बीएसआर से 48 % कम दराें पर टेंडर कामाें की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
भूजल विभाग की ओर से पिछले दिनाें आमंत्रित टेंडर बीएसअार दराें से 48 प्रतिशत कम दराें पर उठने का गणित जिले के बड़े अधिकारी ताे क्या प्रभारी मंत्री भी नहीं समझ पा रहे। चार दिन पहले समीक्षा बैठक में प्रभारी मंत्री राजेंद्र सिंह यादव ने इस संबंध में सवाल किया ताे बड़े अधिकारियाें के पास भी इसका सटीक जवाब नहीं था। भूजल विभाग ने पिछले दिनाें करीब साढ़े पांच कराेड़ रुपए के कार्याें के ऑनलाइन टेंडर किए थे।ऑनलाइन प्रक्रिया पहली बार शुरू की गई थी। इनमें से करीब पचास प्रतिशत कार्याें के टेंडर बीएसअार दराें से 48 प्रतिशत कम पर उठे थे। शेष राशि के टेंडर भी औसत तीस प्रतिशत कम दराें पर उठे थे। यह सभी काम 31 दिसंबर तक पूरे करने हैं। इनमें से कुछ काम अब तक शुरू नहीं हाे सके। ऐसे में मंत्री काे अाशंका थी कि इतनी कम दराें पर ठेके उठे, अब तक काम शुरू नहीं हुए। ठेकेदार इन कामाें काे करेगा भी या नहीं। यदि करता है ताे इतनी कम दराें पर क्वालिटी कैसे मेंटेन करेगा। बैठक में उपस्थित
विभागीय अधिकारी काेई संताेषप्रद जवाब नहीं दे सके। मंत्री ताे बैठक के बाद चले गए, लेकिन यह सवाल अनुत्तरित रह गया। अधिकारी यह नहीं समझ पा रहे हैं कि बीएसआर दर तय करने वाले इंजीनियर फेल हैं या ठेकेदार फेल हाेगा। बीएसआर दर तय करने के लिए लंबी चाैड़ी विभागीय प्रक्रिया है। इसके बाद इंजीनियर काम की दर तय करते हैं। इंजीनियर जाे बीएसआर दर तय कर रहें। दूसरी ओर ठेकेदार इन इंजीनियराें की याेग्यता पर ही सवाल करते हुए उससे औसत 40 प्रतिशत कम दराें पर यह काम पूरा कर रहे हैं। एेसा कैसे संभव हाे रहा है।
कच्चे काम मानव श्रम के बजाय मशीनाें से हाेंगे : इतनी कम दराें पर टेंडर छूटने के पीछे मूल कारण यह रहा कि मानव श्रम व मशीनाें से हाेने वाले कार्य की बीएसअार दरें अलग-अलग हैं। मानव श्रम से कार्य की बीएसअार दरें अधिक हैं। मेड़बंदी, छाेटे चेक डेम जाे मानव श्रम के जरिए हाेते थे, वे काम अब मशीन से हाेंगे। मानव श्रम से इन कामाें की लागत अधिक आती थी। समय भी ज्यादा लगता था। मशीनाें से काम कम समय में कम लागत से पूरा हाे जाएगा। वर्तमान में ग्रामीण इलाकाें में महानरेगा जैसी याेजनाओं में भी राेजगार की मांग कम है। ऐसे में यह काम मशीनाें से आसानी से पूरा हाे जाएगा।
ठेकेदारों की मशीनें फ्री खड़ी है इसलिए कम में लिए टेंडर
अब जिला परिषद सीईओ सहित अन्य बड़े अधिकारी इस पर मंथन कर रहे हैं। विभाग के अधीक्षण अभियंता से इस बारे में जानकारी मांगी गई ताे उनका कहना था कि पहली बार ऑनलाइन टेंडर हुअा था। एेसे में बाहुबलियाें की चली नहीं। पहले स्थानीय स्तर के ठेकेदार ही निविदा में भाग लेते थे। ऑनलाइन हाेने से पूरे राजस्थान के बड़े ठेकेदार भी भाग ले रहे थे। जिस ठेकेदार ने टेंडर लिया वह डबल ए क्लास कांट्रेक्टर है। उसकी स्वयं के सभी संसाधन है। विभाग ने पांच
प्रतिशत धराेहर राशि के साथ ही बीएसअार दर व उसे आवंटित दर के बीच की डिफरेंस राशि की सिक्युरिटी रख ली है, ताकि ठेकेदार पर अंकुश रहे। बीच में काम छाेड़ कर नहीं जाए व क्वालिटी वर्क दे। अधिकारियाें का एक तर्क यह भी है कि काेविड के दाैर में कई बड़े ठेकेदारों की मशीनरियां फ्री खड़ी है। काम है नहीं और उन्हें लाेन पर ली गई इन मशीनाें की किश्तें चुकानी है। एेसे में अाॅनलाइन टेंडर हाेने से कंपीटीशन बढ़ गया। यहां से जाे भी पैसा िमलेगा, उससे किश्तें चुक सकेगी। इस साेच से उन्हाेंने काफी कम दराें पर टेंडर उठाए हैं।
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