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8943 हेक्टेयर पड़त भूमि को खेत बता कोचियों का धान खपा रहे थे

धान खरीदी के लिए नियम था की किसानों को अपनी जमीन के दस्तावेज जमा कर पंजीयन कराना होता है। पंजीकृत किसानों का ही धान सरकार खरीदती थी। इसमें भी कोचिए किसानों से सांठगांठ कर एसी जमीनों का भी पंजीयन करा देते थे जो पड़त भूमि होती थी यानी जिसमें किसान धान नहीं लगाते थे। इसी पड़त भूमि के दस्तावेजों के आधार कोचिए अपना धान खपाते थे जिससे सरकार को नुकसान होता था। चोरी को रोकने शासन ने किसानों के खेतों में पहुंच गिरदावरी रिपोर्ट तैयार की। इसमें भौतिक सत्यापन किया गया कि किसान की कुल कितनी जमीन है तथा कितने में वह फसल लगाता है तथा कितनी पड़त भूमि है जिसमें किसान फसल नहीं लगाता है। आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। जिले में धान के रकबे का 8 प्रतिशत यानी 8943 हेक्टेयर पड़त भूमि को धान के खेत बता खपा कोचियों का धान अवैध रूप से खपाया जा रहा था।
आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष पंजीयन कराने वाले नए किसानों की संख्या 9758 है। इस वर्ष 2,458 किसानों की मौत के अलावा बंटवारा, खरीदी बिक्री आदि कारणों से निरस्त भी हुआ है। गत वर्ष पंजीकृत किसानों की संख्या 74,276 थी जो इस वर्ष बढ़कर 81,576 हो गई। वहीं धान का रकबा कम हो गया है। गत वर्ष किसानों का 1 लाख 9, हजार 615 हेक्टेयर रकबा पंजीकृत था जो इस वर्ष घटकर 1 लाख 6 हजार 994 हेक्टेयर हो गया है। अगर नए किसानों को अलग कर दें तो निरस्त पंजीकृत धान के रकबे की संख्या बहुत अधिक हो जाएगी।

पिछले साल 67 हजार किसानों ने बेचा था धान
इस वर्ष धान खरीदी का लक्ष्य 28 लाख क्विंटल रखा गया है। गत वर्ष 26 लाख क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य था। गत सत्र में 28 लाख 3 हजार क्विंटल धान खरीदी हुई थी। गत वर्ष 74,276 किसानो ने पंजीयन कराया था जिसमें से मात्र 67,116 किसानों धान का ही धान खरीदा गया था।

ऐसे समझिए जिले में किसानों का पूरा गणित

  • धान का रकबा 2019 -1.9 लाख
  • पंजीकृत किसानों की संख्या 2019 - 74276
  • पंजीकृत किसानों की संख्या 2020 - 81 576(+7300)
  • धान का रकबा 2020 - 1.7 लाख (-2621 हेक्टेयर)

रकबे में 2.4 हेक्टेयर प्रतिशत कमी आई
इस वर्ष किसानो का 2,621 हेक्टेयर यानी 2.4 प्रतिशत रकबा कम हुआ है। पटवारियो ने अगस्त तथा सितंबर माह में पुरे जिले के गांव गांव में किसानों के खेतों तक पहुंच खेतों की प्रत्यक्ष अवलोकन करते गिरदावरी रिर्पोट तैयार की। इसमें पटवारियों ने पाया बड़ी संख्या में किसानों ने पड़त भूमि का भी पंजीयन धान बेचने के लिए करा रखा था। इसी पड़त भूमि का पंजीयन निरस्त किया गया।

83 लाख रुपए का अवैध धान खपाते थे कोचिए
गिरदावरी में जो तथ्य सामने आए उसके अनुसार 8943 हेक्टेयर पड़त भूमि को धान के खेत बता खपा कोचियों का धान खपाया जा रहा था। 8943 हेक्टेयर 3 लाख 31 हजार 470 एकड़ खेत होते हैं। प्रति एकड़ 15 क्विंटल के अनुपात से धान खरीदा जाता है। जो गड़बड़ी सामने आई है उसके अनुसार हर साल लगभग 83 लाख रुपए का धान कोचिए सरकारी खरीदी में खपा रहे थे जो अब बंद हो जाएगी।

खेतों तक पहुंच तैयार की गिरदावरी रिपोर्ट
जिला सहायक खाद्य अधिकारी टीआर ठाकुर ने कहा पटवारियों ने बारीकी से किसानों के खेतों तक पहुंच गिरदावरी रिर्पोट तैयार की जिसमें पड़त भूमि का पंजीयन निरस्त किया गया। इसके चलते धान का रकबा घटा है। इससे अवैध धान की खरीदी पर अंकुश लगेगा।

पिछले साल 67 हजार किसानों ने बेचा था धान
इस वर्ष धान खरीदी का लक्ष्य 28 लाख क्विंटल रखा गया है। गत वर्ष 26 लाख क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य था। गत सत्र में 28 लाख 3 हजार क्विंटल धान खरीदी हुई थी। गत वर्ष 74,276 किसानो ने पंजीयन कराया था जिसमें से मात्र 67,116 किसानों धान का ही धान खरीदा गया था।



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Calling 8943 hectares of fallow land as a field, they were consuming paddy of Kochies


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