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शहर में घुसे 4 भालू, 8 घंटे चले ऑपरेशन में एक पकड़ा गया, बाकी के लिए रात का इंतजार

शाम होने के बाद शहर में घुसकर दहशत फैलाने वाले भालू शनिवार को दिनदहाड़े बस्ती में घुस आए। एक शहर के बीच घनी बस्ती व भीड़भाड़ वाले इलाके मांझापारा में घुसा तो तीन संजयनगर में। मांझापारा बिजली आफिस के पास एक बाड़ी में घुसा भालू बीच बस्ती में होने के कारण खतरनाक था। इसे पकड़ने 8 घंटे मशक्कत कर आपरेशन चलाते ट्रंकुलाइज कर पकड़ा गया। संजय नगर के भालुओं को निकालने अंधेरा होने का इंतजार किया जा रहा है।

सुबह 8 बजे बिजली कार्यालय के पास एक बाड़ी में भालू दिखा। सूचना मिलने पर वनविभाग की टीम पहुंची। भालू एसी जगह घुसा था कि उसे पकडऩा मुश्किल था। आसपास घर होने के कारण खतरा भी था। जहां भालू था उसके आसपास रहने वालों को दरवाजा बंद कर घर के अंदर रहने कहा गया। मांझापारा की गलियों में विभाग के गार्ड सुरक्षा के लिए फैल गए।

भालू को पकडऩे पिंजड़ा लाया गया लेकिन भालू पकड़ में नहीं आ रहा था। रायपुर व जगदलपुर से स्पेशलिस्ट शूटर तथा डाक्टरों को बुलाया गया। दोपहर में दोनों जगह से तीन वेटनरी डाक्टरों की टीम कांकेर पहुंची। दोपहर 3.32 बजे ट्रंकुलाइज गन से डा राकेश वर्मा ने भालू को शूट किया।

पहले भागे वनकर्मी फिर दोबारा किया शूट

पहले शूट के बाद भालू के बेहोश होने इंतजार किया गया। बेहोश होने पर उसे पकडऩे जाल लाया गया। अचानक भालू में हरकत होने लगी जिसे देख वनकर्मी भागने लगे। भालू के होश में आने के डर से उसे दोबारा शाम 4 बजे शूट किया गया। भालू के बेहोश होने की पुष्टि होने के बाद जाल में पकड़ बाहर निकाला गया।

बेहोश होने में 10 मिनट लगते हैं

वन विभाग की टीम ने बताया कि भालू व अन्य जंगली जानवरों को पकड़ने ट्रंकुलाइजर गन से बेहोशी का इंजेक्शन दिया जाता है। इंजेक्शन में जानवरों की उम्र व स्थिति को देखते कीटामीन डोज दिया जाता है। शूट के 10 मिनट बाद जानवर बेहोश हो जाते हैं। इंजेक्शन का असर 40 मिनट तक रहता है।

संजय नगर में रात होने का इंतजार

संजयनगर के अंधियार खोप बस्ती के झाडिय़ों में तीन भालू घुसे जिसमें एक मादा व उसके दो शावक हैं। खुली जगह व भालू की संख्या तीन होने के कारण उन्हें पिंजरों में कैद करना मुश्किल था। तीनों भालुओं को एक साथ ट्रंकुलाइज गन से शूट कर बेहोश भी नहीं किया जा सकता।

भालू देखने के चक्कर में लोग कोरोना का खतरा भूल गए

भालू को देखने रास्ता किया जाम: भालू को जब पिंजड़ा में डाल बाड़ी से बाहर निकाला गया तो वहां भारी भीड़ जमा थी। भालू को पकड़ने की खबर मिलने के बाद उसे देखने के चक्कर में लोग कोरोना की दहशत भूल गए। भीड़ में अधिकांश लोग बिना मास्क लगाए थे। मार्ग जाम कर हर कोई वहां फोटो खींचने में जुटा रहा।

तो जूठन के लालच में आ रहे भालू : शहर में भालू जूठन व कचरे में फेंके भोजन की लालच में आ रहे हैं। बिजली विभाग के बाजू बाड़ी में जहां भालू घुसा था वहां एक होटल का बचा खाना फेंका जाता है। संजयनगर में जहां भालू घुसे वहां भी कचरों में खाने का समान फेंका जाता है।

कचरे में न फेंके खाने का सामान: डीएफओ अरविंद पीएम ने शहर के लोगों से अपील करते कहा खाने पीने का सामान व बचा हुआ भोजन कचरे में न फेंके। इसके लिए भालू शहर आ रहे हैं। पकड़े गए भालू के स्वास्थ्य की जांच की जाएगी। स्वस्थ्य होने पर उसे दूर जंगल में छोड़ा जाएगा।

3 साल में ये तीसरा ऑपरेशन

22 अक्टूबर 2019 - भालू कम्युनिटी हाॅल व पीडब्ल्यूडी कालोनी के बीच घुस गया था। घंटों बाद ट्रंकुलाइज कर पकड़ा।

19 दिसंबर 2018 - सिविल लाइन में जज के बंगले में घुसे तीन भालू को पकडऩे 9 घंटे तक आपरेशन चला था।





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कांकेर। भालू को जाल में पकड़ बाहर निकालते वनकर्मी।


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