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टीकाकरण में 900 करोड़ का खर्च, स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- केंद्र सरकार दे

हेल्थ विभाग ने प्रदेश में सामुदायिक टीकाकरण के लिए अब तैयारियां शुरू कर दी है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि पहले और दूसरे चरण के बाद जब सामुदायिक टीकाकरण की बारी आए तो किसी भी तरह की कमी ना रह जाए। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव ने कहा कि टीके की क्वालिटी को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हम चाहेंगे कि टीके की गुणवत्ता सभी पैमानों पर खरी हो।

स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ की आबादी के संपूर्ण टीकाकरण पर करीब 900 करोड़ रुपए के खर्च का अनुमान है। हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार यह खर्च वहन करे। प्रदेश में कोरोना टीके को रखने के लिए अब तक 711 जगहों पर सैटअप बनाया जा रहा है। जल्द ही राजधानी में प्रदेश के लिए तीन वॉक इन कूलर और तीन वॉक इन फ्रीजर भी आ रहे हैं। जो कि रीजनल वैक्सीन स्टोर में रखे जाएंगे।
वैसे प्रदेश में कोरोना वैक्सीन का पहला टीका किसे लगाया जाएगा, इसके लिए हेल्थ विभाग कोई प्लानिंग नहीं कर रहा है। बल्कि पहला टीका केंद्र की गाइडलाइन के मुताबिक सॉफ्टवेयर एंट्री के क्रमानुसार ही लगाया जाएगा। दरअसल, एक वैक्सीनेशन बूथ में हर दिन करीब सौ टीके लगाए जाने हैं। 28 जिलों में करीब आठ से दस हजार वैक्सीनेशन बूथ बनाए जाने हैं। केंद्र की गाइडलाइन के मुताबिक हर जिले, तहसील विकासखंड और गांव में इसके लिए तैयारियां की जा रही है। हालांकि पहले चरण का टीकाकरण चुनिंदा निर्धारित स्थानों पर ही किया जाएगा। भास्कर को मिली जानकारी के मुताबिक पहले चरण के बाद दूसरे चरण में सामुदायिक टीकाकरण के लिए भी अभी से तैयारियों के लिए जिलों को कहा जा रहा है। वैक्सीनेशन बूथ और उनकी संख्या के लिए जिलों के नोडल अधिकारियों को लिस्ट बनाने के लिए भी कहा जा रहा है। रायपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर में कोरोना वैक्सीन के लिए तीन वॉक इन कूलर यानी डब्ल्यूआईसी और तीन वॉक इन फ्रिज यानी डब्ल्यूआईएफ भी आ रहे हैं।

वैक्सीनेशन प्रोटोकॉल में स्टोरेज के लिए हफ्ते भी रहते हैं निर्धारित
अब तक टीकाकरण को लेकर जो प्रक्रिया अपनाई जाती रही है, उसके मुताबिक किसी भी तरह के वैक्सीन को सामान्य रूप से स्टेट वैक्सीन स्टोर, रीजनल वैक्सीन स्टोर और जिला स्तरीय स्टोर में अधिकतम 11 हफ्ते तक स्टोर करके रखा जा सकता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में वैक्सीन को छह हफ्ते तक स्टोर करके रखा जा सकता है। चूंकि कोरोना वैक्सीन के स्टोरेज को लेकर अभी काफी सारी स्थितियां स्पष्ट नहीं है। इसलिए अभी ये नहीं कहा जा सकता है कि कोरोना वैक्सीन अधिकतम कितने हफ्तों के लिए स्टेट स्टोरेज में स्टोर किया जा सकेगा। टीकाकरण के पूरे प्रोसेस में खासतौर पर ट्रांसपोर्टेशन की रणनीति बनाने में इस फैक्टर को बहुत ज्यादा अहम माना जा रहा है।

दूरस्थ इलाकों को हेल्थ वर्कर जिलों में निर्धारित बूथ में आकर लगवाएंगे टीके
छत्तीसगढ़ में नक्सल पीड़ित दूरस्थ इलाकों के कोरोना वॉरियरों के लिए मुख्यालय या निर्धारित वैक्सीनेशन बूथ में ही टीके लगाए जाएंगे। हालांकि जब सामुदायिक वैक्सीनेशन किया जाएगा, उस समय टीके दूरस्थ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने की तैयारियां हो रही हैं। इसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कोल्ड चैन सिस्टम को मजबूत बनाया जा रहा है। आबादी या हितग्राहियों के अनुपात में यहां स्टोरेज का सिस्टम बनाया जा रहा है, ताकि जब आम लोगों के टीके उपलब्ध होने लगेंगे तो पीएचसी में भी टीके लगाए जा सकेंगे।


"पहला टीका किसको इसके लिए कोई खास प्लान या दिशानिर्देश नहीं है। सॉफ्टवेयर में एंट्री के क्रमानुसार ही टीके लगाए जाएंगे।"
- डॉ. अमरसिंह ठाकुर, राज्य टीकाकरण अधिकारी

"रायपुर जिले में हमने तैयारियां शुरू कर दी है, पहले चरण के कोरोना वॉरियरों की एंट्री की जा रही है। कोल्डचैन सैटअप को मजबूत बनाया जा रहा है।"
शम्मी आबिदी, कोरोना नोडल अधिकारी, रायपुर जिला



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प्रतीकात्मक फोटो।


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