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आरडीए अब कामर्शियल को भी करेगा फ्री-होल्ड, राज्य शासन को लिखा पत्र

कमल विहार के कर्ज की वजह से आर्थिक दिक्कत का सामना कर रहा रायपुर विकास प्राधिकरण आवासीय ही नहीं, अब कामर्शियल प्लाट्स को भी फ्री होल्ड करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए राज्य शासन को पत्र लिखा गया है। इससे आरडीए को अपने कर्ज कम करने तथा आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी। आवासीय प्लाट्स के भी फ्री होल्ड में तेजी लाई जाएगी।
राज्य शासन की अधिसूचना के बाद आरडीए समेत सभी सरकारी एजेंसियां आवासीय प्लाट्स को फ्री होल्ड कर रही हैं। इससे कुछ आमदनी तो हो रही है. लेकिन इससे ज्यादा आमदनी कामर्शियल प्लाट्स के फ्री होल्ड होने से होगी। आरडीए को उम्मीद है कि इससे लगभग 200 करोड़ की आमदनी हो सकती है। फ्री होल्ड से मिलने वाले पैसे से आरडीए अपनी अधूरी योजनाओं को पूरा करेगा और नए-पुराने प्रोजेक्ट्स में ऐसी सुविधाएं विकसित करेगा, जिससे वहां के प्लाट्स, दुकान व मकान तेजी से बिक सकें। आरडीए के नए प्रोजेक्ट्स में कमल विहार, इंद्रप्रस्थ, बोरियाखुर्द तथा पुराने प्रोजेक्ट्स में शैलेंद्र नगर, टैगोर नगर, देवेंद्र नगर, बोरियाखुर्द में आवासीय तथा व्यावसायिक प्लाट्स हैं। इसके अलावा राजेंद्र नगर, हनुमान मंदिर शारदा चौक, ट्रांसपोर्ट नगर, शैलेंद्र नगर और हीरापुर में दुकानें हैं। इन पुराने प्रोजेक्ट्स की कई दुकानों का टेंडर हुआ है। आरडीए के एसई अनिल गुप्ता ने बताया कि आवासीय प्लाट्स में प्रति फ्री होल्ड पर आरडीए को एक से सवा लाख रुपए का शुल्क मिलता है। व्यावसायिक प्लाट्स और दुकानों से ज्यादा शुल्क मिलेगा, क्योंकि इनका गाइडलाइन रेट और बाजार मूल्य अधिक होते हैं।

इसलिए जरूरी फ्री-होल्ड
सभी सरकारी एजेंसियां किसी भी आवासीय या व्यावसायिक योजनाओं में प्लाट्स और मकान-दुकान इत्यादि लीज डीड पर बेचती हैं। यह लीज 30 साल या उससे अधिक समय की होती है। अवधि पूरी होनी पर लीज बढ़ानी पड़ती है। संपत्ति खरीदने के बाद भी खरीदार को उसे बेचने या गिरवी रखने तथा निर्माण इत्यादि करने सहित किसी भी तरह की अनापत्ति के लिए आरडीए से अनुमति लेनी पड़ती है। इसके लिए आवेदन करना पड़ता है। आरडीए 10 प्रतिशत ट्रांसफर चार्ज लेता है। यह चार्ज कलेक्टर गाइडलाइन रेट या आरडीए के रेट (जो भी कम हो) पर लिया जाता है। जैसे आरडीए के किसी योजना के मकान का रेट 10 लाख है, तो इसका 10 प्रतिशत यानी एक लाख शुल्क देना पड़ेगा। तब आरडीए किसी भी तरह की अनुमति या अनापत्ति प्रमाण पत्र देता है। फ्री होल्ड होने के बाद मकान मालिक को प्रापर्टी पर मालिकाना हक मिल जाता है।

"व्यावसायिक प्लाट्स और दुकानों को फ्री-होल्ड करने के लिए शासन को पत्र लिखा है। सीएम और आवास मंत्री से भी बात की गई है।"
-सुभाष धुप्पड़, चेयरमैन आरडीए



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