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आरआई-पीसी से पिछड़ गए इंस्पेक्टर; मामले में भी विवाद उभर रहा

आईपीएस के पद पर प्रमोशन ही नहीं, बल्कि इंस्पेक्टर से डीएसपी के पद पर प्रमोशन के मामले में भी विवाद उभर रहा है। सब इंस्पेक्टर, सूबेदार (आरआई) और प्लाटून कमांडर (टीसी) कैडर को समान माना जाता है, लेकिन आरआई या कंपनी कमांडर से प्रमोशन जल्दी प्रमोशन मिल जाता है, जबकि इंस्पेक्टर को डीएसपी बनने के लिए कम मौका दिया जा रहा है। यही वजह है कि कई इंस्पेक्टर ऐसे हैं, जिन्हें 30 साल हो गया और अब तक डीएसपी नहीं बने हैं, जबकि उनके साथ के आरआई या कंपनी कमांडर एडिशनल एसपी रैंक तक पहुंच गए हैं।

में 1987 की सीधी भर्ती में चयनित सब इंस्पेक्टर अभी तक डीएसपी प्रमोट नहीं हो पाए हैं। इसके विपरीत 2004 के प्लाटून कमांडर 2017 में डीएसपी बन गए हैं। सब इंस्पेक्टर से कम नंबर पाने वालों का चयन प्लाटून कमांडर के रूप में होता है।

प्रदेश में आरआई के लिए 41 पद हैं। इसके विरुद्ध डीएसपी प्रमोशन का कोटा 19 है। इसी तरह इंस्पेक्टर के 655 पदों में से 119 और कंपनी कमांडर के 270 में 85 लोगों का कोटा है। यानी आरआई से डीएसपी बनने के लिए जहां दो लोगों में प्रतिस्पर्धा है, वहीं 6 इंस्पेक्टर में एक को यह मौका मिलता है।

60 पदों के लिए 180 इंस्पेक्टर दौड़ में

इंस्पेक्टर से डीएसपी के 60 पदों पर प्रमोशन की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया में 180 इंस्पेक्टर दौड़ में हैं, जबकि इससे ज्यादा इंस्पेक्टरों ने दस साल की सर्विस पूरी कर ली है। इससे पहले मध्यप्रदेश में एसआई कैडर के साथ असमानता का मामला सामने आने के बाद सरकार ने दो साल डीएसपी के पद पर सीधी भर्ती नहीं की और इंस्पेक्टरों को प्रमोट किया था। यहां के इंस्पेक्टर भी इसी तरह पर प्रमोशन की मांग कर रहे हैं। उनका यह भी तर्क है कि इस साल पीएससी से सीधी भर्ती नहीं हो रही, इसलिए ऐसा किया जा सकता है।

तबादले के बाद भी जो जमे उन्हें करें सस्पेंड: डीजी

डीजीपी डीएम अवस्थी ने सभी एसपी और कमांडेंट को सख्त लहजे में निर्देश दिए हैं कि तबादले के बाद भी जिन लोगों ने निर्धारित समय पर ज्वाइन नहीं किया है, उन्हें सस्पेंड करें और चार्जशीट दें। डीजीपी ने एडीजी प्रशासन हिमांशु गुप्ता से ऐसे लोगों की लिस्ट मांगी है। वे सोमवार को इन मामलों का रिव्यू करेंगे। जहां एसपी या कमांडेंट के कारण रिलीव नहीं किया गया है, वहां संबंधित यूनिट के प्रभारी पर कार्रवाई की जाएगी।

डीजीपी अवस्थी ने सभी एसपी को निर्देश दिए हैं कि शासन और पुलिस मुख्यालय द्वारा जिन पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले किए गए हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाए। सभी रेंज आईजी को भी निर्देश दिया गया है कि वे स्वयं स्थानांतरण आदेशों को पालन कराना सुनिश्चित करें। यदि स्थानांतरण के बाद भी अधिकारी को रिलीव नहीं किया जाता है तो यूनिट के प्रमुख को जिम्मेदार माना जाएगा। डीजीपी ने कहा है कि तबादले के बाद भी रिलीव ना करना बहुत ही गंभीर अनुशासनहीनता है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



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फाइल फोटो


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