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लाल ईंटों पर प्रतिबंध बेअसर, कार्रवाई की खानापूर्ति से फ्लाईएश ब्रिक्स उद्योग बंद होने की कगार पर

पर्यावरण संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लाल ईंटों पर 2012-13 में प्रतिबंध लगाया गया है। लेकिन यह प्रतिबंध कांकेर जिले में बेअसर हो गया है। खनिज विभाग इसके निर्माण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा है। कभी इसकी शिकायत हुई तो उसे दबाने खानापूर्ति की कार्रवाई कर रहा है। यह आरोप लाल ईंट भट्टों से परेशान उस इलाके के ग्रामीणों के अलावा फ्लाई एस ब्रिक्स उद्योग के संचालकों ने भी लगाया है। कार्रवाई नहीं होने से इनके फ्लाई एस ब्रिक्स उद्योग बंद होते जा रहे हैं।
पर्यावरण के संरक्षण के लिए लाल ईट की जगह फ्लाई एस ब्रिक्स का उपयोग करने का आदेश है। लेकिन इस दिशा में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। कार्रवाई नहीं होने से इस साल भी नवंबर में दीपावली के बाद सीजन शुरू होते ही जिले में लाल ईट के बड़े बड़े भट्टे लगने शुरू हो गए। जहां तक विभाग पहुंच नहीं पा रहा है। कुछ भट्टों में ईंटों को पकाने की तैयारी है तो कुछ से ईट की बिक्री भी शुरू हो गई है। लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं है। इसे लेकर फ्लाई एस ब्रिक्स संघ ने कड़ी आपत्ति जताते विभाग की कार्रवाई पर सवाल खड़ा किया है। इसकी नामजद शिकायत भी जिला प्रशासन से करते कहा गया है कि संजू ठाकुर नाम के एक व्यक्ति द्वारा चारामा, नरहरपुर, सरोना आदि में बिना चिमनी भट्टा के लाल ईट का निर्माण कर जिले भर में बेचा जा रहा है। लेकिन इसे लेकर खनिज विभाग मात्र खानापूर्ति कार्रवाई कर खामोश बैठ गया। जबकि संजू ठाकुर समेत कई लाल ईट निर्माता खुलेआम उसे बेच रहे हैं। शहर में ट्रेक्टर व ट्रकों में लाल इट पहुंचा रहा है। निर्माण स्थलों में इसे डंप भी किया गया है लेकिन विभाग न तो भट्टे तक पहुंच रहा है और नही शहर के निर्माण स्थल तक।

7 साल में 35 फ्लाई एस ब्रिक्स उद्योग खुले, 8 बंद
फ्लाई एस ब्रिक्स के निर्माता भी पहले लाल ईट ही बनाते थे। प्रशासन ने शिविरों तथा अन्य माध्यमों से जागरूकता अभियान चलाते कहा था लाल ईंटों का निर्माण व बिक्री पूर्णत: बंद होगी। इसके बाद पिछले 7 सालों में फ्लाई एस ब्रिक्स के 35 उद्योग खोले गए। लेकिन लाल ईट की बिक्री जारी होने के चलते 8 बंद हो गए। बैंक से लोन लेने के कारण इसके मालिक कर्जदार हो गए। 10 उद्योग जैसे तैसे चल रहे हैं क्योंकि इनके पास कुछ सरकारी निर्माण कार्य है। जबकि 17 उद्योग बंद होने के कगार पर है। क्योंकि यहां इट तो बनी है लेकिन उसका खरीददार अबतक नहीं मिला है।

कार्रवाई की तरह अब फोन उठाने से बच रहे
रेत के अवैध उत्खनन व लाल ईट पर जिस तरह खनिज विभाग कार्रवाई से बचने की कोशिश करता है। उसी तरह विभाग के अधिकारी इन मामलों में जवाब देने से बचने फोन उठाने से भी बचते हैं। जिला खनिज अधिकारी प्रमोद नायक को काल कर संपर्क करने की कोशिश की गई। उन्होंने फोन नहीं उठाया।

मुख्यालय के आसपास ही बन रहीं लाखों ईंट
जिला मुख्यालय के निकट मोहपुर, किरस्टीकुर, मालगांव, ठेलकाबोड़, घोटिया, कोड़ेजुंगा, दसपुर, बागोड़, कोकड़ी, हाटकोंगेरा, देवरी, कुरना, ढ़ेकुना के अलावा तेलावंट, धनेलीकन्हार, कोदागांव, चारामा के अलावा पखांजुर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से लाल ईट निर्माण किया जा रहा है।

किसानों को छूट की आड़ में अवैध निर्माण
किसानो को कुछ मात्रा में ही अपना घर बनाने के लिए लाल ईंट बनाने की छूट दी गई है। जिसे वे बेच नहीं सकते। लेकिन इसी छूट की आड़ में जिले में बड़े पैमाने में लाल ईट का अवैध निर्माण कर धड़ल्ले से बिक्री की जा रही है।

दी प्रदर्शन की चेतावनी
संघ के अध्यक्ष उदितवीर पासी ने कहा आजतक ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब इसकी बिक्री बंद नहीं की गई तो भट्टों से लाल ईट लेकर निकलने वाले वाहनों मौके पर रोक खनिज विभाग व प्रशासन को सूचना दी जाएगी। उसके मौके पर नहीं आने पर प्रदर्शन भी किया जाएगा।

चिमनी वाले एक भी भट्ठे कांकेर जिले में नही
लाल ईट चिमनी वाले संयंत्र से लाल ईट बनाई जा सकता है। चौंकाने वाली बात तो ये है की जिले में एक भी चिमनी वाला भट्टा नहीं है। बावजूद इसके निर्माण कार्यों में सिर्फ लाल ईंटों का ही उपयोग हो रहा है।



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Ban on red bricks neutralized, flyash bricks industry on verge of closure due to action


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