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25 मिलर्स पिछले सीजन का धान उठा रहे, इस बार के लिए 44 को अनुमति, मौसम खराब, बढ़ी फिक्र

इस सीजन में समर्थन मूल्य पर जिले के 126 केंद्रों में 30 हजार 589 किसानों से 12 लाख 16 हजार 328 क्विंटल धान खरीदी हो चुकी है। लेकिन परिवहन की रफ्तार धीमी है। इसी का नतीजा है कि 41 हजार 794.80 क्विंटल धान का उठाव यानी परिवहन हो पाया है। 90 प्रतिशत से ज्यादा धान का उठाव होना बाकी है। इधर मौसम लगातार खराब होता जा रहा है, मौसम विभाग की मानें तो दो दिनों में बारिश की संभावना है, आज भी दिनभर जिले में बादल छाए रहे। फिलहाल केंद्रों में धान खरीदी की तुलना में उठाव यानी परिवहन नहीं हो पा रहा है। जिसे विभागीय अफसर भी स्वीकार कर रहे है। हर बार ऐसी ही स्थिति बनती है।
आखिर हर साल ऐसी स्थिति क्यों बनती है, इसको लेकर जब भास्कर ने पड़ताल कर परिवहन से जुड़े विभागीय अफसर, मिलर्स, ट्रक मालिकों से चर्चा की तो कई तथ्य सामने आए। सच्चाई यह सामने आई कि 25 मिलर्स पिछले सीजन का धान अब तक संग्रहण केंद्रों से उठा रहे हैं और इस सत्र के लिए अब तक अनुमति नहीं मिली है। जबकि इस बार के लिए 44 को ही अनुमति मिल पाई है। 25 मिलर्स से अब तक अनुबंध नहीं हो पाया है।

अफसर बोले- शासन के आदेश का पालन करें
ट्रकों को परिवहन के लिए उपयोग करने नवीनीकरण कराना जरूरी है लेकिन ट्रक मालिकों का कहना है कि 5500 रुपए देने के बाद और क्यों पैसा दे। 700 रुपए प्रत्येक माह के एवज में मांगा जा रहा है। इस सवाल के जवाब में डीएमओ शशांक सिंह कह रहे है कि शासन की ओर से कंपनी अधिकृत है, पिछले साल अधिकांश ट्रक मालिकों ने किराया में ही जीपीएस को लेकर सहमति दी थी।

जिले के 102 केंद्रों में एक दाना धान उठ नहीं पाया
भले ही परिवहन जल्द शुरू होने के दावे अफसर कर रहे हैं लेकिन जिले के 102 केंद्रों में अब तक एक दाना धान नहीं उठा है यानी परिवहन शुरू नहीं हो पाया है। जबकि पिछले साल की तुलना में इस बार 3 लाख से ज्यादा क्विंटल धान खरीदी हो चुकी है। पिछले साल 13 दिसंबर तक 9.26 लाख क्विंटल धान खरीदी हो चुकी थी। तब भी उठाव शुरू नहीं हो पाया था। लिहाजा जाम की स्थिति है।

उठाव को लेकर अफसरों से कर रहे चर्चा: चंद्राकर
सेवा सहकारी समिति संघ के जिलाध्यक्ष ठाकुरराम चंद्राकर ने कहा कि सभी केन्द्रों में खरीदी हो रही है लेकिन 90 प्रतिशत से ज्यादा केंद्रों में परिवहन शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में स्वाभाविक है खरीदी प्रभावित हो सकती है। इस संबंध में अफसरों से चर्चा कर रहे हैं। कई समिति प्रबंधक व अध्यक्ष कह रहे हैं कि 2-3 दिन में अगर परिवहन शुरू नहीं होता है तो खरीदी प्रभावित हो सकती है।

इन सभी कारणों से देरी
पिछले साल ट्रेकिंग के लिए जिले के 500 ट्रकों में जीपीएस लगा था। जो वर्तमान में मान्य नहीं है, क्योंकि सॉफ्टवेयर में अपडेट होने के बाद ही ट्रकों का उपयोग हो पाएगा। धान उठाने आदेश, अनुमति, अनुबंध में देरी हो रही है। वाहनों में पिछले साल लगे जीपीएस को नवीनीकरण कराने की बात अफसर कह रहे है। लिहाजा ट्रक मालिक, राइस मिलर्स विरोध कर रहे हैं। धान उठाव कब से शुरू होगा। यह कोई बता नहीं पा रहे है। धान खुले में रखा है। वहीं खराब मौसम की मार भी पड़ सकती है। इससे फिक्र बढ़ गई है।

अब भी एक लाख किसान नहीं बेच पाए हैं धान
धान का उठाव नहीं होने से खरीदी प्रभावित हो सकती है। जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ेगा। अब भी एक लाख किसान धान बेचने के लिए बचे है। राइस मिलर्स और ट्रांसपोर्टर अब बिना जीपीएस के वाहनों में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान का परिवहन नहीं कर पाएंगे। सभी मिलर्स और ट्रांसपोर्टर्स को जल्द से जल्द जीपीएस सिस्टम लगवाने के लिए कहा जा रहा है।


सीधी बात
डॉ. एचएल बंजारे, खाद्य अधिकारी
जितनी खरीदी हुई उसकी तुलना में कम है

सवाल - जिले के खरीदी केंद्रों से धान उठाव के लिए अब तक कितने मिलर्स को अनुमति मिली है?
- रजिस्ट्रेशन के आधार पर 44 अरवा मिलर्स को अनुमति दी गई है।
सवाल - उसना मिलर्स कितने हैं, अनुमति को लेकर क्या स्थिति है?
- उसना मिलर्स 25 हैं, इसके लिए शासन की कार्ययोजना नहीं आई है, फिलहाल पिछले सीजन के धान का उठाव कर रहे हैं।
सवाल - खरीदी के हिसाब से परिवहन की रफ्तार धीमी है, बारिश होने से नुकसान हो सकता है?
- परिवहन चल रहा है, यह सही है कि जितनी खरीदी हुई, उसकी तुलना में कम है।
सवाल - जीपीएस सिस्टम मापदंड को लेकर ट्रक मालिक विरोध कर रहे हैं?
- जीपीएस अनिवार्य है, इससे ट्रेकिंग होते रहता है। कुछ सॉफ्टवेयर या अन्य कारणों से विरोध कर रहे होंगे।



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25 millers picking up paddy from last season, 44 allowed for this time, bad weather, increased worry


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