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जीएम को जांच में खराब चावल के बाेरों पर मिलर का नाम व पैकिंग की तिथि नहीं मिली

बलरामपुर के वाड्रफनगर के प्रेमनगर स्थित नागरिक आपूर्ति निगम के गोदाम में अधिकारियों की लापरवाही से 16 हजार बोरा चावल खराब होने के मामले की जांच के लिए खाद्य मंत्री के विशेष सहायक व वेयर हाउस के महाप्रबंधक डॉ. अजय शंकर कनोजे अफसरों के साथ पहुंचे। उन्होंने दो टूक कहा कि मामले में कार्रवाई खाद्य विभाग द्वारा लिए चावल के सैम्पल की रिपोर्ट के आधार पर होगी।
जबकि उसी खराब चावल के 4 हजार बोरा रिसाइक्लिंग के बाद पांच माह के भीतर पीडीएस की दुकानों में भेजे जा चुके हैं। इसके बाद फूड के अधिकारियों को गोदाम से उस चावल का सैम्पल लेने आदेश दिया गया। उसकी रिपोर्ट लॉकडाउन में लैब बंद होने की वजह से अब तक नहीं आई है। रायपुर से पहुंचे डॉ. अजय ने गोदाम का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि जांच के लिए इसलिए पहुंचे हैं, ताकि ऐसी लापरवाही दोबारा दूसरे गोदाम में न हो। उन्हें जो चावल के बोरे दिखाए गए उनमें टैग नहीं लगा था। इससे यह पता नहीं चल रहा था कि चावल की सप्लाई किस राइस मिलर ने की है और कब की पैकिंग है। ऐसे में कार्रवाई किस के खिलाफ होगी, इस पर सवालिया निशान है।

जांच करने वाले अफसर भी संदेह के दायरे में
जिस क्वालिटी इंस्पेक्टर ने इसकी जांच की और जिसके परमिशन पर राइस मिलर के ट्रक से चावल गोदाम में उतरा उस पर भी सवाल उठ रहा है। इतना ही नहीं अगर चावल सही था और समय पर दुकानों के लिए उठाव नहीं होने की वजह से खराब हुआ तो उसके लिए जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

दोषियों पर अब तक नहीं की गई कार्रवाई
तत्कालीन कलेक्टर संजीव कुमार झा ने जांच में जिन अफसरों और कर्मियों को जिम्मेदार बताया है। उन पर निगम और वेयर हाउस ने अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की है। ऐसे में जीएम की इस जांच के बाद भी कार्रवाई होगी, इसकी उम्मीद कम है। अधिकारियों की लापरवाही को जांच में उलझाया जा रहा है।

एसडीएम नहीं रोकते तो बांट देते पूरा चावल
जीएम ने बताया कि 16 हजार बोरों में चार हजार बोरा दुकानों में रिसाइक्लिंग के बाद भेजा जा चुका था, लेकिन इसी बीच एसडीएम जब जांच के लिए पहुंचे तब उन्होंने दुकानों में भेजने से रोक दिया। जबकि उससे पहले ही पूरे मामले का खुलासा हो चुका था। अगर एसडीएम नहीं रोकते तो पूरा चालव बांट देते।

तत्कालीन अधिकारी ने कही थी रिकवरी की बात
इस मामले में नान के तत्कालीन अधिकारी अमृत विकास टोप्पो ने कहा था कि रिकवरी होगी। अब इसके बाद मामले की जब खाद्य मंत्री से भाजपा नेता ने शिकायत की तो वेयर हाउस के जीएम जांच के लिए पहुंचे। उन्होंने कहा कि फूड लैब से रिपोर्ट जल्द मंगाई है। रिपोर्ट में अगर चावल खराब पाया जाता है तो नीलाम किया जाएगा। इसके लिए दोषी अधिकारियों से वसूली होगी।

अफसरों पर कार्रवाई नहीं होने से सवाल
अब सवाल उठ रहा है कि चावल की क्वालिटी रिपोर्ट में उसे खाने योग्य बताई जाती है तो फिर कलेक्टर की रिपोर्ट पर जिन्हें जिम्मेदार बताया गया है। वह भी वजह के साथ उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। वहीं भाजपा का कहना है कि मामले को दबाया गया तो वे इसका विरोध करेंगे।



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GM did not find Miller's name and date of packing on bad rice feeds


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