बच्चों को स्कूल तक लाने सीखी गोंडी अपने पैसों से बनवाया स्कूल-शौचालय
अंबु शर्मा | 3 जिलों के बॉर्डर पर पहाड़ियों के बीच बसा धुरनक्सलगढ़ गांव गड़दा, यहां तक पहुंचने के लिए सड़क तक नहीं है, लेकिन शिक्षा का बेहतर माहौल जरूर है। ऐसा तब हुआ जब यहां के स्कूल में पदस्थ इकलौते शिक्षक हेमलाल ठाकुर ने बच्चों को पढ़ाने पूरी ताकत झोंक दी।
जब यहां की प्राथमिक शाला में उनकी पोस्टिंग हुई तो पहले तो बच्चों को स्कूल तक लाने घर-घर घूमें, लोगों ने भला बुरा भी कहा। लेकिन हार नहीं मानी। मूलतः गरियाबंद जिले के रहने वाले इस शिक्षक ने ग्रामीणों से नजदीकियां बढ़ाने की तरकीब निकालने के लिए स्थानीय बोली गोंडी का सहारा लिया। गोंडी सीखी, ग्रामीणों से नजदीकियां बढ़ाई और बच्चों को स्कूल में लाकर पढ़ाने का काम शुरू किया। बदलाव ऐसा हुआ कि यहां स्कूल की दर्ज संख्या अभी 21 है। कोरोना के बीच पढ़ाई न छूटे इसलिए मोहल्ला क्लास भी ले रहे हैं। भास्कर से चर्चा में हेमलाल ने बताया ये सब करना भी आसान नहीं था। लेकिन जिद थी कि गांव के बच्चों को पढ़ाई से जोड़ना है।
धूप-बारिश के कारण पहले नहीं आते थे बच्चे
इस गांव में स्कूल का अपना भवन नहीं है। स्कूल का संचालन बांस की बाड़ी के घेरे के बीच हो रहा था। धूप और बारिश में बच्चों को स्कूल भेजने से ग्रामीण इंकार करते थे। मांग के बाद भी भवन नहीं बना तो शिक्षक हेमलाल ने शाला अनुदान के 10 हजार और खुद के 30 हजार रुपए लगाकर सालभर पहले पक्का कमरा बनवाया। अब इसी कमरे में कक्षा लगती है। यहां छात्राओं के लिए शौचालय भी बनवाया। बदले माहौल से परिजन खुश होकर बच्चों को भेजने लगे। हेमलाल स्कूल के इकलौते शिक्षक हैं। संकुल समन्वयक दीपक शास्त्री ने बताया कि हेमलाल ने खुद के पैसे खर्च कर स्कूल के लिए कमरा बनाया है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/333w1xA
via IFTTT
No comments