बेल देवी को दशहरा का निमंत्रण देने आज जाएंगे पुजारी, कल होगा बेल पूजा विधान
बस्तर दशहरा में बेलपूजा का विशेष महत्व है। प्रतिवर्ष राज परिवार के सदस्य अश्विन शुक्लप़क्ष की सप्तमी के दिन सरगीपाल से जोड़ा बेल लेकर आते हैं। इसके पहले शाम को फूलरथ परिक्रमा के बाद मां दंतेश्वरी के छत्र का फूल लेकर मंदिर के पुजारी रात करीब 9 बजे राजपरिवार के सदस्यों और राजगुरू की मौजूदगी में जूनापारा सरगीपाल जाएंगे और बेल के वृक्ष में जोड़ा बेल चुनकर उसमें नारियल और लाल कपड़ा बांध तथा देवी के छत्र को माला पहना कर दशहरा में आने का न्योता बेलमती देवी को देंगे।
बताया गया कि वर्षों पहले दो देवियां इसी बेलवृक्ष पर बस्तर राजा के सामने ही विलीन हो गई थीं, तब से इनके प्रतीक स्वरूप जोड़ा बेल दशहरा उत्सव में लाया जाता है। इधर शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे राजपरिवार के सदस्य सरगीपाल में बस्तर दशहरा में शामिल इस विधान को पूरा करेंगे।
परंपरा के अनुसार ग्रामीण राजपरिवार का स्वागत करेंगे। राजपरिवार के सदस्य इस साल कोरोना संक्रमण के चलते कुछ लोगों की मौजूदगी में यहां पहुंचेंगे। इस दौरान उनके साथ बस्तर दशहरा समिति और टेंपल कमेटी के सदस्यों के साथ ही राजपरिवार के लोग शामिल रहेंगे। दंतेश्वरी मंदिर के पुजारियों ने बताया कि यह विधान शक्ति पूजा के तहत किया जाता है। जिसके चलते राजपरिवार के सदस्य इस विधान को रात में ही करते हैं।
बेल की पूजा दुर्गा और महालक्ष्मी के रूप में होती है
दंतेश्वरी मंदिर के पुजारी उदयचंद्र पाणीग्राही ने बताया कि बेलजात्रा पूजा विधान में जोड़ा बेल की पूजा यहां मां दुर्गा और महालक्ष्मी के रूप में होती है। पूजा के बाद उन्हे ससम्मान दशहरा उत्सव में शामिल करने जगदलपुर लाया जाता है। बेलवृक्ष की पूजा राज परिवार के सदस्य कमलचंद्र भंजदेव करेगे। इस मौके पर राजगुरू , पुजारी और अन्य लोग मौजूद रहेंगे। पूजा के बाद बाकायदा पेड़ से जोड़ा बेल तोड़ कर दंतेश्वरी मंदिर लाया जाएगा। इस रस्म को ग्रामीण बेटी बिदाई की तरह मनाते हैं। जिसमें वे जमकर हल्दी खेलते हैं।
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