सिर्फ स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस पर खुलते हैं 7 सरकारी स्कूल, 9 शिक्षक घर बैठे ले रहे वेतन
अंकित द्विवेदी/राजेश सोनी | हर साल 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है। इस दौरान साक्षरता दर बढ़ाने और लोगों को शिक्षित करने के लिए तमाम घोषणाएं और योजनाएं बनाई जाती हैं, जबकि हकीकत यह है कि बच्चों के साक्षर बनाने की पहली पाठशाला ही अंधकार में डूबी हुई है।
हालांकि कोराना काल में स्कूल बंद हैं, शिक्षक आ रहे हैं, लेकिन अभी से लेकर पिछले कई साल से यहां पदस्थ शिक्षक 26 जनवरी और 15 अगस्त को छोड़कर कभी भी स्कूल पढ़ाने नहीं आते हैं। सरगुजा, सूरजपुर और बलरामपुर जिले के कई सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां पढ़ाने की जिम्मेदारी निभाने वाले शिक्षक ही योग्य नहीं है। वहीं कई स्कूल ऐसे हैं, जहां सिर्फ पढ़ाई के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। हम बात कर रहे हैं सूरजपुर के दूरस्थ क्षेत्र ओड़गी ब्लॉक में आदिवासी क्षेत्रों में बनाए गए स्कूलों की। यहां के 7 स्कूलों की भास्कर टीम ने हकीकत परखी। इन स्कूलों में कुल 166 विद्यार्थियों के लिए 9 शिक्षकों की भी तैनाती है। आलम यह है कि यह स्कूल सिर्फ स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर ही खुलते हैं। शिक्षकों और अफसरों की लापरवाही का आलम यह है कि यहां विद्यार्थियों को न तो मध्याह्न भोजन मिलता है और न ही शिक्षा मिलती है। वहीं कई जगहों पर विद्यालय के भवन ही खंडहर हो चुके हैं या बने ही नहीं हैं। शासन-प्रशासन की ओर से सबको शिक्षा और शिक्षित समाज को लेकर बड़ी-बड़ी बातें और दावे किए जाते हैं। इसकी पोल तब खुली, जब दैनिक भास्कर टीम ने सूरजपुर जिले के ओड़गी ब्लॉक स्थित चांदनी-बिहारपुर क्षेत्र के स्कूलों की पड़ताल की। यहां पता चला कि कई जगहों पर स्कूल महीनों बंद रहते हैं तो कई स्कूल 15 अगस्त के बाद से खुले ही नहीं हैं।
कालापानी का स्कूल अंतिम बार कब खुला था, ग्रामीणों को भी पता नहीं: एक स्कूल जिसका निर्माण 2010 में हुआ था उसकी छत भी गायब हो गई है। हम बात कर रहे हैं बिहारपुर क्षेत्र में कालापानी के नाम से मशहूर लुल्ह, भुंडा, बैजनपाठ और तेलईपारा स्थित शासकीय प्राथमिक व माध्यमिक शाला की। यहां पर बच्चों का स्कूल में पंजीकरण तो हुआ है, लेकिन स्कूल कहां लगता है इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि अंतिम बार स्कूल कब खुला था, इसकी जानकारी नहीं है। अधिकारियों के पास शिकायत भी की, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
1. लुल्ह प्राइमरी स्कूल: खोहिर पंचायत के लुल्ह गांव स्थित प्राथमिक शाला
गांव में प्राथमिक शाला संचालित है, लेकिन यहां भवन नहीं बना है। यहां पर कक्षा एक से 5 तक 24 विद्यार्थियों का नाम दर्ज है और दो शिक्षकों की तैनाती है। भवन नहीं होने के कारण आंगनबाड़ी के भवन में विद्यालय संचालन की जिम्मेदारी शिक्षकों को दी गई है। दैनिक भास्कर की टीम 2 मार्च की सुबह 12 बजे विद्यालय पहुंची तो यहां ताला लगा हुआ था। मौके पर पूर्व सरपंच तेजवलि ने बताया कि 15 अगस्त को झंडा फहराने के लिए शिक्षक आए थे। उसके बाद से अब तक कोई नहीं आया।
2. भुंडा गांव प्राइमरी-मिडिल: खोहिर के भुंडा गांव स्थित प्राथमिक व माध्यमिक शाला
यहां एक प्राथमिक शाला और एक माध्यमिक शाला स्कूल कागजों में संचालित हो रहे हैं। प्राथमिक शाला में 21 विद्यार्थी और 1 शिक्षक हैं। वहीं माध्यमिक शाला में 13 विद्यार्थी व 1 शिक्षक पदस्थ हैं। भास्कर की टीम लगभग डेढ़ बजे यहां पहुंची। यहां बने एक भवन की छत गायब हो चुकी है और पूरे परिसर में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हुई हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां 2010 में यह भवन बनाया गया है, जबकि दूसरे भवन के लिए सिर्फ नींव खोदकर छोड़ दी गई है।
