अंग्रेजी स्कूल का ये कैसा सिस्टम, नए पर विभाग मेहरबान और पुराने पर नहीं दे रहा ध्यान
शिक्षा में गुणवत्ता के लिए सरगुजा जिले में अंग्रेजी माध्यम वाले सरकारी स्कूलों में भी दो तरह की नीतियां अपनाई जा रही हैं। अभी कुछ महीने पहले ही सीजी बोर्ड के अंग्रेजी माध्यम के दो स्कूलों की शुरुआत की गई।
इसी से करीब 3 साल पहले हर ब्लाॅक में सीबीएसई पाठ्यक्रम के अंग्रेजी माध्यम वाले एक-एक प्राइमरी और मिडिल स्कूल शुरू किए गए थे। भास्कर ने दोनों स्कूलों की सुविधा सहित इनके लिए किए जा रहे काम की पड़ताल की तो सिस्टम का नजरिया ही अलग-अलग नजर आया। पुराने अंग्रेजी माध्यम वाले स्कूलों की कोई पूछपरख नहीं है और यहां किसी भी क्लास में 10 से 25 छात्र ही हैं। यानी 4 साल में इन स्कूलों में कुल छात्रों की संख्या 1005 ही पहुंच पाई। आज की स्थिति में इन स्कूलों में करीब ढाई हजार से अधिक छात्र होने चाहिए थे। हिंदी माध्यम के 30 शिक्षकों से किसी तरह काम चल रह है। दूसरी तरफ इसी साल से शुरू हुए सीजी बोर्ड वाले दोनों अंग्रेजी माध्यम वाले स्कूल हैं। यहां इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर शिक्षकों की भर्ती के लिए पूरा तंत्र लग गया है। नतीजा सामने आया और महीनेभर में ही ये स्कूल चकाचक हो गए और एडमिशन के लिए मारामारी मच गई। कक्षा 10वीं और बारहवीं को छोड़कर सभी कक्षा की 40-40 सीटें भर गईं। सीजी बोर्ड के अंग्रेजी माध्यम वाले स्कूलों में कुल 700 छात्र यहां हो गए हैं। यहां सबकुछ एडवांस सिस्टम में चल रहा है।
3 साल में कुछ नहीं बदला, सीटें फुल नहीं होती, ऑनलाइन पढ़ाई भी नहीं हो रही
शहर के नमनाकला स्थिति सीबीएसई अंग्रेजी माध्यम का प्राइमरी स्कूल है। पुराने प्राइमरी स्कूल में ही इसे 2016 में शुरू किया और तीसरी कक्षा के तक की पढ़ाई होती है। क्योंकि ये स्कूल पहली कक्षा से शुरू हुए थे। 3 साल बाद भी स्कूल में कुछ नहीं बदला है। सेटअप अनुसार 3 शिक्षक होने चाहिए, लेकिन 2 की ही पोस्टिंग है। पहली से तीसरी कक्षा तक सिर्फ 31 छात्र हैं। भवन देखकर नहीं लगता है कि यह अंग्रेजी माध्यम का स्कूल है। सीतापुर, उदयपुर सहित अन्य ब्लाॅक के प्राइमरी स्कूलाें की भी यही स्थिति है।
महीनेभर में पूरी व्यवस्था बदली, निचली कक्षाओं की सीटें फुट, ऑनलाइन टेस्ट भी
सीजी बोर्ड अंग्रेजी माध्यम का एक स्कूल अंबिकापुर में गद्दी रोड इलाके में जबकि दूसरा सीतापुर ब्लाॅक के देवगढ़ में शुरू हुआ है। दोनों स्कूलों के लिए भवन अस्थाई है। इनके लिए पुराने हायर सेकंडरी स्कूल का भवन अधिग्रहित किया गया है। दो महीने के भीतर ही यहां की पूरी व्यवस्था बदल गई है। दोनों स्कूलों के लिए शिक्षकों की भर्ती के लिए प्रक्रिया चल रही और 15 सितंबर तक भर्ती भी हो जाएगी। अस्थाई रूप से सभी विषय के शिक्षकों की व्यवस्था कराकर कोरोनाकाल में यहां पढ़ाई भी शुरू हो गई। ऑनलाइन टेस्ट भी हो रहा है।
पुराने मॉडल स्कूलों से सीख सकते हैं
सरकार द्वारा हर ब्लाॅक में सीबीएसई पाठ्यक्रम के एक-एक अंग्रेजी माध्यम वाले स्कूल खोले गए थे। इसके लिए भवन से लेकर अन्य संसाधन भी दिए गए, लेकिन अनदेखी से करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी ये भविष्य के मॉडल नहीं बन पाए।
सीधी बात
आईपी गुप्ता, डीईओ सरगुजा
सवाल - पुराने अंग्रेजी माध्यम वाले स्कूलों की सुविधा बढ़ाने काम क्यों नहीं हो रहा?
- पुराने अंग्रेजी माध्यम वाले स्कूलों के बारे में ज्यादा नहीं बता पाऊंगा। यहां शासन से अंग्रेजी माध्यम के शिक्षक नियुक्त नहीं किए गए व हिंदी माध्यम के शिक्षकों से काम चला रहे हैं। इससे शुरू से व्यवस्था नहीं बन पाई।
सवाल - पुराने वाले अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की सुविधाओं पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा?
- नए स्कूलों के लिए अलग से बजट नहीं है। शासन के आदेश के अनुसार इन स्कूलों में व्यवस्था प्रशासन स्तर पर करा रहे हैं। शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। पुराने अंग्रेजी माध्यम के लिए कोई अलग से बजट नहीं आता है। मैं अपने स्तर पर इसके लिए प्रयास करुंगा।
सवाल - ऐसी सोच से तो कुछ साल बाद नए स्कूलों की स्थिति खराब हो सकती है।
- इसके बारे में मैं ज्यादा नहीं बता पाऊंगा। नए स्कूलों को एक मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है। कुछ और शुरू करने हैं। पुराने अंग्रेजी माध्यम वाले स्कूल के लिए जो शासन से आदेश आएगा, वैसा करेंगे।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/35erLOt
via IFTTT
No comments