परिवार समेत धरना देने पहुंचे भू-प्रभावित लोग
ओडिशा के नीलांचल इस्पात निगम लिमिटेड के 800 अफसर-कर्मियों को एनएमडीसी के नगरनार इस्पात संयंत्र में नियुक्त किए जाने के विरोध में मजदूर संगठनों का बंद लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। शनिवार को धरनास्थल पर मजदूर संगठनों के साथ ही भू-प्रभावितों और उनके परिजन भी बंद के समर्थन में पहुंच गए। इस दौरान उनके बच्चे भी यहां धरने पर बैठे रहे।
इधर शनिवार को पूर्व विधायक और भाकपा नेता मनीष कुंजाम ने मजदूरों के बंद को समर्थन देने पहुंचे। यहां उन्होंने आदिवासी समाजों और संगठनों को इस मसले पर आगे आने की बात कही है। बताया जाता है कि बीते तीन दिनों से नगरनार इस्पात संयंत्र में निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स का काम ठप पड़ा हुआ है।
परिवार के साथ बंद को समर्थन देने पहुंचे भू-प्रभावित और किसान: नीलांचल के अफसरों को नगरनार इस्पात संयंत्र में नियुक्त करने के मामले का विरोध करते हुए जहां मजदूर संगठनों ने बंद जारी रखा हुआ है। वहीं शनिवार को धरनास्थल पर सरपंच संघ के अध्यक्ष समेत माड़पाल, बम्हनी, उपनपाल सहित आस-पास के इलाकों के ग्रामीण और 71 ग्राम पंचायत पदाधिकारी भी पहुंचे। यहां भू-प्रभावितों और किसानों के साथ ही उनके परिवार के सदस्य भी पहुंचे, जहां उन्होंने नारे लगाते हुए नियुक्ति का विरोध किया।
कुलस्ते से मिले कुंजाम विरोध के मुद्दे पर चर्चा
जगदलपुर के माईं दंतेश्वरी एयरपोर्ट पर भाकपा नेता मनीष कुंजाम ने केंद्रीय इस्पात राज्यमंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते से मुलाकात की और उनसे नगरनार इस्पात संयंत्र के मुद्दे पर चर्चा की। इस पर उन्होंने सिर्फ गोलमोल जवाब ही दिया। चर्चा में कुलस्ते ने कुंजाम को बताया कि फिलहाल इस मसले पर कोई ऐसी कार्रवाई नहीं हो रही है, जैसी होनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने कुछ नहीं कहा। कुंजाम ने उनके इस बयान पर कहा है कि जहां केंद्र सरकार की कमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के हाथ हो, वहां कुलस्ते जैसे राज्यमंत्री की कहां चल सकती है। उन्होंने कहा कि कुलस्ते ने इस मसले पर डिप्लोमेटिक जवाब दिया और वापसी के लिए रवाना हो गए।
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