3. बैजनपाठ प्राइमरी स्कूल: खोहिर ग्राम पंचायत के बैजनपाठ का प्राथमिक शाला
गांव में प्राथमिक स्कूल के लिए भवन नहीं है। गांव निवासी राममनोहर सिंह के घर में विद्यालय का संचालन किया जा रहा है। भास्कर टीम यहां 3 बजे पहुंची। एक कमरे में स्कूल संचालित होने की बात बताई गई, लेकिन कमरे में म्यूजिक सिस्टम और फसल रखी हुई थी। स्कूल में 53 विद्यार्थियों का नाम और एक शिक्षक हैं। राममनोहर सिंह ने बताया कि 6 साल पहले यहां स्कूल चलाने के लिए शिक्षक ने बात की थी, तब से यहीं है। यहां भी यदा-कदा ही शिक्षक आते हैं और उसी दिन सिर्फ मध्याह्न भोजन बनाया जाता है।
सीधी बात
डाॅ. प्रेमसाय टेकाम, शिक्षा मंत्री
सवाल - सूरजपुर जिले के ओड़गी तहसील के कई स्कूलों में शिक्षक नहीं पहुंचते हैं। सिर्फ 15 अगस्त और 26 जनवरी को ही खुलते हैं। इस बारे में आप क्या कहेंगे?
- इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। आप विद्यालयों के नाम बताइए, दिखवाते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है।
सवाल - स्कूलों के बच्चों को शिक्षा के साथ ड्रेस, मध्याह्न भोजन आदि भी नहीं मिल रहा है। इसके अलावा वहां पर भवन भी जर्जर हो गए हैं, जबकि भुंडा गांव में एक स्कूल का तो भवन ही नहीं बना है?
- इस संबंध में मेरे पास कोई सूचना नहीं है। मामले का पता करवाते हैं।
सवाल - ग्रामीणों ने एक साल पहले कलेक्टर को ज्ञापन देकर स्कूल नहीं खुलने की हकीकत बताई थी। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। शिक्षकों काे स्कूल न पहुंचने के बाद भी वेतन दिया जा रहा है?
- शिकायत की कॉपी मेरे पास नहीं है। आप मुझे भेजिए, फिर देखते हैं कि कहां समस्या आ रही है।
स्कूलों को यह हाल तो कैसे बढ़ रही साक्षरता दर
सरगुजा जिले में साक्षरता दर 2011 में 61 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 67 प्रतिशत से अधिक हो गई है, जबकि सूरजपुर जिले में साक्षरता की दर 2011 में 60 प्रतिशत थी, जो अब 87 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। सवाल उठता है कि जब सरकारी स्कूलों का यह हाल है तो साक्षरता दर में कैसे इतनी तेजी से सुधार हो रहा है। क्या सिर्फ कागजों में ही साक्षरता दर को दुरस्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं इन क्षेत्रों में वर्तमान में चलाए जा रहे ऑनलाइन पोर्टल का भी लाभ नहीं पहुंच रहा है।
स्कूल खुलते ही सौ फीसदी उपस्थिति होगी: कलेक्टर
कलेक्टर रणबीर शर्मा ने बताया कोरोना के कारण सभी स्कूल बंद हैं। शासन का आदेश होने के बाद जब स्कूल शुरू होंगे, तब शत-प्रतिशत बच्चों और शिक्षकों की उपस्थिति कराएंगे। वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह ने बताया कि पहुंचविहीन क्षेत्र में शिक्षा नहीं मिलने की जानकारी मिली है। अधिकारियों से बात कर वहां के लिए मास्टर प्लान बनाएंगे और खुद भी वहां जाकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगी।
जांच के बाद दोषियों पर होगी कार्रवाई: डीईओ
जिला शिक्षा अधिकारी विनोद राय ने बताया कि मामले में कोई जानकारी नहीं है। यदि शिक्षक स्कूल नहीं जा रहे हैं तो सतत निगरानी करते हुए आगामी सत्र में बेहतर ढंग से स्कूलों का संचालन कराया जाएगा। इसके अलावा यदि कहीं स्कूल भवन नहीं बना है तो सर्व शिक्षा विभाग से जानकारी लेकर कमियों को दूर किया जाएगा। गांवों में टीम भेजकर पूरे मामले की जांच की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।
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