मवेशियों के लिए बनी साढ़े 16 लाख की पाॅली क्लीनिक, अब तक नहीं हुई शुरू
मवेशियों के इलाज को लेकर पाली क्लीनिक खुलने वाला था, लेकिन आज तक पशुओं के इलाज के लिए शहर में पाली क्लीनिक नहीं खुल पाया है। पाली क्लीनिक के नाम से 16 लाख की लागत से भवन जरूर बन गया है। इसमें पशु चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएं उपसंचालक कार्यालय के अन्य सामान रखे जा रहे हैं।
पशुओं के इलाज के लिए पाली क्लीनिक की स्वीकृति हुई थी। इसके लिए चिकित्सा स्टाफ और अन्य संसाधन के पहुंचने से पहले ही भवन बनकर तैयार हो गया। भवन सात वर्ष हो गए है, लेकिन उसके बाद न तो कोई चिकित्सा स्टाफ भेजा गया और न ही चिकित्सा संसाधन भेजे गए। इस संबंध में कोई स्वीकृति पोस्ट नहीं आया है। पाली क्लीनिक में एक्स-रे मशीन के साथ अन्य चिकित्सा संसाधन रहते, लेकिन अभी तक कोई मशीन नहीं पहुंचा है और न ही डाक्टर के साथ अन्य कोई चिकित्सा संसाधन भेजे गए हैं।
क्लीनिक शुरू हो जाता तो बेहतर ढंग से इलाज होता: कांकेर पशु चिकित्सा सेवाएं के उपसंचालक डॉ. एलपी सिंह ने कहा पाली क्लीनिक शुरू हो जाता, तो यहां पर पशुओं का बेहतर ढग़ से इलाज हो पाता। आपरेशन भी बेहतर ढंग से संभव होता, लेकिन चिकित्सा स्टाफ और अन्य संसाधन नहीं भेजे गए है। स्वीकृत पोस्ट भी नहीं भेजा गया है। अभी कार्यालय खाली न रहे। इस कारण अन्य दूसरे काम में उपयोग लिया जा रहा है।
अब उपसंचालक कार्यालय का सामान रख रहे
परिसर में पाली क्लीनिक के भवन के लिए सत्र 2010-11 में राष्ट्रीय कृषि योजना के मद से साढ़े 16 लाख की स्वीकृति हुई थी। पाली क्लीनिक का भवन सत्र 2013-14 में बनकर तैयार हो गया। अभी पाली क्लीनिक के भवन में उप संचालक कार्यालय का अन्य दूसरे सामान रखे जा रहे हैं।
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