Here we are going to provide you all types of all hindi news ,live news ,Bbc Hindi news ,Ndtv hindi news ,Aaj Tak news, watch live tv coverage ,latest khabar ,breaking news ,world ,sports ,bussiness, films so visit to our website and get all the news

Breaking News

पांच के स्थान पर 3 फीट का ट्री गार्ड, तीन करोड़ खर्च, लेकिन एक भी पौधा जिंदा नहीं

(यशवंत साहू) बंजर जमीन को हरा-भरा करने के नाम पर दुर्ग जिले में एक घोटाला सामने आया है। घोटाला खारुन नदी के किनारे तटबंध में पौधे लगाने में हुआ है। तीन करोड़ रुपए की यह योजना नदी किनारे पानी में बह गई। दो साल पहले शुरू किए इस प्रोजेक्ट में एक भी पौधे जिंदा नहीं। अधिकांश सूख के मर गए हैं। जो बचे हैं उसमें पत्ते तक नहीं। ये पौधे मरेंगे क्यों नहीं, जब अधिकारियों ने इसे बचाने के नाम पर धांधली को अंजाम दिया है।

दैनिक भास्कर की पड़ताल में इसका खुलासा हुआ है। वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने पौधों को बचाने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की। कम हाइट वाले बांस के ट्री गॉर्ड लगाए। जब उससे पेड़ बचे नहीं तो पूरे 55 किमी एरिया (ये सिर्फ दावा है, जबकि हकीकत में कम) में तार फेंसिंग करना पड़ा। इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ तो डिपार्टमेंट ने तुरंत डैमेज कंट्रोल करने के लिए इलाके के रेंजर वाहिद खान को जिले से ही हटा दिया। वाहिद के खिलाफ आरोप पत्र सबमिट कर दिया गया है।

विभागीय जांच भी बिठा दी गई है। मामले में रेंजर खान ने कहा कि उन्होंने कोई गड़बड़ी नहीं की है। जांच के बारे में अभी कुछ नहीं जानता। जब प्रोजेक्ट को किया जा रहा था तब किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इसकी मॉनीटरिंग क्यों नहीं की? ताकि गड़बड़ी को रोका जा सके। पिछले दिनों कलेक्टर ने खारून से लगे किनारे गांवों का दौरा किया था।

आप भी जानिए : गड़बड़ी को वन विभाग के अफसरों ने कैसे दिया अंजाम

ट्री गॉर्ड की हाइट कम की : योजना की शुरुआत 2018 में हुई। तय हुआ था कि सभी 55 हजार पौधों को संरक्षित करने ट्री गॉर्ड लगाए जाएंगे। तय किया गया था कि ट्री-गार्ड की हाइट 5 फीट होनी है, लेकिन इसके स्थान पर 3.5 फीट ऊंचाई वाले 6000 ट्री गॉर्ड लगाए गए। पर पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी ग्रामीणों को दे दी गई।

तार फेंसिंग का बहाना : जब ट्री गॉर्ड से पौधों को संरक्षित नहीं कर पाए तो तार फेंसिंग लगाने की फाइल चलाई। 55 किमी एरिया में 14 ब्लॉक (5 किमी का एक ब्लॉक) बनाए गए। एक प्लॉक पर 12 से 14 लाख रुपए तार फेंसिंग में खर्च हुए। दो करोड़ रुपए तो इसी पर फूंक दिए। बावजूद पौधे नहीं बचे।

किसी ने झांककर देखा नहीं : प्रोजेक्ट बनाते वक्त अफसरों ने इन पौधों की सिंचाई की व्यवस्था नहीं की। गांव वालों को देखरेख करने की बात कहकर चले गए, लेकिन नदी किनारे इन पौधों को किसी ने एक लोटा पानी तक नहीं दिया। गर्मी के दिनों में पौधे सूखकर मर गए। इसके ठूंठ आज भी दिख रहे।

मनरेगा के काम में भी गड़बड़ी: इस पूरे प्रोजेक्ट को मनरेगा से जोड़ा गया। खारुन नदी से लगे गांवों के लोगों को काम दिया गया। कई गांवों में यह शिकायत मिली कि जितने का काम नहीं हुआ, उससे ज्यादा का बिल भी पुटअप हो गया। वन विभाग की जांच में यह बात भी सामने आई है। इसके अनुसार अब कार्रवाई होने की बात कही जा रही है।

दुर्ग में पहले से ही है वन क्षेत्र की भारी कमी

यह चिंता की बात है कि दुर्ग जिला पहले से ही वनों से उपेक्षित रहा है। यहां एक भी जंगल नहीं है। बावजूद सिस्टम में बैठे लोग यहां पर्यावरण संरक्षण के नाम पर भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे हैं। पिछले दिनों पर्यावरण दिवस पर ग्रीन दुर्ग का नारा दिया गया था। तब यह तय किया गया था कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर तेजी से अभियान चलाए जाएंगे। वहीं भिलाई निगम ने भी वन विभाग को पौधे लगाने तीन साल पहले 51 लाख रुपए दिए थे। इसका भी हिसाब वन विभाग नहीं दे पाया है।

खारून के किनारे सभी गांवों में लगाए पौधे, बचे कहीं भी नहीं

वन विभाग दुर्ग ने खारुन नदी से लगे गांव केसरा, रानीतराई, जामगांव आर, तुलसी, बठेना, झीठ, कोपेडीह, उफरा, मुंडरा, घुघवा, ठकुराइन टोला और अमलेश्वर समेत अन्य गांवों में पौधे लगाए गए थे, लेकिन ग्राउंड में अधिकांश पौधे सूख गए हैं। उसके ठूंठ ही दिखाई दे रहे हैं।

एक नजर में जानिए प्रोजेक्ट के बारे में

5 किमी में 5 हजार पौधे लगे। इसे एक ब्लॉक माना गया।
70 से 80% पौधों की देखभाल ही नहीं की गई।
15 से ज्यादा गांवों में इस प्रोजेक्ट को लांच किया गया।
6 हजार नग पहले बांस के ट्री गॉर्ड लगाए गए थे।

लापरवाही के कारण रेंजर को हटाया गया जांच जारी है

2018 में इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी। एक्जीक्यूशन में कमी हुई। इसलिए पेड़ सूखे होंगे। इस प्रोजेक्ट में लापरवाही के कारण रेंजर वाहिद खान को हटाया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच भी चल रही है। अब इसे बेहतर ढंग से क्रियान्वयन करेंगे। किसी प्रकार की गड़बड़ी होगी तो उसकी जांच भी कराएंगे। सभी पौधों को बचाया जाएगा।

धम्मशील गणवीर, डीएफओ, दुर्ग



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
पहले कम हाइट के बांस के बने ट्री गार्ड लगाए। तब इसमें पौधों के बचने की संभावना नहीं दिखी तो तार फेंसिंग कराई। इसके बाद भी पौधों को नहीं बचा जाए। इसके ठूंढ आज भी खारून नदी के किनारे देखने को मिल जाएंगे।


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3hWTnMu
via IFTTT

No comments