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ग्रापं 454 लेकिन गोठान 197, जहां नहीं वहां गोबर खरीदी बंद

जिले में 20 जुलाई से गोबर खरीदी कार्य शुरू किया गया है लेकिन फिलहाल जिले की सभी पंचायतों में गोबर खरीदी कार्य नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में केवल जिले के 197 गोठानों में ही गोबर खरीदी कार्य हो रहा है जबकि जिले में पंचायतों की संख्या इससे ढाई गुना यानी 454 है। जिन पंचायतों में गोठान निर्माण नहीं हो पाया है वहां के पशुपालकों को गोबर बेचने में परेशानी हो रही है क्योंकि उन्हें गोबर बेचने दूसरे गोठानों में जाना होगा। गोठानों की दूरी उनके गांव से अधिक होने के कारण बहुत से पशुपालक गोबर नहीं बेच पा रहे हैं।
जिले में 454 ग्राम पंचायते हैं जिनमें से मात्र 197 पंचायतों में ही गोठान बन पाए हैं। जिन पंचायतों में गोठान बने हैं वहीं पर गोबर खरीदी हो रही है। शेष में नहीं हो पा रही है। कांकेर विकासखंड में 64 ग्राम पंचायतें हैं तथा केवल 30 में गोठान बने हैं जहां गोबर खरीदी हो रही है। ग्राम ठेलकाबोड़ में गोठान नहीं है तथा यहां शुरू के तीन दिन गोबर खरीदी हुई। गोठान नहीं होने से तीन दिनों बाद खरीदी कार्य बंद करना पड़ा। अभी भी यहां खरीदा गया गोबर रंगमंच में खुले में पड़ा है। अब यहां के पशु पालकों व समूह को कहा जा रहा है कि 2 किमी दूर ग्राम कोड़ेजुंगा जहां गोठान है वहां जाकर गोबर बेचें। लेकिन इतनी दूर जाना उनके लिए संभव नहीं। पशु पालक राजेश मटियारा ने कहा कि गोधन न्याय योजना का हम चाहते हुए भी लाभ नहीं ले पा रहे हैं। गंगा मैया समूह अध्यक्ष मालती साहू ने कहा कि गोठान नहीं होने के ठेल्काबोड़ में गोबर खरीदी बंद करनी पड़ी।
ग्राम मनकेशरी में एक ही दिन गोबर खरीदी हुई। ग्राम अर्जुनी में 3 दिन गोबर खरीदी हुई। ग्राम पंडरीपानी में गोबर की खरीदी नहीं हो रही है।
पशु पालको को गोबर बेचने 2 किमी दूर डुमाली जाना पड़ रहा है। काफी कम पशु पालक ही जा पा रहे हंै। ग्राम मालगांव में भी गोठान नहीं होने से एक ही दिन गोबर खरीदने के बाद खरीदी बंद कर दी गई। यहां के पशुपालकों को गोबर बेचने लाल माटवाड़ा जाना पड़ेगा। ग्राम पंचायत लाल माटवाड़ा में गोठान नदी के उस पार है। लाल माटवाड़ा के आधे भाग के अलावा कोकपुर के भी पशु पालक नदी उस पार गोबर बिक्री करने नहीं जा पा रहे हैं।

पहले बताया गया कि समूह करेगा खरीदी: जैन
माटवाड़ा मोदी सरंपच टकेश नाग ने कहा कि पंडरीपानी के पशु पालकों को गोबर बेचने डुमाली गोठान में जाना पड़ रहा है। गांव में ही नाडेप व शेड बनाकर खरीदी करनी चाहिए। ठेलकाबोड़ उपसरपंच डोलेश जैन ने कहा शुरू में कहा गया था समूह के माध्यम से गोबर खरीदी हर गांव में होगी लेकिन अब नहीं करने से परेशानी हो रही है। कोकपुर उपसरपंच जगदीश सोनी ने कहा कि कोकपुर में गोठान नहीं होने से यहां के पशुपालकों को परेशानी हो रही है।

गोठान बनने के बाद सभी जगह होगी खरीदी
जिला पंचायत उपाध्यक्ष हेमनारायण गजबल्ला ने कहा कि जहां गोठान है वहीं पर गोबर खरीदी करना है। सभी पंचायतों में गोठान बनाने का काम चल रहा है। जैसे जैसे गोठान बनते जाएंगे उसी पंचायत में खरीदी कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
सिर्फ गोठान में ही करनी है गोबर खरीदी
जिला पंचायत सीईओ संजय कन्नौजे ने कहा कि सिर्फ गोठान वाले गांव में ही गोबर खरीदी अभी की जानी है। जिन गांवो में गोठान नहीं है वहां के पशुपालकों के लिए निकटतम गांव के गोठान में व्यवस्था की जा रही है।



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