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दंतेश्वरी सरोवर में महिलाओं को बोटिंग का जिम्मा, हादसे से बचाने ले रहीं ट्रेनिंग

देवी दंतेश्वरी के शहर में वैसे तो महिला समूह कई तरह के रोजगारमूलक काम कर आर्थिक सशक्त तो हो ही रही हैं, लेकिन इस बार शहर में एक खास जिम्मा महिलाओं के हाथों में दिया जा रहा है। शहर के हृदय स्थल में स्थित दंतेश्वरी सरोवर में जल्द ही पर्यटकों के लिए बोटिंग की सुविधा उपलब्ध होगी, जिसका संचालन खुद महिलाएं ही करेंगी।
पहली बार होगा जब महिलाएं बोट चलाने का काम करेंगी। इससे पहले यहां महिलाओं को नगर सेना के जवानों द्वारा बोट चलाने की ट्रेनिंग देकर बारीकियां तो सिखाई ही जा रही हैं। इसके अलावा उन्हें यह भी बताया जा रहा है कि बोटिंग के वक्त अगर कोई डूबता है तो उसे तुरंत ही कैसे सुरक्षित निकाला जाए। इस काम के लिए समूह की महिलाएं बेहद उत्साहित हैं। करीब 10 दिनों से यह ट्रेनिंग चल रही है। माना जा रहा है हफ्तेभर के अंदर यह काम शुरू भी हो जाएगा। कलेक्टर दीपक सोनी ने बताया कि दंतेवाड़ा देवी दंतेश्वरी का शहर है। यहां सालभर बाहरी पर्यटकों का आना- जाना लगा रहता है। पर्यटकों को शहर में ही दंतेश्वरी सरोवर में बोटिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा शहर के लोग भी इस सुविधा का आनंद ले सकेंगे। बोट चलाने महिलाओं को जिम्मेदारी दी जा रही है। जल्द ही नई मोटर बोट उपलब्ध कराई जाएगी। दरअसल दंतेश्वरी सरोवर में इसके पहले भी नौका विहार का प्रयास हुआ था, लेकिन नगर पालिका इसके लिए जिम्मेदारी तय नहीं कर पाई व सुविधा बंद हो गई।

यह भी जानिए

  • बोटिंग का समय- दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक
  • प्रति व्यक्ति बोटिंग किराया- 30 रुपए
  • लाइफ जैकेट से लेकर बाकी इमरजेंसी के लिए बाकी सुविधाएं
  • मोटर बोट की सारी जिम्मेदारी संभालेंगी- 10 महिलाएं व 2 पुरुष

गीदम में 7 साल पहले शुरू हुई बोटिंग बंद
दंतेवाड़ा शहर ही नहीं बल्कि गीदम के इकलौते तालाब में भी बोटिंग की सुविधा करीब 6-7 साल पहले शुरू हुई थी। लाखों रुपए खर्च कर बोट लाए गए थे, लेकिन देखरेख व सही व्यवस्था नहीं होने के कारण यह काम सफल नहीं हो सका। तालाब व पार्क घूमने जाने वाले लोगों को महज 2-3 दिनों ही सुविधा मिली, लेकिन बाद में यह बंद हो गया।

महिलाएं बोलीं- शुरुआत में भय था अब जुनून है
हर दिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक महिलाएं ट्रेनिंग ले रही हैं। स्वसहायता समूह की महिला तारा यादव, प्रमिला ने बताया कि जब इस काम के लिए शुरुआत में बताया गया तो भय था, क्योंकि ये एक जोखिम भरा काम है, लेकिन अब भय समाप्त हो गया है। अब काफी अच्छा लग रहा है। महिलाओं को ट्रेनिंग देने वाले नगर सेना के जवान हरीश नेताम ने बताया कि महिलाएं बोट चलाना लगभग सीख गई हैं। करीब हफ्तेभर में पूर्णतः इस काम में दक्ष हो जाएंगी।



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Boating for women in Danteshwari lake, training to protect them from accident


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