सड़ रहा अन्नदाताओं का सोना...200 करोड़ का धान बारिश में भीग रहा, भारी बदइंतजामी
कोरोना के बहाने संग्रहण केंद्रों में धान के उठाव में बड़ी लापरवाही सामने आई है। नए सीजन में धान खरीदी के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है और पुराने सीजन का धान का ही अब तक उठाव नहीं किया गया है। 921 मिमी बारिश हुई है जो कि सामान्य से 12 फीसदी ज्यादा है। ऐसे में बारिश ने इंतजाम खराब कर दिया है। चार संग्रहण केंद्रों में 8 लाख 10 हजार क्विंटल यानी 200 करोड़ रुपए (2500 रुपए प्रति क्विंटल) से भी ज्यादा के धान खराब हो रहे हैं।
इस बार समितियों में धान का जीरो शार्टेज रहा, ऐसे में संग्रहण केंद्रों में बड़ा खेल शुरू हो गया है। दैनिक भास्कर ने मोपका, सेमरताल, बिल्हा व भरनी संग्रहण केंद्र की ग्राउंड रिपोर्ट की। सबसे ज्यादा खराब हालत मोपका संग्रहण केंद्र की है, जहां काफी मात्रा में धान खुले में रखा है। संग्रहण केंद्र के भीतर की हालत ऐसी है कि वहां तक गाड़ियां जा ही नहीं सकती। बारिश के पानी से वहां कीचड़ है और गाड़ी गई तो फंस जाएगी। यहीं वजह है कि सड़क के ऊपर से ही गाड़ी में धान लोड की जाती है। वहां गाड़ियों की कतार नजर आई।
- 17 अगस्त से शुरू हो गया वर्ष 2020-21 के लिए धान खरीदी के लिए पंजीयन
- 685 रुपए धान खरीदी पर बोनस प्रति क्विंटल दिया जा रहा है
- 1 लाख 1662 किसानों ने 2019-20 में सरकार को धान बेचा
बिल्हा संग्रहण केंद्र- मेन रोड में होने के बावजूद बदइंतजामी : बिल्हा संग्रहण केंद्र में सबसे ज्यादा 3 लाख 93 हजार क्विंटल पड़ा है। यहां भारी बदइंतजामी है। किसानों की मेहनत से उपजाया गया धान बर्बाद हो रहा है। जबकि यह केंद्र मेन रोड पर स्थित है, यहां अधिक मात्रा में धान रखा हुआ है।
भरनीभाठा संग्रहण केंद्र- सड़क से दिख रही धान की बर्बादी : भरनीभाठा में हर दिन यहां धान का उठाव ही नहीं हो रहा। कभी वाहन आता है और कभी नहीं।
मोपका- 2 लाख क्विंटल धान भीग रहे: इस संग्रहण केंद्र में जगह-जगह घास उग आई है। केंद्र के भीतर पानी भरा है, जिसके कारण गाड़ियां भीतर नहीं जा पाती। परिवहन की स्थिति भी अच्छी नहीं है। तिरपाल से धान के बोरे झांक रहे हैं। दो भागों में बंटे केंद्र में दोनों ही तरफ हालत खराब है।
सीधी बात: शोभना तिवारी, डीएमओ मार्कफेड
संग्रहण केंद्रों में इतनी मात्रा में धान का उठाव क्यों नहीं हुआ?
- मुंगेली जिले से अतिरिक्त धान आने से उठाव नहीं हो पाया।
बारिश में अब तक कितना धान खराब हो गया?
- बारिश में भीगे धान का आंकलन फाइनल निराकरण के बाद हो पाएगा।
अतिरिक्त धान आने पर उठाव
की उसी हिसाब से प्लानिंग क्यों नहीं की गई?
- शासन के निर्देश के हिसाब से उसे फॉलो किया जाता है।
क्या खराब हुए धान की जिम्मेदारी आप लेती हैं?
- फाइनल निराकरण के बाद ही जिम्मेदारी भी तय होगी।
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