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एमसीएच प्रभारी ने शिकायती पत्र भेजा तो कर्मचारी बोला : आत्महत्या कर लूंगा, कर्मचारी का दावा कोरोना ड्यूटी के दौरान 7 माह में 1 भी अवकाश नहीं लिया, इस समर्पण का ऐसा प्रतिफल क्यों

सात माह से कोरोना काल में बिना अवकाश लिए ड्यूटी रहे एक कर्मचारी पर चिकित्सा विभाग ने कार्रवाई के लिए लिखा है। यह पत्र एमसीएच विंग प्रभारी की शिकायत के बाद आया है। एमसीएच विंग के प्रभारी ने कनिष्ठ सहायक ईश्वरसिंह के खिलाफ काम पर नहीं आने को लेकर शिकायत दी थी। यह शिकायत अगस्त के शुरूआती सप्ताह में दी गई थी। 13 अगस्त के आस पास नोटिस मिला।

इसके बाद परेशान होकर कर्मचारी ने पीएमओ डॉ. शंकरलाल को एमसीएच प्रभारी द्वारा परेशान करने की शिकायत की तो प्रभारी ने पीएमओ को पत्र लिखा और ईश्वरसिंह के कार्यदिवस की जानकारी देने की बात कही गई। इससे पहले करीब पांच दिन पहले कर्मचारी ने पीएमओ को पत्र लिखा और बताया कि उसे परेशान किया जा रहा है और वह आत्महत्या करना चाहता है। इस पत्र की एक प्रति कलेक्टर और सीएमएचओ को भी भेजी गई है।

खास बात यह है कि वरिष्ठों के बीच का विवाद अस्पताल पर भारी पड़ता दिख रहा है। कर्मचारी को परेशान करने के मामले को लेकर जेएलएन अस्पताल के पीएमओ डॉ. शंकरलाल का कहना है कि उच्च अधिकारियों से पत्र मिला है। लेकिन यह अस्पताल का मामला है। पत्र को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है। इधर, शिकायत को लेकर जब एमसीएच विंग के प्रभारी से संपर्क किया गया तो उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनका फोन लगातार व्यस्त रहा।

कर्मचारी का दावा : कोरोना ड्यूटी के दौरान 7 माह में 1 भी अवकाश नहीं लिया, इस समर्पण का ऐसा प्रतिफल क्यों

अगस्त में जब शिकायत की गई थी तो इसके बाद संयुक्त निदेशक ने पीएमओ को शिकायत दी थी। जिसमें काम नहीं करने की शिकायत की गई थी। इसके बाद संयुक्त निदेशक ने पीएमओ को लिखे पत्र में बताया कि कनिष्ठ सहायक को काम करने के लिए दो बार पाबंद किए जाने के बाद भी 11 अगस्त तक काम शुरू नहीं किया गया है। जिसमें कार्मिक को तीन दिन काम करने के लिए पाबंद किया गया था।

पत्र मेें यह भी लिखा गया था कि सरकार द्वारा निर्धारित नवीनतम प्रपत्र में आरोप पत्र तैयार कर भेजा जाए। इसके बाद पीएमओ ने नौ सितंबर को जवाब में बताया कि कर्मचारी को कोरोना रिपोर्टिंग के लिए लगाया गया है। कर्मचारी का कहना है कि इसके बाद मामला समझाइश के स्तर पर आ गया और उसने खुद प्रभारी के पास जाकर शिकायत करने का कारण पूछा तो कोई जवाब नहीं मिला।
कर्मचारी ने पांच दिन पहले आत्महत्या की जताई मंशा
करीब 23 सितंबर को कर्मचारी ने पीएमओ को पत्र लिखा जिसमें प्रभारी अधिकारी द्वारा परेशान करने की बात बताई गई। पत्र में बताया गया है कि वह पीएमओ के आदेश से ही आरटीपीसीआर लेब में पेंडिंग फॉर्म का कार्य करता है। सात माह से एक भी दिन अवकाश नहीं लिया है। इस पर प्रभारी बार बार परेशान कर रहे है। घर भी दो से तीन घंटे के लिए ही जाना होता है। लेकिन गलत शिकायत कर संयुक्त निदेशक से उसके खिलाफ 17 सीसीए की कार्यवाही के लिए लिखा गया।

पत्र में एमसीएच से कार्य से मुक्त कर हटाने के लिए कहा गया। कर्मचारी ने कहा कि विंग से नहीं हटाया गया तो परेशान होकर आत्महत्या ही रास्ता बचेगा। इसी दिन प्रभारी ने पीएमओ को पत्र लिखा और ड्यूटी के दिनों की जानकारी मांगी गई। इस पत्र में अन्य कर्मचारी को लगाने की बात भी लिखी गई है। इसके बाद अन्य कर्मियों की व्यवस्था किए जाने की सूचना है। मामला कई दिनों से जेएलएन अस्पताल में चर्चा में चल रहा है।



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जेएलएन अस्पताल, जहां चल रहा है विवाद।


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