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रेस्टोरेंट, मिठाई दुकानें और शराब दुकानें भी खुलीं, कई आयोजनों तक में भी छूट पर भंडारे पर रोक से नाराजगी

प्रदेश में सभी बाजार खुल चुके हैं। अधिकांश धर्मस्थल भी खुल गए हैं। बस, ट्रेन यातायात सब लगभग सामान्य होने जा रहे हैं। प्रदर्शन, राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन भी जारी हैं। सब्जी बाजार, मिठाई दुकानें, रेस्टोरेंट, शराब दुकानें भी खुली हैं। ऐसे में नवरात्रि के भोग, भंडारे पर पूरी तरह पाबंदी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। भंडारा वितरकों, सामाजिक संगठनों और संस्थाओं का कहना है कि भले ही बड़े पैमाने पर होने वाले भंडारे की अनुमति न दी जाए, लेकिन कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सीमित संख्या रखते हुए अनुमति दी जानी चाहिए। जिस तरह से अन्य आयोजनों में संख्या सीमित की गई है, उसी आधार पर कोविड गाइडलाइन तय कर भंडारे की अनुमति भी दी जा सकती है। अन्य आयोजनों की तर्ज पर इसमें भी आने वाले लोगों के द्वारा नियमों का पालन किया जाएगा।

भोग के साथ लोगों की आस्था भी जुड़ी, बांटने की अनुमति मिले
रायपुर में काली मंदिर के सचिव डीके दुबे और बिलासपुर में बंगाली समाज के पुजारी धनंजय भट्‌टाचार्य ने बताया कि समाज में दुर्गा पूजा का विशेष महत्व है। सप्तमी, अष्टमी और नवमी को मां काे भोग लगाने के बाद प्रसाद वितरण और भंडारा होता है। गाइडलाइन में भोग न बांटने का जो नियम दिया है वह पूरी तरह से गलत है, प्रसाद बांटने की छूट मिलनी चाहिए। कोरोना के नियम पालन की जिम्मेदारी समितियों पर छोड़नी चाहिए।

शराब दुकानों में कौन सी एंट्री हो रही
माना दुर्गोत्सव समिति रायपुर के अध्यक्ष रंजीत डे और बिलासपुर कंस्ट्रक्शन कॉलोनी दुर्गोत्सव समिति के अध्यक्ष प्रकाश यादव का कहना है कि पंडालों के लिए प्रशासन ने रजिस्टर में एंट्री के जो नियम बनाए हैं वह गलत हैं, शराब दुकानों में प्रशासन कौन सी एंट्री करवा रहा है। समिति से जुड़े और मोहल्ले के लोग भंडारा में ही प्रसाद खाकर व्रत तोड़ते रहे हैं। इस बार भी नियमों का पालन करते हुए व्रत रखने वाले भक्तों के लिए भंडारा होगा।

उबली चीज से खत्म हो जाते हैं विषाणु
बिलासपुर मिलन मंदिर गोंडपारा के सचिव प्रवीर सेनगुप्ता का कहना है कि इन नियमों का हम विरोध करते हैं। 4 फीट की मूर्ति से कोरोना नहीं होगा, बड़ी मूर्ति से कोरोना होगा। बाजार में रोज भीड़ उमड़ रही है। प्रसाद बांटने, बैंड, डीजे, लाइट से कोरोना होगा ये कैसा तर्क है। साइंस का नियम कहता है जो चीज उबल जाती है उसमें विषाणु खत्म हो जाते हैं। प्रशासन से छूट मिलती है तो हम भंडारा करेंगे। ये हमारी परंपरा और आस्था है।

प्रशासन को नियमों में छूट देनी चाहिए
बिलासपुर बंगाली एसोसिएशन के अध्यक्ष अमर सरकार का कहना है कि प्रशासन को नियमों में छूट देनी थी, जो नियम बने हैं बहुत सख्त हैं। आस्था व परंपरा को देखते हुए निर्णय लेना चाहिए। बिलासपुर बंगाली एसोसिएशन ने 1923 में दुर्गा की स्थापना, पूजा-अर्चना और भोग वितरण की परंपरा की शुरुआत की थी। 97वां साल है। प्रशासन को भोग बांटने की छूट देनी चाहिए।

प्रसाद से प्रसन्नता मिलती है, प्रतिबंध लगाना गलत
रायपुर के भागवताचार्य पं. युगलकिशोर शर्मा व श्री वेंकटेश मंदिर बिलासपुर के डॉ. कौशलेंद्र प्रपन्नाचार्य का कहना है कि इस महामारी से सभी की लड़ाई है। प्रशासन का हर चीज पर ज्यादा प्रतिबंध लगाना गलत है। इस समय में सभी लोग तनाव में हैं। ऐसे कार्य करने देना चाहिए जिससे लोगों का मानसिक तनाव कम हो। धार्मिक आयोजन लोगों की आस्था से जुड़े हैं। इस समय श्रृद्धा, भक्ति जरूरी है। मन, आत्मा की संतुष्टि के लिए पूजा जरूरी है। प्रशासन को मंदिरों में चरणामृत और प्रसाद बांटने की छूट देनी चाहिए। प्रसाद से प्रसन्नता मिलती है। नवरात्रि के लिए बनाई गई गाइड लाइन में भी प्रशासन को छूट देनी चाहिए। ​​​​​​​



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शराब दुकानों में हर रोज जुटती है ऐसी भीड़ लेकिन इस पर प्रशासन की नजर नहीं है


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