शिल्प ग्रामों का विकास कर शिल्पियों को करेंगे प्रोत्साहित
जिले के शिल्पकारों के उत्थान एवं उनकी कलाओं को पहचान दिलाने जिले के सभी विधाओं के शिल्पियों से कलेक्टोरेट के सभा कक्ष में कलेक्टर पुष्पेन्द्र कुमार मीणा ने मुलाकात कर जिले को शिल्प नगरी एवं शिल्प विधाओं में पारंगत ग्रामों को शिल्पग्राम के रूप में निर्माण किये जाने के सबंध में चर्चा की। इस बैठक में बेलमेटल, लौहशिल्प, टेराकोटा शिल्प, भित्ति शिल्प, बांस शिल्प एवं अन्य शिल्पों से जुड़े शिल्पकारों ने हिस्सा लिया।
इस दौरान शिल्पकारों ने शबरी एम्पोरियम द्वारा शिल्पों के न खरीदने, प्रदर्शनियों के आयोजित न होने, शिल्पग्राम के अधूरे निर्माण ने जैसी समस्याआंे से अवगत कराया। कलेक्टर ने शिल्पग्रामों को विकासित कर जिले में कला पर्यटन एवं जिले के शिल्प को ब्रांडिंग करने के लिए विचार किया।
इन गांवों का होगा विकास
इस दौरान भेंलवापदर, किड़ईछेपड़ा, उमरगांव, कुम्हारपारा, करणपुर ग्रामों को प्रारंभिक रूप से शिल्पग्रामों के रूप में विकास के साथ इन गांवों में सौंदर्यीकरण, मूलभूत सुविधाओं के विकास, शिल्पकारों के लिए विशेष पहचान एवं कला पर्यटन सर्किट के विकास पर चर्चा की गई। इसके साथ ही ई-कामर्स कंपनियों को शिल्पकारों से जोड़ने, शिल्पकारों का प्रशिक्षण आदि की बात कही गई।
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