महारानी अस्पताल में मनोरोग से पीड़ित 30 लोगों की काउंसिलिंग
शहर के महारानी अस्पताल के स्पर्श क्लीनिक में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर शिविर लगाया गया। इस दौरान करीब 30 से ज्यादा लोगों की काउंसिलिंग मनोचिकित्सकों ने की। इसमें अधिकांश लोग ऐसे मिले, जो गंभीर अवसाद से पीड़ित पाए गए। ऐसे लोगों की काउंसिलिंग की गई।
बताया जाता है कि किसी भी कारण से अवसाद में डूबे मरीजों को इलाज के लिए सलाह दी गई और उन्हें नियमित रूप से इसके खत्म होने तक अपनी काउंसिलिंग जारी रखने की सलाह भी दी गई।
शिविर में करीब 20 लोग मिले, जो सीवियर डिप्रेशन के शिकार थे, इलाज शुरू: राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के बस्तर जिले के नोडल अधिकारी डॉ. ऋषभ साव ने बताया कि विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर आयोजित शिविर में करीब 15 से 20 लोग ऐसे भी मिले, सीवियर डिप्रेशन के शिकार थे। किसी न किसी कारण से वे तनाव के घेरे में आते चले गए और धीरे-धीरे अवसाद की जद में पहुंच गए। उन्होंने बताया कि अवसाद भी एक प्रकार की मानसिक बीमारी है। हालांकि लोग आमतौर पर मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को पागल कहते हैं, लेकिन ऐसा कहना गलत है। मानसिक बीमारी का इलाज संभव है, जिसके लिए अवसाद में डूबे हर व्यक्ति को पहल करते हुए तुरंत मनोचिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।
एक्टपर्ट व्यू: अकेलापन पसंद करने वाला व्यक्ति मानसिक रोगी, जो कर सकता है आत्महत्या
शिविर में मौजूद रहे मनोचिकित्सक डॉ. लक्ष्मीकांत यादव ने बताया कि आत्महत्या करने का उत्सुक व्यक्ति इस तरह के लेख-वीडियो पढ़ता या देखता है। अकेलेपन का शिकार भी इस दिशा में जा सकता है, जिसे परिवार के लोग भांपकर उसका इलाज करवा सकते हैं। उन्होंने बताया कि कई बार ऐसा भी होता है कि परिवार का एक सदस्य डिप्रेशन में होने के बाद उस पर ध्यान नहीं दिया जाता। ऐसे में लोगों को इसके प्रति जागरूक होने की जरूरत है और अवसाद के लक्षण दिखने पर तत्काल मनोचिकित्सक के पास ले जाकर उसका इलाज शुरू करवाना चाहिए।
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