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सीपत की 275 मीटर ऊंची चिमनी ने रोकी थी उड़ान, 20 साल बाद मिला कमर्शियल लाइसेंस

चकरभाठा एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाले विमानों के रास्ते एप्रोच फनल पर बिजली कंपनी की चिमनी आने से एयरपोर्ट एथॉरिटी ऑफ इंडिया ने एयरपोर्ट को डीलिस्ट कर दिया था। इस एयरपोर्ट को पुन: प्रारंभ करने के लिए सरकार को रन-वे की दिशा बदली पड़ी। 20 साल बाद 2018 में पुन:बिलासपुर एयरपोर्ट को कमर्शियल लाइसेंस जारी किया गया। 4 सी लाइसेंस की प्रक्रिया के लिए रनवे की लंबाई बढ़ाने में आसानी होगी। बिलासपुर एयरपोर्ट का पुराना रन-वे पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर बना था उसकी लंबाई 1500 मीटर थी। इस पर वर्ष 1988 में वायुदूत कंपनी ने विमान सेवा शुरू की थी। इसके अलावा राज्य शासन के अलावा कुछ निजी विमानों का आना-जाना लगा रहता था। पूर्व दिशा में एक बिजली कंपनी की स्थापना से उसकी 275 मीटर ऊंची चिमनी रन-वे के एप्रोच फनल में आने वाली थी इसलिए चकरभाठा एयरपोर्ट काे डीलिस्ट कर दिया गया। नियम के मुताबिक किसी भी एयरपोर्ट के रन-वे के एप्रोच फनल पर 25 किलोमीटर तक कोई चिमनी या बड़ी बिल्डिंग नहीं होनी चाहिए। जबकि यह चिमनी रन-वे से 22वें किलोमीटर पर थी । एयरपोर्ट की आवश्यकता पड़ने पर तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार ने चकरभाठा एयरपोर्ट पर उत्तर से दक्षिण दिशा में 1548 मीटर का नया रनवे तैयार कराया। इसके बाद राज्य शासन का विमान एवं निजी विमान यहां आने जाने लगे। यह मामला हाईकोर्ट में दाखिल एक प्रकरण के दौरान बहस में सामने आया। इसका उल्लेख उक्त प्रकरण में किया गया है। प्रकरण में एयरपोर्ट को 1998 में एआई के द्वारा डी लिस्ट किए जाने का भी उल्लेख है। वहीं राज्य सरकार एवं डीजीसीए की बैठक के मिनिट्स में भी यह बात सामने आई कि पुराने रनवे को दोबारा से चालू करने में तकनीकी दिक्कतें हैं।

दो साल चली थी वायुदूत सेवा
32 साल पहले चकरभाठा एयरपोर्ट से वायुदूत हवाई सेवा शुरू हुई थी। शुरुआत में पैसेंजर की कमी अवश्य थी लेकिन इसका संचालन दो साल तक हुआ। इसमें पूरी सवारी मिलने लगी थी। इसी बची एयरपोर्ट एथॉरिटी ऑफ इंडिया की डी लिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू हुई जिसमें चकरभाठा एयरपोर्ट को भी शामिल किया जा रहा था। इस बीच दो साल बाद 1998 में वायुदूत कंपनी ही बंद हो गई जिसके कारण विमान सेवा बंद करनी पड़ गई। उसी साल एआई ने चकरभाठा एयरपोर्ट का लाइसेंस भी रद्द कर दिया।

20 साल बिना लाइसेंस के रहा एयरपोर्ट : राज्य शासन ने बिलासपुर को बड़ा एयरपोर्ट बनाने की पहल की। 1998 से 2017 तक यह बिना लाइसेंस के रहा। वर्ष 2018 में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने विधिवत 2 सी लाइसेंस जारी किया। अब थ्री सी और 4 सी लाइसेंस की कवायद चल रही है।

यह तकनीकी मामला है : बिलासपुर एयरपोर्ट के रनवे का एक्सटेंशन करने के लिए जगह की कमी नहीं है। सेना को सौंपी गई जमीन वापस लेने की कार्रवाई जारी है। जहां तक पुराने रनवे का मामला है तो यह तकनीकी मामला है। इस बारे में डीजीसीए ही स्पष्टतौर पर बता सकता है।
-सिद्वार्थ कोमल परदेशी, सचिव विमानन



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The 275 meter high chimney of Sipat stopped the flight, got commercial license after 20 years


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