अंजरेल गांव - यहां सड़क, बिजली, पानी व इलाज को तरस रहे लोग
राजकुमार बघेल | नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ इलाके की खाडगांव पंचायत का आश्रित गांव है अंजरेल। यहां रहने वाले 22 परिवार मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे है। जिले के कई इलाकों में आज भी आवागमन, बिजली, पेयजल और संचार सुविधा सहित कई काम किए जा रहे हैं। लेकिन इस गांव के लोगों को अब तक कोई सुविधा नहीं मिली है।
11 मई 2007 जिले का दर्जा मिलने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि अब मूलभूत सुविधाएं मिलने लगेंगी जो अब तक नहीं हो पाया है। ग्रामीणों को सुविधाएं नहीं मिल रही। इसकी पड़ताल के लिए जब भास्कर संवाददाता बेनूर गांव में पहुंचकर गांव के विकास का जायजा लिया तो पाया कि गांव वालों का अब तक कोेई सुविधा नहीं मिल रही है। ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।
ग्रामीण अकालू ,मंडावी, श्यामलाल नुरेटी, गलसु गावड़े, शामबती नुरेटी व अन्य ग्रामीणों ने बताया कि अब तक पेयजल, बिजली, सड़क जैसे मूलभूत सुविधाओं से मोहताज ग्रामीणों द्वारा पंचायत व शासन, प्रशासनिक अधिकारियों को गांव में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की जा चुकी है। लेकिन जिम्मेदार सुध लेना नहीं चाह रहे है। जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है ।
सरपंच ने कहा- सड़क नहीं होने से रुका है गांव का विकास, जनपद सीईओ बोले- विकास के लिए कोशिश हो रही
सरपंच विशेल नाग ने कहा गांव तक जाने रास्ता नहीं है इसलिए विकास रुका है। जल्द ही भिलाई स्टील प्लांट के माध्यम से सड़क निर्माण शुरू किया गया है। जनपद सीईओ घनश्याम जांगड़े ने कहा कि प्रशासन द्वारा गांव के विकास के लिए योजना बना ली गई है। जल्द ही ग्रामीणों को सुविधाएं मिलेंगी। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा कि मौके पर जाकर निरीक्षण करूंगा।
जानिए, इस गांव में कैसे हैं हालात
चुएं का पानी पी रहे लोग: 7 मोहल्लों में से 6 के लोग चुएं के पानी के भरोसे जीवन जी रहे हैं। ग्रामीण दैनिक उपयोगी वस्तुओं के लिए खोड़गाव या जिला मुख्यालय जाते हैं।
सरकारी राशन लेने के 6 किमी पहाड़ी चढ़ते हैं: जिला मुख्यालय से करीब 12 किमी दूर जंगल के बीच बसे इस गांव के लोग अब भी आवाजाही पगडंडी के भरोसे कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि राशन लेने के लिए 6 किमी पहाड़ी चढ़कर आवाजाही करनी पड़ रही है।
सड़क तो है ही नहीं, बिजली भी नहीं : ग्राम पंचायत तक पहुंचने के लिए भी 3 किलोमीटर की पहाड़ी पैदल ही पार करना पड़ती है। गांव में 5 पारा में बिजली अब तक नहीं पहुंची है। दो पारा सोलर ऊर्जा से रोशन हो रहे हैं।
स्कूल 3 साल से बंद पड़ा: गांव में 2016-17 से प्राइमरी स्कूल बंद है। जबकि प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या इस गांव में करीब 20 है। स्कूल भवन के नाम पर एक आधा-अधूरा व टूटा हुआ शेड है। जिसमें कुर्सी और टेबल टूटी हुई है।
स्वास्थ्य केंद्र तो भूल ही जाइये : ग्रामीणों के इलाज से लेकर डिलीवरी के लिए गांव में कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं है।
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