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पदोन्नति के खेल ने हजारों का हक रोका, पहले सीआर गुम तो अब आरक्षण का पेंच

जॉन राजेश पॉल | राज्य के सभी सरकारी विभागों में पदोन्नति हो रही है, लेकिन सबसे बड़े व महत्वपूर्ण शिक्षा विभाग हजारों शिक्षकों को उनका यह हक नहीं मिल रहा है। इसमें हजारों शिक्षकों के साथ करीब सवा छह हजार तो व्याख्याता ही शामिल हैं। पहले सीआर और सर्विस बुक गायब करने के खेल और अब आरक्षण के पेंच के चलते शिक्षा विभाग पदोन्नति पर विचार ही नहीं कर रहा है। सीनियर टीचर हर साल बड़ी संख्या में रिटायर हो रहे हैं। इसका असर लाखों बच्चों पर पड़ रहा है जिन्हें प्राचार्य, विषय शिक्षक व शिक्षक नहीं मिल पा रहे हैं। शिक्षक चाहते हैं कि उन्हें फिलहाल 2003 की तर्ज पर पदोन्नति दे दी जाए ताकि 35-40 सालों की सेवा का उन्हें उचित फल मिल सके। शिक्षामंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि इस बारे में सरकार विचार करेगी। आखिरी पदोन्नति 2016 में हुई थी। शिक्षक से व्याख्याता के शिक्षा विभाग में 3900 और ट्राइबल विभाग में 1300 पद खाली हैं। जबकि व्याख्याता से प्राचार्य के भी 2828 पद रिक्त हैं। बताते हैं कि प्रमोशन की सारी प्रक्रिया पूरी हो जाने और विभाग से अप्रूवल हो जाने के बाद आरक्षण के पेंच में मामला फंस गया है।

क्रमोन्नति-समयमान के पूर्व महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब : इधर, रायपुर समेत कई जिलों के डीईओ ने शिक्षकों, व्याख्याताओं व प्राचार्यों को क्रमोन्नति व समयमान वेतनमान देने के लिए तय प्रारूप में पांच साल की गोपनीय चरित्रावली यानी सीआर, संपत्ति का विवरण सात दिनों में मांगा है। इसके बाद बड़ा खुलासा यह हुआ है कि कई शिक्षकों के न्यायालयीन प्रकरणों की जानकारी, सीआर व गोपनीय दस्तावेज जो उन्होंने विभाग में जमा कराए गुमा दिए गए हैं। संचालनालय के अफसरों ने इसकी पुष्टि की है। हालांकि मुख्य सचिव आरपी मंडल ने पूर्व आदेश में संशोधन कर कोरोना की वजह से अप्रैल तक जमा कराई जाने वाली सीआर के लिए जुलाई तक का वक्त नीयत कर दिया है। इधर व्याख्याता संघ के प्रांतीय अध्यक्ष राकेश शर्मा ने कहा कि अफसरशाही हावी होने की वजह से गोपनीय दस्तावेज गायब होते हैं। दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। शिक्षकों को भी पदोन्नति मिले इसके रास्ते विभाग को तलाशने चाहिए। दूसरे विभागों में प्रमोशन हो ही रहे हैं।

इस तरह होता है खेल
यदि किसी प्राचार्य ने किसी व्याख्याता या शिक्षक की सीआर लिखी। फिर प्राचार्य का तबादला हो गया। सीआर को विभाग को जमा करा दिया गया। विभाग के जिम्मेदार लोगों ने उसे गुमा दिया। तो संबंधित शिक्षक को फिर से सीआर लिखवाने प्राचार्य को ढूंढते हुए उस स्थान पर जाना होगा जहां वे पदस्थ हैं। इस बीच डीपीसी हो जाती है। और यह शिक्षक का नाम लिफाफे में बंद रह जाता है।

दस्तावेजों का दफ्तरों से गायब होना उचित नहीं : शिक्षा मंत्री टेकाम
शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने भास्कर से कहा कि दस्तावेजों के गायब होने की तो शिक्षकों को खुद हर साल अपनी सीआर व अन्य प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। इसे संभालकर रखना चाहिए। यदि ये दस्तावेज दफ्तर से गायब हो गए हैं तो यह उचित नहीं हैं। इस पर कार्रवाई पर विचार करेंगे। इस बारे में सिस्टम डेवलप किया जाएगा। इसी को लेकर हम टीचर्स एप बना रहे हैं। सभी शिक्षकों को चाहिए कि उसमें अपनी सेवा से संबंधित सभी जरूरी जानकारी अपलोड करें। इससे ऐसी शिकायतों में कमी आएगी।



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