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काेराेना के मरीजों को दवा, इलाज परामर्श देने में बस्तर को पूरे अंक

होम आइसोलेशन के दौरान कोविड पॉजिटिव मरीजों को समय से इलाज, परामर्श और दवाएं पहुंचाने में बस्तर जिले काे 100 में से 100 अंक मिले हैं। यह अंक खुद मरीजों ने दिए है। हाल ही में सरकार ने होम आइसोलेशन में रह रहे संक्रमितों से उन्हें मिलने वाली सुविधाओं पर फीडबैक लिया था।
फीडबैक में बस्तर जिले में होम आइसोलेटेड मरीजों ने जिला स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं के लिए सर्वोच्च अंक दिए हैं। प्रदेश के सभी 27 जिलों में मरीजों से फीडबैक लिए गए थे, बस्तर समेत 9 ऐसे जिले हैं, जहां मरीजों ने उन्हें मिली सुविधाओं के लिए 100 में 100 नंबर दिए हैंं। कोविड काल में यह दूसरा मौका है, जब मरीजों के फीडबैक में बस्तर अव्वल रहा है। इससे पहले जगदलपुर मेडिकल कॉलेज को यहां भर्ती रहे मरीजों ने नंबर-1 चुना था। इसके लिए भी राज्य सरकार ने फीडबैक सर्वे कराया था।

घरों में मरीजों की निगरानी कर रही बस्तर नोनी
होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों की निगरानी बस्तर नोनी नाम के पोर्टल से होती है। जिला प्रशासन ने सभी एमबीबीएस डॉक्टरों से लेकर वरिष्ठ चिकित्सकों को होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों के इलाज की छूट दी है। इसके अलावा मरीजों के सेहत पर नजर रखने के लिए पोर्टल भी लांच किया है। इसके तहत होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों को www.bastarnoni.in पोर्टल मे जाकर मोबाइल नंबर व अन्य जानकारी का रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। इसके बाद लगातार 17 दिनों तक मरीजों का पल्स रेट, तापमान व ऑक्सीजन सैचुरेशन की जानकारी सुबह शाम अनिवार्य तौर पर डालनी होती है। यदि मरीज इसमें जानकारी नहीं डालता है तो उसे होम आइसोलेशन से निकाल कर आइसोलेशन सेंटर शिफ्ट कर दिया जाता है।

इन पॉइंट्स पर मरीजों से सर्वे किया गया

  • क्या रोजाना डॉक्टर आते हैं दिन में दो बार
  • क्या स्वास्थ्य कार्यकर्ता रोजाना आते हैं
  • ऑडियो विजुअल कॉल के माध्यम से डॉक्टर स्वास्थ्य कार्यकर्ता रोजाना संपर्क में रहते हैं
  • क्या ऑक्सीजन लेवल दो बार मापा जाता है
  • क्या कांउसलर/डॉक्टर ने कोविड-19 के दौरान मानसिक तनाव पर चर्चा की या आपको फोन किया
  • क्या सरकार/हाॅस्पिटल की ओर से वन टाईम किट (दवाएं) दी गईं
  • क्या सरकार/ हॉस्पिटल द्वारा सेंटर में भर्ती होने के बाद मास्क दिया गया
  • क्या समय पर भोजन दिया जाता था
  • क्या भोजन की गुणवत्ता अच्छी थी। क्या हर समय पीने का पानी उपलब्ध था।
  • क्या सेंटर में गर्म पानी की व्यवस्था थी। शौचालय में सफाई व्यवस्था कैसी थी

कोविड सेंटर्स को भी पूरे अंक मिले
फीडबैक में पॉजिटिव मरीजों ने बस्तर जिले के कोविड सेंटर्स को भी सौ में से सौ नंबर दिए हैं। मरीजों ने अपने फीडबैक में दवा, डॉक्टरों की सलाह, आइसोलेशन सेंटर में मिलने वाले खाने और सफाई को बेहतर बताया हैं। सीएमएचओ डॉ. आरके चतुर्वेदी ने बताया कि हम पूरी कोशिश कर रहे कि होम आइसोलेशन और कोविड सेंटर्स में रहने वाले मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध करवा सकें। मरीजों ने हमारी कोशिश पर संतुष्टि जताई है, लेकिन हम इसे अंतिम नहीं मान रहे हैं।

व्यवस्था गड़बड़ाई तो खुद सेंटर्स में बैठे अफसर
कोविड संक्रमण के शुरुआती दौर में आइसोलेशन सेंटरों की व्यवस्था कुछ दिनों के लिए गड़बड़ा गई थी। इसके बाद कलेक्टर रजत बंसल, डिप्टी कलेक्टर रेना जमील और सीएमएचओ डॉ. आरके चतुर्वेदी ने कोरोना के खतरे के बीच आइसोलेशन सेंटरों और हॉस्पिटल में डेरा जमा दिया था। यहां कोविड मरीजों से वन टू वन बात की और उनके लिए आने वाले भोजन को खुद खाया। इसके बाद व्यवस्था में सुधार लाया गया और अब मरीजों ने इस व्यवस्था को बेहतर बताया है।



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