किशनजी की पत्नी सुजाता बनेगी नक्सलियों के जोनल कमेटी की सचिव
अबूझमाड़ के जंगलों से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां हाल ही में नक्सलियों के बड़े लीडर्स की एक बैठक हुई थी। बैठक में नक्सल गतिविधियों को चलाने के अलावा दंडकारण्य जोनल कमेटी में होने वाली नई नियुक्तियों के लिए भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई है। पुख्ता सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नक्सली प्रवक्ता रहे किशनजी की पत्नी सुजाता को अंतरिम तौर पर दंडकारण्य जोनल कमेटी का सेक्रेटरी बनाने पर सहमति बनी है। इसके अलावा अब नक्सली दंडकारण्य जोनल कमेटी की कमान दो लोगों के हाथों में देने के पुराने फार्मूले पर वापस आ रहे हैं। दरअसल, नक्सलियों की जोनल कमेटी के तत्कालीन सेक्रेटरी रमन्ना की मौत के बाद से ये पद करीब 9 महीने से खाली था। जिस पर अब सुजाता की नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है।
अब जोन की कमान दो हाथों में देने की तैयारी
खबरें ये भी हैं कि वर्ष 2013-14 तक दंडकारण्य जोनल कमेटी के संचालन के लिए जोनल प्रभारी और सेक्रेटरी वाली व्यवस्था थी। जब यह व्यवस्था खत्म की गई, तब कोसा प्रभारी और रमन्ना सेक्रेटरी था। इसके बाद जोनल सेक्रेटरी को ही सारे अधिकार दिए गए थे। लेकिन हाल ही में अबूझमाड़ में हुई बैठक के बाद पुरानी व्यवस्था को फिर से शुरू किया जा रहा है। हालांकि अभी अबूझमाड़ की बैठक में नक्सलियों ने जो निर्णय लिया है उसकी अधिकृत घोषणा नहीं की गई है। लेकिन माना जा रहा है कि दो-चार दिनों में अधिकृत घोषणा कर दी जाएगी। गौरतलब है कि अभी दंडकारण्य जोनल कमेटी का प्रभारी सचिव सीसी मेंबर कड़तम सुदर्शन उर्फ एलियास को बनाया गया है।
प्रभारी और सेक्रेटरी का पद अलग करने का भी फायदा
इधर नक्सलियों की दंडकारण्य जोनल कमेटी को दो पदों में फिर से बांटने के कई फायदे हैं। पहला फायदा यह कि जोन की कमान के लिए ट्रायबल और नान-ट्रायबल वाले समीकरण को आसानी से हल किया जा सकता है। सेक्रेटरी और प्रभारी का पद अलग होने से एक पर ट्रायबल और दूसरे पर नान-ट्रायबल की नियुक्ति आसन हो गई है।
जानिए...कौन है सुजाता, उसे क्यों बनाया जा रहा सचिव
सुजाता का नाम लाल गलियारों में काफी पुराना है। सुजाता नक्सली प्रवक्ता रह चुके किशनजी की पत्नी है। पश्चिम बंगाल में किशनजी के मारे जाने के बाद सुजाता ने बस्तर का रुख किया था। वर्तमान में सुजाता दक्षिण बस्तर डिवीजनल कमेटी की प्रभारी है और दंडकारण्य जोनल कमेटी की सदस्य भी है। सुजाता लंबे समय से बस्तर में रह रही है और नक्सल गतिविधियों का संचालन कर रही है। अभी वह लोगों से सीधे जुड़ी हुई है और उसके साथ ट्रायबल नान-ट्रायबल जैसी भावना वाली कोई बात नहीं है। सुजाता की पकड़ हिंदी, अंग्रेजी, तेलगु के साथ-साथ गोंडी भाषा में भी हैं। सुजाता नक्सलियों के उन चुनिंदा नेताओं में से है जो रमन्ना की मौत के बाद अंतिम संस्कार में भी शामिल हुई थी।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/31Hfij3
via IFTTT
No comments