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प्रसव पीड़ा से छटपटा रही गर्भवती को परिजन ने उफनती नदी पार कर एंबुलेंस तक पहुंचाया

मैनपाट सरगुजा जिले के सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में शामिल है। यहां के 10 से अधिक पंचायतें बारिश के दिनों में नदियों पर पुल नहीं होने से पहुंचविहीन हो जाती हैं। शनिवार के कदनई गांव में प्रसव पीड़ा से छटपटा रही गर्भवती को झेलगी में ढोकर एक किलोमीटर पैदल चले परिजन ने उफनती नदी पार कर उसे एंबुलेंस तक पहुंचाया।
दैनिक भास्कर ने बरसात से पहले खुलासा किया था कि ऐसी दर्जनों महिलाएं हैं। जिनका प्रसव बरसात के दिनों में होगा और उन्हें कांवर में ढोकर नदी पार कराने की मजबूरी होगी। ऐसे में उनकी जान को खतरा है। इस पर क्षेत्रीय विधायक और खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने हेल्थ के अफसरों को ऐसी गर्भवती की लिस्टिंग कर उन्हें गांवों से प्रसव की तारीख से 10 दिन पहले बाहर लाकर रखने के निर्देश दिए थे, लेकिन मंत्री की बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया। यही वजह है कि शनिवार सुबह कदनई की सशिता को प्रसव पीड़ा होने पर महतारी एम्बुलेंस को काल किया गया। एम्बुलेंस नदी किनारे तक आई, लेकिन घुनघुट्टा नदी पर पुल के आभाव में दूसरी तरफ ही खड़ी रही। वहीं परिजन ने उसे पैदल चलकर नदी पार कर एंबुलेंस तक पहुंचाया।

नदी पार नहीं कर पाने से नहीं मिला इलाज सांप के डसने से बच्चे की हो गई थी मौत
मैनपाट इलाके से माढ, मछली और घुनघुट्टा नदी कई गांवों को प्रभावित करती हैं। जिनमें सुपलगा ग्राम के ढोढ़ीटीकरा, नर्मदापुर का घटगांव और करमहा पंचायत के दो हजार से अधिक परिवार बरसात के दिनों में पहुंचविहीन हो जाते हैं। इन गांवों तक पहुंच आसान बनाने रोड व पुल निर्माण की जरूरत है। पिछले साल रात में एक बच्चे को सांप ने डस लिया था। परिजन रात में नदी पार नहीं करा सके और उसकी मौत हो गई। अब भी वैसे ही हालात हैं।

स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर पर डिलीवरी कराने पहुंचे, परिजन नहीं हुए थे तैयार: सिसोदिया
जिला स्वास्थ्य अधिकारी पूनम कुमार सिसोदिया ने कहा है कि कदनई की जिस महिला को नदी में झेलगी से ढोकर पार कराया गया, उसे डिलीवरी समय से पहले हो गई। वहां पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता है। वह डिलीवरी कराने के लिए तैयार हो गया था, लेकिन उसके परिजन तैयार नहीं हुए। इसके बाद वे नदी पार कर स्वास्थ्य केंद्र ले गए। वैसे नदी के दूसरी तरफ एंबुलेंस थी। पहुंचविहीन गांवों में प्रसव कराने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है।

गर्भवती बोली- क्षेत्र से दो मंत्री, पुल की उम्मीद, गांव आएंगे तो पूछूंगी
सरगुज़ा संभाग के अंबिकापुर में स्वास्थ्य मंत्री और खाद्य मंत्री रहते हैं। अमरजीत भगत के खाद्य मंत्री बनने पर यहां के लोगों को इसकी उम्मीद थी कि पहुंचविहीन गांवों में पुल पुलियों का निर्माण होगा, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस पहल नहीं हुई है। वहीं राजनीतिक खींचतान के बीच आम जनता के हित में बुनियादी सुविधाओं का विकास नहीं हो पा रहा है। इसका खामियाजा सीधे तौर पर सशिता जैसी महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। सशिता से जब हमने नदी में पुल नहीं होने के कारण झेलगी में ढोकर नदी पार कराने पर बात की तो उसने कहा, पुल तो नेता लोग बनवाते हैं, वोट से पहले कहा गया था पुल बन जायेगा। हम लोग जब मंत्री गांव आएंगे तो उनसे पुल के बारे में पूछेंगे। लेकिन वोट देने के बाद से अब तक वो यहां नहीं आए हैं।



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Pregnant, sputtering with labor pain, the family crossed the swollen river and reached the ambulance


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