‘जावंगा’ के बच्चे चरा रहे गाय, नदी पार लग रहीं मोहल्ला क्लासेस
बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने के लिए दंतेवाड़ा में ‘पढ़ई तुंहर दुआर’ के तहत तमाम प्रयास हो रहे हैं। ऑनलाइन क्लासेस चल रही हैं, कहीं ज्ञान गंगा तो कहीं मोहल्ला क्लास के जरिए बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही है। पूरा अमला इसके लिए जरूर जुटा हुआ है, लेकिन इन प्रयासों के बीच अब भी कई गांवों के बच्चे 6 महीने बाद भी पढ़ाई से नहीं जुड़ पाए हैं। कोरोनाकाल के बीच दंतेवाड़ा के दो अलग-अलग गांवों के स्कूली बच्चों की ये दो तस्वीरें।
जावंगा एजुटकेशन सिटी में मार्च के बाद पढ़ाई बंद
गायें चराते हुए बच्चे की ये तस्वीर जावंगा एजुकेशन सिटी की है। ये बच्चे शिक्षा की नगरी कहे जाने वाले जावंगा गांव के ही रहने वाले हैं। गीदम ब्लॉक मुख्यालय से इस गांव की दूरी महज़ 2 किमी है। इस गांव में नेटवर्क है, दूरी भी बेहद कम है, तब भी बच्चों ने बताया न मोहल्ला क्लास चल रही न ऑनलाइन क्लास और न ही पढ़ाई कर रहे हैं।
नदी पार पाहुरनार में नेटवर्क तक नहीं, यहां लग रही मोहल्ला क्लास

बच्चों के मोहल्ला क्लास लेती ये तस्वीर गीदम ब्लॉक के ही धुर नक्सलगढ़ इंद्रावती नदी पार बसे गांव पाहुरनार की है। यहां तक पहुंचने जोखिम है, गांव में नेटवर्क तक नहीं है। बच्चों की पढ़ाई जारी रहे इसलिए इलाके में शिक्षक पहुंच मोहल्ला क्लास ले रहे हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई का नुकसान नहीं हो रहा है।
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