हुआ है। परिसर में काफी बदलाव हुए, लेकिन चर्च के मूल स्वरूप को किसी भी स्थिति में बदला नहीं गया। पूरी तरह से लाल रंग का होने के कारण इस चर्च को लोग लाल चर्च के नाम से जानने लगे, जबकि वर्तमान में इसे चंदैया मेमोरियल मेथोडिस्ट एपिस्कोपल चर्च के रूप में जाना जाता है।

थर्मल स्कैनिंग के बाद ही कर सकेंगे प्रवेश
कोरोना संक्रमण को देखते हुए चर्चों में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मास्क और सैनिटाइजर की व्यवस्था भी की गई है। इसके साथ ही थर्मल स्कैनर भी रखा गया है, जहां समाज के लोग अंदर आने वालों की सबसे पहले थर्मल स्कैनिंग करेंगे फिर उन्हें अंदर जाने देंगे। इसके साथ ही हाथों को सैनिटाइज करने के बाद ही लोग चर्च के अंदर दाखिल होंगे। बिना मास्क वालों को चर्च में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।



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87 years ago, Chandaiya sold 200 head of help, church in his name


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