अणुसा स्टोरकर बनाई जा रही औषधि
जशपुर वन संसाधन से जुड़ा हुआ जिला। यहां चारों ओर वनों से आच्छादित है। नदी, पहाड़ झरने, हरे-भरे वृक्ष प्रकृति की शोभा बड़ा रहे है। जहां पर्याप्त मात्रा में वनोपज उपलब्ध है। जशपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत गम्हरिया की शारदा महिला स्व-सहायता समूह द्वारा गौठान में अणुसा संग्रहण कर औषधि बनाया जा रहा है। जिसका उपयोग मुख्य रूप से श्वसन संबंधित बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता है।
वर्तमान में कोरोना महामारी को दूर करने के लिए भी औषधि का उपयोग किया जा रहा है। वहीं शारदा स्व-सहायता समूह की महिलाएं अपना एक आय के रूप में रोजगार प्राप्त कर रही है। इसके लिए डीएफओ श्रीकृष्ण जाधव वन विभाग सेे मशीन भी उपलब्ध कराया गया है।
इस काम में युवा वैज्ञानिक समर्थ जैन महिलाओं को औषधी निर्माण के लिए मार्गदर्शन देते रहते हैं। शारदा स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष हीरामुनी भगत तथा सचिव सुमित्रा देवी ने बताया कि कि रोजगार के रूप में अच्छा अवसर मिला है। वनांचल में औषधि बनाकर उसका उपयोग भी किया जा रहा है। समूह में कुल 10 सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि सभी महिलाओं के द्वारा अणुसा पत्ती संग्रहण कर इसे वन विभाग को सौंपा जाता है। जिसका वन विभाग के माध्यम से 15 रुपए प्रति किलोग्राम के दर से समूह को भुगतान किया जाता है। अभी तक समूह द्वारा 11 क्विंटल संग्रहण किया गया है जिसका कुल मूल्य 16 हजार 500 है। इसी पत्ती का मशीन के माध्यम से चूर्ण रूप तैयार किया जाता है। जिसका बाजार मूल्य 2500 रुपए प्रति किलो है।
महिलाओं ने बताया कि वर्तमान में कुल 23 किलोग्राम चूर्ण तैयार किया गया है। जिसका कुल मूल्य 57 हजार 500 रुपए है। इस तरह समूह की महिलाएं अपना आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन रही है। इस काम में ब्लॉक परियोजना प्रबंधक योगेन्द्र सिंह, विकास विस्तार अधिकारी आरआर भगत अपना सहयोग दे रहे हैं।
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