266 रुपये की यूरिया महाराष्ट्र से 500 में लाने के लिए मजबूर पखांजूर के किसान
पखांजूर सहित पूरे जिले में यूरिया की भारी किल्लत है। प्रशासन लैंप्सों में यूरिया का पर्याप्त स्टाक होने का दावा कर रही है लेकिन वहां से केवल लैंप्सों से लोन लेने वाले किसानों को ही यूरिया प्रदान किया जाता है जिनका कुल किसानों के मुकाबले अनुपात 20 प्रतिशत ही है। शेष 80 प्रतिशत किसान खुले बाजार पर निर्भर हैं जहां यूरिया नहीं है। यही कारण है कि पखांजूर क्षेत्र के किसान पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के पेंडरी तथा पड़ोसी जिला राजनांदगांव के मानपुर से बाइक में अपनी जरूरत अनुसार यूरिया दोगुने दामों में ला रहे हैं।
जिले में खासकर पखांजूर क्षेत्र में पिछले एक महीने से यूरिया की भारी किल्लत है। किल्लत का फायदा उठाते कुछ व्यापारियों ने यूरिया का स्टाक बुलवाया तथा 266 रुपए वाली यूरिया 500 रुपए तक चोरी छुपे बेचनी शुरू कर दी। किसानों की शिकायत पर प्रशासन तथा कृषि विभाग की टीम ने यूरिया की कालाबाजारी करने वाले कुछ व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की लेकिन किसानों के लिए यूरिया का प्रबंध नहीं कराया। प्रशासन तथा कृषि विभाग का दावा है कि लैंप्सों में यूरिया का पर्याप्त स्टाक है।
यूरिया का पर्याप्त स्टाक
कृषि विभाग कांकेर के सहायक संचालक सूरज पंसारी ने कहा कि लैंप्सों में यूरिया पर्याप्त है। विभाग द्वारा सभी किसानों को लैंपस से ही लोन लेने कहा जाता है ताकि किसानों को खाद के लिए परेशान नहीं होना पड़े।
ये भी मुसीबत... लैंपस से लोन लेने वाले किसानों को ही दे रहे यूरिया
भास्कर ने पड़ताल की तो पता चला लैंप्सों से केवल उन्हीं किसानों को यूरिया प्रदान किया जाता है जिन्होंने लैंप्सों से कृषि कार्य के लिए लोन लिया है। बाकी किसानों को यूरिया प्रदान नहीं किया जाता। क्षेत्र में केवल 20 प्रतिशत किसान ही लैंप्सों से लोन लेकर खेती करते हैं शेष 80 प्रतिशत किसान दूसरे बैंकों से लोन लेते हैं या फिर बिना लोन लिए ही किसानी करते हैं। लैंप्सों से भी केवल लोन लेने वाले किसानों को लोन राशि के बदले उसके कृषि क्षेत्र के अनुपात में यूरिया दी जाती है। शेष 80 प्रतिशत किसानों को यूरिया के लिए भटकना पड़ रहा है। कहीं से यूरिया नहीं मिलती देख किसान अब अपनी बाइकों में पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के पेंडरी व पड़ोसी जिला राजनांदगांव के मानपुर पहुंच जरूरत के अनुसार 266 रुपए वाली यूरिया 500 में मजबूरी में ला रहे हैं। रोज पखांजूर से बड़ी संख्या में किसान बाइक से सुबह निकलते हैं और दोपहर तक एक बाइक में तीन बोरी यूरिया लेकर अपने गांव पहुंच रहे हैं। किसान हारान मंडल, विधान राय, सुभाष वर्मन ने बताया मानपुर में भी यूरिया पांच सौ रुपए में मिल रही है। पखांजूर लैंपस में धान विक्रय करने 6546 किसान पंजीकृत हैं जिसमें से लोन लेने वालों की संख्या मात्र 1027 है। इसी प्रकार बांदे में पंजीकृत किसानों की संख्या 5314 है जिसमें से लोन लेने वाले किसान 1677 हैं। कापसी लैंप्सों में धान विक्रय करने पंजीकृत किसानों की संख्या 4967 जबकि लोन लेने वालों की संख्या मात्र 1453 है। इन लैंप्सों में केवल लोन लेने वालों को यूरिया दी जाती है।
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