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विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए इंडियन कंपनी को किया बाहर; हाईकोर्ट ने स्टे दिया तो विदेशी कंपनी से ही रेट कॉन्ट्रेक्ट किया

कोेरोना काल के बीच जहां सरकार लोगों को बेहतर इलाज और सुविधा देने में लगी रही वहीं इसके पीछे ‘खेल’ करते हुए आरएमएससीएल अधिकारियों ने ग्लूको स्ट्रिप खरीद में जमकर नियमों की धज्जियां उड़ाई। इस बार के लालच में उन्होंने इंडियन मेड कंपनी को ही टेंडर प्रक्रिया से बाहर करने के लिए हर तरह के हथकंडे अपना लिए। अब जबकि कंपनी हाईकोर्ट से स्टे ले आई तो टेंडर कैंसिल करने के बाद विदेशी कंपनी से ही दो साल रेट कांट्रेक्ट ही कर दिया, जिससे पहले से ग्लूको स्ट्रिप खरीदी जा रही थी। क्योंकि अधिकारियों को डर था कि इंडियन कंपनी कम रेट में ग्लूको स्ट्रिप दे सकती है और इससे उनका निजी फायदा रुक सकता है।

पहले यह किया : इंडियन कंपनी को बाहर करने के हथकंडे अपनाए
एनएचएम के तहत डायबिटीज की स्क्रीनिंग में काम आने वाली ग्लूको स्ट्रिप का टेंडर किया। आरएमएससीएल ने शर्त रखी कि केवल यूएस एफडीए सर्टिफिकेट (यूनाइटेड स्टेट फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) वाली कंपनी ही टेंडर में भाग ले सकती हैं। ऐसे में दो विदेशी कंपनियों ने ही टेंडर भरे। इंडियन कंपनी हाईकोर्ट में चली गई और स्टे ले आई। कोर्ट ने कहा कि इंडियन कंपनी को भी टेंडर में शामिल किया जाए। इस आदेश के तुरंत बाद आरएमएससीएल ने टेंडर ही कैंसिल कर दिया। मामला यहीं नहीं रुका। आरएमएससीएल और एनएचएम के अधिकारियों ने इस सब के बीच गली निकली और उन्होंने उस विदेशी कंपनी से ही दो साल रेट कांट्रेक्ट ही कर दिया, जिससे पहले से ग्लूको स्ट्रिप खरीदी जा रही थी क्योंकि अधिकारियों को डर था कि इंडियन कंपनी कम रेट में ग्लूको स्ट्रिप दे सकती है और इससे उनका निजी फायदा रुक सकता है।

अब यह कर रहे : टेंडर फाइनल नहीं किया ताकि निरस्त हो जाए
आरएमएससीएल ने नया ग्लूको स्टिप का ही नया टेंडर निकाला है जिसमें हर ग्लूको स्टिप के साथ ऑटो डिसेबल लेंससेट फ्री देना होगा। साथ ही 1000 स्टिप पर एक ग्लूकोमीटर भी देना होगा। इस टेंडर को भरने में भी तीन कंपनियां (दो विदेशी और एक इंडियन) आई। एक विदेशी कंपनी ने तो गलत रेट भर दी।

दूसरी की ओर से केवल स्टिप की रेट भरना (3.27 रुपए) होना सामने आया है। अगर यह टेंडर इस रेट पर ही दिया जाता है तो कंपनी की ओर से सप्लाई करना मुश्किल है। ऐसे में अब अधिकारी टेंडर को पिछले दो महीने फाइनल ही नहीं कर रहे हैं ताकि टेंडर ही निरस्त किया जा सके। यदि ऐसा होता है तो विदेशी कंपनियां फिर से नई रेट भर सकेंगी और इंडियन कंपनी बाहर हो जाएगी।

हम पर होगा यह असर
आरएमएससीएल की ओर से लगातार गड़बड़ियाें का असर यह होगा कि अच्छी कंपनियां भाग लेना बंद कर देंगी और घटिया किस्म का माल मिलने लगेगा। नतीजतन जांच और अन्य कार्य प्रभावित होंगे। इस मामले में यदि देरी होती है तो आरएमएससीएल की ओर से विभिन्न जिलों में देरी से स्ट्रिप पहुंचेंगी और लोगों की जांच प्रभावित होंगी।

  • पहले वाले एमडी बिजी थे और अब नए आए हैं, इसलिए नहीं कर पाए। हम तो चाहते हैं कि हर सप्ताह ही मीटिंग हों और टेंडर फाइनल हो जाएं। हम जल्दी ही इसे फाइनल करेंगे। - ललित मोरदिया, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर, ईपीएम


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