एक वार्ड ने डुबो दी अच्छी रैंकिंग की उम्मीद, सिर्फ वहीं सफाई नहीं होने से कटे 1000 नंबर
ठाकुरराम यादव | 4242 शहरों में हुए स्वच्छता सर्वेक्षण में राजधानी रायपुर को 21वीं से बेहतर रैंक मिल सकती थी। अच्छे रैंक को रोकने के लिए जो कारण जिम्मेदार हैं, उनमें से एक वजह से नगर निगम का पूरा अमला हैरान रह गया है। दरअसल सर्टिफिकेशन के लिए दिल्ली से आई टीम ने रायपुर के 70 वार्डों में सफाई का जायजा लिया, लेकिन एक वार्ड में सफाई इंतजाम को खारिज ही कर दिया। उस वार्ड के व्यावसायिक क्षेत्रों में डस्टबिन नहीं होने की बात भी आई।
नगर निगम का अमला इस वार्ड को ढूंढ रहा है, लेकिन बताते हैं कि नाम का खुलासा सोमवार तक ही हो पाएगा। इस एक वार्ड की वजह से पूरे शहर के सफाई इंतजाम अच्छे नहीं माने गए और स्टार रेटिंग में 1000 में से एक भी नंबर नहीं मिला। राजधानी समेत शहरों में स्वच्छता सर्वेक्षण चार खंड में हुआ और हर खंड में 1500-1500 अंक तय थे। चार में से तीन खंड में रायपुर को 4500 में से रायपुर को 3598.72 अंक मिले। यानी इसमें रायपुर को 79.97 फीसदी अंक मिल गए। सिर्फ सर्टिफिकेशन के एक खंड में 1500 में से सिर्फ 500 अंक मिले। यहां प्राप्तांकों का प्रतिशत महज 33.33 रहा। यही वजह है कि रायपुर को 21वीं रैंकिंग से संतोष करना पड़ा।
प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट समेत कई बिंदु सर्वे में
सर्टिफिकेशन के लिए थर्ड पार्टी को निरीक्षण के दौरान जो चीजें देखनी थी उनमें कई सारी बातें शामिल की गई थीं। टीम को एक पूरे शहर के नजरिए से हर वार्ड की स्थिति का मुआयना करना था। यहां आवासीय, व्यावासियक, सामुदायिक क्षेत्रों के अलावा पार्क, ज्यादा मात्रा में कचरा निकालने वाले संस्थान जैसे होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज हॉल, सभागार, हास्पिटल इत्यादि, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, ट्रांसपोर्ट हब, कचरा प्रोसेसिंग प्लांट व साइंटिफिक लैंडफील्ड साइट व टूरिस्ट एरिया का निरीक्षण करना था। शहर की वॉटर बाडी, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट, निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले कचरा का निष्पादन इत्यादि देखना था। यह सभी चीजें देखने और परखने के बाद ही टीम को एक, तीन पांच और सात स्टार रेटिंग देनी था। भास्कर की पड़ताल के मुताबिक स्वच्छता सर्वे के सर्टिफिकेशन में दो श्रेणी रखे गए थे। पहला कचरा मुक्त शहर के लिए स्टार रेटिंग, जिसमें 1000 अंक तय थे। दूसरी श्रेणी खुले में शौचमुक्त शहर के लिए थी, जिसमें 500 नंबर मिलने थे। खुले में शौचमुक्त शहर के लिए रायपुर को पूरे 500 अंक मिल गए, क्योंकि रायपुर ओडीएफ डब्लस प्लस का सर्टिफिकेट मिल चुका था।
कचरा मुक्त शहर की मानिटरिंग के लिए अक्टूबर 2019 और दिसंबर 2019 से जनवरी 2020 के बीच रायपुर का थर्ड पार्टी इंसपेक्शन हुआ। दिल्ली से आई तीसरी पार्टी (पहली पार्टी केंद्र सरकार, दूसरी पार्टी रायपुर निगम) इस दौरान शहर का मुआयना किया। बताया जा रहा है कि टीम को हर वार्ड का बारीकी से निरीक्षण करना था। डोर टू डोर कचरा कलेक्शन, मुक्कड़ों की स्थिति, सड़कों की सफाई इत्यादि। टीम ने 70 में से 69 वार्डों में सभी चीजें पाई, लेकिन एक वार्ड में पाया कि वहां न तो सड़क की सफाई हो रही है और न ही कचरा उठाया जा रहा है। स्टार रेटिंग में अंक नहीं मिलने की एक बड़ी वजह इसे बताई जा रही है। अफसर सोमवार को खुलासा करेंगे कि वह एक वार्ड कौन सा है। यही नहीं, शहर के व्यावसायिक क्षेत्रों में कहीं भी डस्टबिन नहीं रखा गया है। प्रोसेसिंग प्लाटं शुरू नहीं होने की वजह से भी इस श्रेणी में कोई भी रेटिंग नहीं दी गई।
एक स्टार भी नहीं मिला
अफसरों का कहना है कि रायपुर को इस लायक भी नहीं समझा गया कि एक स्टार ही दे दिया जाए। एक स्टार के लिए 200 अंक, तीन के लिए 600, पांच के लिए 800 और सात स्टार के लिए 1000 अंक तय थे। अफसरों ने कहा कि सात स्टार किसी भी शहर को नहीं मिला। अधिकतम पांच स्टार तक गया है। रायपुर को अगर तीन स्टार भी मिल जाते तो 600 अंकों से रैंकिंग काफी ऊपर पहुंच जाती।

"2021 के स्वच्छता सर्वेक्षण में रायपुर को टाॅप-3 में लाने की कोशिश होगी। काफी मशक्कत के बाद हमने वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट शुरू करने में कामयाबी हासिल की है।"
-एजाज ढेबर, महापौर रायपुर
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